मुख्य निर्वाचन अधिकारी एड. दुबे ने स्वीकारा कि कतिपय वकीलों के दबाव के कारण निरस्त करना पड़ा था री- कांउंटिंग का निर्णय
जिला अधिवक्ता संघ: दोबारा होगी अध्यक्ष पद के वोट की गिनती

सागर। जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव में अध्यक्ष पद के मतों की फिर से गिनती होगी। यह आदेश मप्र राज्य अधिवक्ता परिषद ने पारित किया है। पुर्नमतगणना 02 सितंबर को होगी। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एचपी सिंह को पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) नियुक्त किया गया है। वे अपनी देखरेख में, जिला निर्वाचन अधिकारी एड. केपी दुबे और उनकी निर्वाचन टीम के साथ पुलिस सुरक्षा के बीच इस पुर्न मतगणना को पूरा कराएंगे। परिषद ने निर्देश दिया है कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आदेशानुसार सीलबंद रखी गई मतपेटी की पुनः मतगणना के परिणामों से राज्य अधिवक्ता परिषद को तुरंत सूचित किया जाए। यहां बता दें कि 22 अगस्त को आए परिणाम में अध्यक्ष पद पर 7 वोट पराजित घोषित एड. संजय द्विवेदी ने परिषद के समक्ष अपील पेश की थी। उनका कहना था कि मेरे काउंटिंग एजेण्ट की मांग के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी एड. दुबे ने पुनः मतगणना का आदेश दिया था लेकिन कुछ ही देर बाद उन्होंने उसे निरस्त कर दिया। जबकि उपाध्यक्ष पद पर वे री- काउंटिंग कराते रहे।
इस पूरी खबर का सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा पहलू तत्कालीन वरिष्ठ अधिवक्ता एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी सीनियर एड. केपी दुबे द्वारा राज्य अधिवक्ता परिषद की विशेष समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया लिखित जवाब और पेन ड्राइव साक्ष्य है। निर्वाचन अधिकारी दुबे ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि 21 अगस्त 2026 को हुए मतदान और 22 अगस्त 2026 को हुई मतगणना के दौरान मतपत्रों की संख्या में भिन्नता और विवाद की स्थिति बन गई थी। जिसके कारण मैंने प्रारंभ में पुनः मतगणना का आवेदन स्वीकार कर लिया था। कुल डाले गए वोटों की संख्या 1350 थी, किंतु गणना अधिकारी के पत्रक के अनुसार वोटों की गिनती 1355 दर्ज हो गई थी, यानी पूरे 5 वोटों का स्पष्ट अंतर आ रहा था।
इसी कारण मेरे द्वारा पुनः मतगणना का निर्णय लिया गया था। परंतु इसके बाद प्रत्याशी एड. अंकलेश्वर सहित उनके भाई एवं अन्य सैकड़ों अज्ञात लोग बिना किसी अनुमति के अवैध रूप से मतगणना कक्ष में घुस आए। उन्होंने कमरे में घुसकर मुझ पर और पूरी निर्वाचन समिति पर भीषण दबाव बनाया। परिस्थिति इतनी बिगड़ गई कि वहां विवाद, मारपीट या कोई भी आपराधिक घटना होने की पूरी संभावना बन गई थी। उस समय किसी भी अप्रिय या आपराधिक घटना को रोकने के उद्देश्य से मैंने मजबूरी में पुनः मतगणना के अपने ही आदेश को पलट दिया और आवेदन निरस्त करने की टीप लिख दी। हालांकि उन्होंने अपने प्रतिवेदन में यह भी स्पष्ट किया कि उनकी नीयत में कोई खोट नहीं था और उनसे कोई जानबूझकर भूल या त्रुटि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि उपाध्यक्ष पद पर भी प्रत्याशी के आवेदन पर पुनः मतगणना कराई गई थी, जिसमें आवेदक विजयी होकर निर्वाचित घोषित हुआ। अतः अध्यक्ष पद की भी पुनः मतगणना कराया जाना पूरी तरह उचित एवं न्यायसंगत है, जिसके लिए राज्य अधिवक्ता परिषद से पर्यवेक्षक भेजा जाना अत्यंत आवश्यक था।
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