चौपाल/चौराहा

पतियों को ओरल- लंग्स कैंसर देकर पत्नियों के ब्रेस्ट कैंसर पर चिंता जताती ”प्रिंसेस ऑफ बीड़ीगढ़”

 1. मंत्री जी की ‘शर्मिंदगी’ और मातम के बीच जश्न का नैरेटिव

राज्य के कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद पटेल बंडा के शराब कांड का हाल जानने नहीं, बल्कि ‘प्रधानमंत्री मोदी जन्म मास महोत्सव’ का ढोल पीटने सागर पधारे। पत्रकारों ने जब बंडा के मक़तूलों और पीड़ितों पर सवाल दागे कि आपका पूर्व संसदीय क्षेत्र है, आखिर वहां कब जाएंगे? तो मंत्री जी ने बड़ी ‘इमोशनल पैंतरेबाज़ी’ दिखाते हुए कहा, “मैं शर्मिंदगी महसूस करता हूं और इससे ज्यादा कुछ नहीं बोलूंगा।” जब सवाल तीखे हुए, तो ‘लेटर ऑन’ (बाद में) जाने का दिलासा देकर पल्ला झाड़ लिया। मंत्री जी की यह बेरुखी और ‘कोल्ड एटीट्यूड’ समझ से परे है। क्या वे बंडा जाने से इसलिए गुरेज कर रहे हैं क्योंकि जिस समाज का वे नेतृत्व का दावा करते हैं, आरोपी और शिकार दोनों उसी ‘वोटबैंक’ से आते हैं? या फिर उन्हें उन बेवाओं और यतीमों का सामना करने में शर्म आ रही। जिनके परिजन को वह जहरीली शराब लील गई। जिसे रोकना- पकड़न आपकी सरकार की जवाबदारी थी।… मंत्री जी, बंडा कांड पर “शर्मिंदगी” जताने के बजाय, आप समेत भाजपा और शासन-प्रशासन को इस बात के लिए शर्मिंदा होना चाहिए कि पूरे इलाके में 40 से ज्यादा मौतों का मातम पसरा है, वहां आप गली-गली, चौराहे-चौराहे चिराग रोशन करने और ‘सेलिब्रेशन’ का नैरेटिव सेट करना ज्यादा जरूरी काम मान रहे हैं!

2. पूर्व विधायक ने आपदा में ढूंढा सियासी अवसर 

बंडा के जहरीली शराब कांड का ‘मातम’ अभी भी जारी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के ‘चाणक्य’ दिग्विजय सिंह सागर आए। मंशा तो सरकार को घेरने की थी, पर सर्किट हाउस में जब उन्होंने डीसीआर डिस्टिलरी और आबकारी ठेकेदार जंडेल सिंह गुर्जर पर अपनी बात रखी तो मौजूद पत्रकार एक- दूसरे का मुंह देखते रह गए। सिंह ने कहा कि डीसीआर डिस्टिलरी, जिसके ब्रांड ‘सागर गोल्ड’ के नाम पर मौत बांटी गई, वह भाजपा नेता की है। जबकि सच ये है कि इस डिस्टिलरी के मालिक कांग्रेसी नेता गजेंद्र सिंह राठौर हैं। जिसे साल 2018 की अल्पकालीन कांग्रेस सरकार ने ही हरी झंडी दी थी ! पड़ताल में सच बाहर आया कि दिग्विजय साहब को यह भ्रामक ‘इन्फॉर्मेशन’ कांग्रेस के ही एक पूर्व विधायक ने थमाई थी, ताकि राठौर परिवार से चुनावी रंजिश भुना सकें। इसी तारतम्य में उन्होंने तवज्जो न देने वाले आबकारी ठेकेदार जंडेलसिंह गुर्जर को भी लपेट लिया। खैर, ताजा अपडेट यह है कि राजा साहब को पूर्व विधायक की इस ‘डर्टी पॉलिटिक्स’ की भनक लग चुकी है।

3. बिज़नेस ब्लंडर: सागर गोल्ड खुद ही हो गई ‘बोल्ड’

सस्ती शराब के शौकीनों की पहली पसंद ‘सागर गोल्ड व्हिस्की’ बाजार से आउट होने की कगार पर है। हुआ ये कि इस ब्रांड का डुप्लीकेट बनाकर जहरीला कॉकटेल बांटा गया। अफसोशनाक बात यह है कि डिस्टिलरी के मालिकों को इस फर्जीवाड़े की खबर पुलिस से पहले थी, मगर जाने किस ‘बिजनेस एटीट्यूड’ के तहत वे लिखित कंप्लेंट करने के बजाय सिर्फ मौखिक गुहार लगाते रहे। नतीजा सामने है, 40 से ज्यादा बेगुनाह मौत की आगोश में सो गए। इधर ‘सागर गोल्ड’ के स्टॉक वेयरहाउस में धूल जमना शुरु हो गई है। खपत 10 फीसदी पर सिमट गई है। इसे कहते हैं अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारना और ब्रांड की बलि चढ़ा देना!

4.पतियों को ओरल- लंग्स कैंसर देकर पत्नियों के ब्रेस्ट कैंसर पर चिंता जताती ”प्रिंसेस ऑफ बीड़ीगढ़”

सागर इस समय जहरीली शराब कांड के खौफनाक मंजर से उबल रहा है। ठीक इसी वक्त, जब ”प्रिंसेस ऑफ बीड़ीगढ़” दिल्ली की एक वर्कशॉप में विमेन एम्पावरमेंट पर ज्ञान बांटने पहुंचीं, तो उनका इंट्रोडक्शन “बीड़ी इंडस्ट्री की हेड” के रूप में कराया गया। हद तो तब हो गई जब स्टेज के बैकड्रॉप पर ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस के पोस्टर्स लगे थे! यह नजारा देखकर हॉल में बैठी इंटेलेक्चुअल ऑडियंस भी ये तंज कसने से खुद को रोक न सकी कि “यह भी क्या गजब पाखंड है ! पहले दिन-रात बीड़ी पिला-पिलाकर हसबैंड को फेफड़ों का कैंसर दो, और फिर स्टेज पर चढ़कर वाइफ के ब्रेस्ट कैंसर पर लच्छेदार भाषणबाजी झाड़ो!” खैर…..सागर का नाम सालों से दो ही चीजों से जुड़ता आया है…दारू और बीड़ी। पर अब यहां मंच, ओहदे, ग्लैमर और वीआईपी स्टेटस का एक नया ‘हाई-प्रोफाइल’ नशा ट्रेंड में है। मुनाफे के इस खेल में गंदी पॉलिटिकल सेटिंग्स की पूरी गुंजाइश बनी हुई है। सागर की ‘लोकल एलिजाबेथ’ यानी स्वयंभू बीड़ी क्वीन ने इस नशा-ए-हुकूमत को पाने के लिए कोई पैंतरा नहीं छोड़ रहीं। अपनी किटी पार्टी वाली फीमेल फ्रेंड्स के साथ टाइमपास के लिए की गई छोटी-मोटी एक्टिविटीज और अपने पर्सनल गार्डन के फूलों की देखभाल को ये ‘लाइफटाइम सोशल सर्विस’ बताती हैं। बीड़ी बनाने वाली गरीब औरतों के खून-पसीने की कमाई पर खड़ी अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल को ‘कड़ी तपस्या’ का नाम देकर, न जाने कितने सिफारिशी खत जुगाड़े गए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर इनकी बिट्टो रानी ‘महिला सशक्तिकरण’ के एक इवेंट में इंटरव्यू देती नजर आई। वैसे, भगोड़े अरबपति विजय माल्या का ‘विमेन एम्पावरमेंट मॉडल’ तो जगजाहिर है ही ! लाखों-करोड़ों के डिजाइनर ड्रेसेस और हैवी ज्वेलरी पहनकर गरीब बीड़ी मजदूरों के हक की बातें करना… वाह, क्या कॉम्बिनेशन है ! अब ये कीमती गहने बीड़ी मजदूरों की गाढ़ी कमाई के हैं या लंदन से किसी भगोड़े ‘साहब’ ने गिफ्ट किए हैं, यह तो ऊपरवाला ही जाने। इंटरव्यू के दौरान ऑन-स्क्रीन उन्हें बीड़ी कंपनी की पार्टनर दिखाया गया, जबकि एंकर के जुमलों में उन्हें ऑल इंडिया बीड़ी एसोसिएशन का आका बता दिया गया। वैसे, जब जेनेटिकली ही संगठनों और ओहदों पर कब्जा जमाने की लत हो, तो बिटिया रानी अलग कैसे होती! नेशनल और स्टेट लेवल के अवार्ड्स की रेस में साम, दाम, दंड, भेद, नेटवर्क, सिस्टम और साजिश सबका भरपूर इस्तेमाल किया था और किया जा रहा है। इधर मराठी दीदी भी मैडम जी को राष्ट्रपति भवन के रेड कारपेट पर चलाने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। बीड़ी क्वीन की ” समाजसेवा” देख शायद उन्हें ऐसा लगने लगा है कि पूरे सागर में इनके सिवा कोई दूसरा पद्म श्री के एलिजिबल ही नहीं है। ये बात और है कि क्वीन के ही ड्राइवर का बेटा बीते साल ” एलिजाबेथ” को धूल चटा चुका है। वैसे इस बीड़ी के धुएँ और पैसों की चमक का नशा ऐसा चढ़ा है कि कुछ बड़े ब्यूरोक्रेट्स, मिनिस्टर्स, ऑफिसर्स और छोटे-मोटे बाबू भी महारानी का रास्ता साफ करने में लॉबिंग कर रहे हैं। बताते चलें कि महारानी के दिवंगत पति की याद में रखी गई सालाना व्याख्यानमाला पूरी तरह से वामपंथी विचारकों के प्रवचनों से पटी पड़ी है। और अब, यही बिन पेंदे के लोटे सम्मान की हवस में रातों-रात ‘संघी’ चोला ओढ़ने के तिकड़म में लगे हैं। इस पावर और फेम के जहरीले नशे को पूरा करने के लिए जमीर, रिश्ते-नाते, जमीन और आत्मा सबका सौदा हो चुका है।

5. दिग्गी राजा के ‘प्रोटोकॉल’ में सेवादली सिंटू का पावर शो

सागर की कांग्रेस के अंतर्कलह के बीच सेवादल अध्यक्ष सिंटू कटारे का एक अलग ही सियासी ‘कैलिबर’ है। दिग्गी राजा से उनकी नजदीकी तो वैसे भी जगजाहिर थी, मगर सर्किट हाउस में जो सीन दिखा। उसने पुराने सूरमाओं कुछ पल के लिए असमंजस में डाल दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल में जैसे ही भीड़ बढ़ी, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि यहां सिर्फ जर्नलिस्ट, दोनों कांग्रेस अध्यक्ष और सिंटू रुकेंगे… बाकी सब आउट!” साहब का इतना कहना था कि हॉल में मौजूद पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी, पूर्व विधायक तरवर सिंह, पूर्व सांसद आनंद अहिरवार और माधवी चौधरी जैसे दिग्गज नेताओं के चेहरे फक पड़ गए। जिन्हें खुद को ‘मास लीडर’ कहने का गुमान था, वे एक- दूसरे को देखते नजर आए। कॉन्फ्रेंस के बाद राजा साहब ने सिंटू को अपनी ही कार में बिठाया। सागर में यहां-वहां मिलते-बैठते वे सिंटू को लेकर सीधे भोपाल के लिए रवाना हो गए। पूरे सफर में स्थानीय संगठन की इस ‘शो एंड शो’ वाली परफॉर्मेंस पर दोनों के बीच क्या-क्या चटपटी ‘गॉसिप’ और अंदरूनी खिचड़ी पकी होगी, इसका अंदाजा लगाना अब जिले के बाकी कांग्रेसी क्षत्रपों के लिए सिरदर्द बना हुआ है!

नारदवाणी….9425172417

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