खबरों की खबर

जहरीली शराबकांड: सहायक आबकारी आयुक्त की मनमानी कार्य प्रणाली बनी इस भीषणकांड की वजह!

बंडा थाना प्रभारी और सहायक आबकारी आयुक्त समेत 6 लोग सस्पैंड

जहरीली शराबकांड: सहायक आबकारी आयुक्त की मनमानी कार्य प्रणाली बनी इस भीषणकांड की वजह!

बंडा थाना प्रभारी और सहायक आबकारी आयुक्त समेत 6 लोग सस्पैंड

सागर। जिले के बंडा में जहरीली शराब पीने से करीब 18 से 20 लोगों की मौत की खबर से हड़कंप मच गया है। इस पूरे मामले में पुलिस और आबकारी विभाग की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, एडीओ दिलीप खंडात्रे और सब-इंस्पेक्टर रोशनी उरैती को निलंबित कर दिया है, जबकि उपायुक्त नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है। वहीं दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने भी कड़ी कार्रवाई करते हुए बंडा थाना प्रभारी राजेंद्रसिंह कुशवाह और गूगरा चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया है। ​इस पूरी त्रासदी ने आबकारी विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पर्याप्त स्टाफ होने के बावजूद तत्कालीन सहायक आयुक्त कीर्ति दुबे ने काबिल अधिकारियों को फील्ड में भेजने के बजाय दफ्तरों में बिठाकर रखा। एडीओ खंडात्रे को बंडा का प्रभार तो दिया गया था, लेकिन वे कभी इलाके में निरीक्षण करने नहीं गए। स्थानीय ठेकेदारों का कहना है कि वे खंडात्रे को पहचानते तक नहीं थे और उनका सारा संपर्क एसआई रोशनी उरैती से ही होता था। इतना ही नहीं, रामकुमार सूत्रकार, शैलेंद्र मार्को, एसके साकेत और मदन यादव जैसे अन्य अधिकारियों को कोई जिम्मेदारी ही नहीं दी गई थी। इसके बजाय सब-इंस्पेक्टर पूजा अचारी को फ्लाइंग स्क्वाड का प्रभारी बनाकर उनके जरिए पूरे जिले के शराब ठेकेदारों से साठगांठ का खेल चलाया जा रहा था। विभाग की इस लापरवाही का फायदा सीधे तौर पर शराब माफिया उठा रहे थे। कुछ समय पहले ही होटल दीपाली में हुई एक बैठक में शराब ठेकेदारों ने खुलकर शिकायत की थी कि बाजार में ‘बॉम्बे व्हिस्की’ ब्रांड के नाम से जहरीली और नकली शराब बेची जा रही है। इसके बावजूद सहायक आयुक्त ने माफिया पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। स्थानीय लोगों और ठेकेदारों का आरोप है कि आबकारी विभाग के कुछ कर्मचारी पिछले 20 सालों से एक ही जगह पदस्थ हैं और उनका अवैध शराब कारोबारियों के साथ गहरा गठजोड़ है। इन लोगों के पास सरकारी मदिरा भंडार के चार्ज हैं। उदाहरण के लिए गोपालगंज स्थित देसी मदिरा का भंडार, उस सब-इंस्पेक्टर के पास है। जिसने टीकमगढ़ में पदस्थापना के दौरान पचासों केस तो बनाएं लेकिन उनके चालान कोर्ट में पेश नहीं किए। विभागीय जांच में घिरे इस सब-इंस्पेक्टर को एसी दुबे ने भंडारगृह के अलावा उत्तर वृत्त और आंतरिक वृत्त का चार्ज अलग से दे रखा था। कुल मिलाकर ऊपर से नीचे तक फैली इसी मिलीभगत और अनदेखी के कारण बंडा में इतना बड़ा हादसा हुआ और कई परिवारों के चिराग बुझ गए।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!