चलाते थे आटो- स्कूल वेन, देते थे मोहल्ला खरीदने की धौंस, सर्च में मिले करोड़ों रु.
ऑटो चलाकर गुजर-बसर करने वाले भाइयों के घर मिले करोड़ों रुपये, ज्वेलर्स से मंगवानी पड़ी नोट गिनने की मशीन; 3 घंटे चली गिनती - पुलिस का दावा सोशल मीडिया पर अवैध हथियार की फोटो देख दी थी दबिश तो मिला 'कुबेर का खजाना'

सागर। ऑटो और स्कूल वैन चलाकर अपना गुजारा करने वाले दो भाइयों के घर रविवार सुबह गोपालगंज पुलिस जब अवैध हथियार के सिलसिले में दबिश देने पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। शहर के तिली वार्ड स्थित एक साधारण से मकान में पुलिस को बैगों में भरकर रखे गए करोड़ों रुपये के नोट मिले। चर्चा है कि यह रकम 3 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि के लिए नायब तहसीलदार देवेंद्र पटैरिया और इनकम टैक्स विभाग के अफसरों की मौजूदगी में नोटों की गिनती कराई गई। नोटों की तादाद इतनी ज्यादा थी कि पुलिस-प्रशासन को राजघाट तिराहा स्थित एक नामचीन ज्वेलर्स से नोट गिनने की मशीन मंगवानी पड़ी, जिसके बाद भी गिनती में 3 घंटे से अधिक का समय लग गया।
बंदूकवाली फोटो से खुला करोड़ों का राज
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने अंकित अहिरवार (30) नामक युवक द्वारा सोशल मीडिया पर हथियार का प्रदर्शन करते हुए अपलोड की गई फोटो का संज्ञान लिया था। रविवार सुबह करीब 11 बजे गोपालगंज टीआई घनश्याम शर्मा की अगुवाई में टीम जब अंकित और उसके भाई सौरभ के घर पहुंची, तो वहां संदिग्ध बैग मिले। बैग खोलते ही 500-500 के नोटों के बंडल देखकर टीआई ने तत्काल एसपी अनुराग सुजानिया को पूरे मामले से अवगत कराया।
भोपाल के रिटायर्ड इंजीनियर की ‘अमानत में ख्यानत’?
सूत्रों के मुताबिक, मिली राशि का सीधा कनेक्शन भोपाल से जुड़ा है। यह रकम युवकों की मां रचनाबाई की मौसी सहोद्रा बाई के पति रमेश कुमार अहिरवार की बताई जा रही है। रमेश कुमार दो साल पहले भोपाल पीडब्ल्यूडी से उच्च पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और वर्तमान में ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (आरआरडीए) में संविदा पर कार्यरत हैं। बताया जा रहा है कि यह रकम करीब डेढ़-दो साल से अहिरवार परिवार के पास रखी थी। जब भी रमेश कुमार अपनी रकम वापस मांगते, तो दोनों भाई कभी साफ मना कर देते तो कभी बारिश के पानी में नोट गल जाने का बहाना बना देते थे।
फकीरी से अमीरी का सफर: पड़ोसियों को देते थे ‘नोटों की गड्डी फेंकने’ की धमकी
दोनों युवक के पिता राजेश अहिरवार (जो एक गैस एजेंसी में काम करते थे) के निधन के बाद परिवार ऑटो चलाकर और मां रचनाबाई दूसरों के घरों में झाड़ू-बर्तन का काम करके जीवनयापन कर रहे थे। लेकिन अचानक परिवार का रहन-सहन पूरी तरह बदल गया। करोड़ों रुपये हाथ आते ही मां ने दूसरों के घरों में काम करना बंद कर दिया और घर की रखवाली के लिए 24 घंटे अंदर ही रहने लगीं। कभी पीएम आवास योजना (BLC) से साधारण मकान बनाने वाले इन भाइयों ने हाल ही में शहर की एक नामी कॉलोनी में 40 लाख रुपये का प्लॉट खरीदा और अपने मकान की साज-सज्जा पर बेहिसाब पैसे खर्च करने शुरू कर दिए। मामूली कहासुनी होने पर भी दोनों भाई पूरे मोहल्ले या सामने वाले का मकान खरीद लेने का दम भरते थे और ‘नोटों की गड्डियां फेंकने’ की धौंस जमाते थे।
16/08/2026



