गोविंदसिंह पंजा छाप भाजपा और भार्गव- भूपेंद्र शुद्ध भाजपा: दिग्विजयसिंह
बंडा शराब त्रासदी से गरमाया सागर का सियासी पारा

सागर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के तीखे तेवरों ने बुंदेलखंड के सियासी गलियारों में ‘हलचल’ पैदा कर दी है। कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को लेकर उनकी तल्खी थमने का नाम नहीं ले रही। दो दिन पहले बयानों की ‘गुगली’ फेंकने के बाद, रविवार को दिग्विजय ने सीधा ‘अटैक’ किया। उन्होंने गोविंद सिंह को “पंजा छाप बीजेपी” करार देते हुए पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह को “शुद्ध बीजेपी” (ओरिजिनल कैडर) का टैग दे दिया। दिग्विजय यहीं नहीं रुके, उन्होंने अतीत के पन्ने पलटते हुए राजपूत परिवार पर ‘डायरेक्ट हिट’ किया। पूर्व सीएम बोले— “इस फैमिली को मैं दशकों से जानता हूँ। गुलाब सिंह जब कांग्रेस अध्यक्ष थे, तब इनके पास क्या था? और आज क्या स्टेटस है?” उन्होंने 2018 के वाकये का ज़िक्र करते हुए कहा कि कमलनाथ सरकार बनते ही परिवहन मंत्रालय की ‘अड़ीबाज़ी’ शुरू हो गई थी, क्योंकि नज़रें सेंधवा बॉर्डर की ‘ऊपरी कमाई’ पर थीं। उन्होंने ‘सौरभ शर्मा कांड’ का ज़िक्र छेड़ते हुए कहा कि एक गाड़ी में 50 किलो सोना और करोड़ों का कैश रिकवर हुआ, लेकिन ‘मास्टरमाइंड्स’ को बचाकर केवल आरटीओ सिपाही को ‘बलि का बकरा’ बना दिया गया।
मदद का ‘मास्टरस्ट्रोक’ और तंज भरी मुस्कान
दिग्विजय सिंह ने बंडा की चर्चित जहरीली शराब त्रासदी के पीड़ित चार परिवारों को गोद लेने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वे पीड़ितों को 10 हज़ार रुपये की वित्तीय मदद और बच्चों की पूरी पढ़ाई का ‘खर्च’ उठाएंगे। साथ ही कांग्रेस जिलाध्यक्ष और लोकल लीडर्स से भी इस पुनीत काम में हाथ बंटाने की अपील की। इसी दौरान, उन्होंने नौनागिर-बरोदिया हत्या मामले का ज़िक्र बड़े ‘शार्ट’ अंदाज़ में किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए याद दिलाया कि कैसे उन्होंने एक पीड़ित दलित महिला को अपनी बहन बनाया था, लेकिन बाद में आरोपियों के साथ ‘पर्दे के पीछे’ समझौता हो गया।
ओरिजिनल बनाम सिंधिया समर्थक भाजपा का ‘फ़ायर टेस्ट’
सोशल मीडिया पर दिग्विजय सिंह का ‘पंजा छाप बीजेपी’ वाला बयान ज़बरदस्त ट्रेंड कर रहा है। यूज़र्स और सियासी विश्लेषक इसे बीजेपी के ‘ओरिजिनल बनाम सिंधिया समर्थक’ गुटबाज़ी के ‘फ़ायर टेस्ट’ के रूप में देख रहे हैं। गौरतलब है कि सागर जिले के बंडा तहसील (गूगरा खुर्द, नौराज, बमूरा गांव) में कथित जहरीली और नकली शराब पीने से 38 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में ज़िंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। जांच में सामने आया कि ‘बॉम्बे व्हिस्की’ और सागर गोल्ड के नाम से 20 रुपये सस्ती नकली शराब की सप्लाई उत्तर प्रदेश के ललितपुर बॉर्डर से जुड़े नेटवर्क के जरिए हो रही थी। फर्जी QR कोड और नकली रैपर लगाकर बेची गई इस शराब के कारण कई परिवारों के इकलौते कमाने वाले चिराग बुझ गए।
13/09/2026



