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जिला अधिवक्ता संघ की चुनावी सरगर्मियां तेज: 21 को मतदान संभव, महिला आरक्षण पर विवाद !

सागर। जिला अधिवक्ता संघ सागर में चुनावी सरगर्मियों का दौर शुरू हो गया है। निवर्तमान कार्यकारिणी ने आगामी दो दिनों के भीतर आम सभा की बैठक आयोजित की है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में मतदान की तिथि पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी, जिसके 21 अगस्त होने की प्रबल संभावना है। यदि आम सभा की बैठक में इस तिथि को मंजूरी मिल जाती है, तो चुनाव मैदान में उतरने के इच्छुक वकीलों के पास चुनाव प्रचार और जनसंपर्क के लिए तीन सप्ताह से भी कम समय शेष रहेगा।एक ओर जहाँ चुनाव की तैयारियाँ जोरों पर हैं, वहीं दूसरी ओर जिला न्यायालय परिसर में कार्यकारिणी के पदों की संख्या बढ़ाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले दिनों जारी आदेश के तहत जिला अधिवक्ता संघों और राज्य परिषद में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत पद आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था। इस निर्देश का पालन करते हुए संघ की निवर्तमान कार्यकारिणी ने पदों की संख्या में विस्तार करते हुए 4 नए पद बढ़ा दिए हैं। इस नए बदलाव के तहत अब कार्यकारिणी में एक के बजाय दो उपाध्यक्ष और दो सह-सचिव होंगे, जिनमें से एक-एक पद महिला वकीलों के लिए आरक्षित रहेगा। इसके अलावा कोषाध्यक्ष का पद भी महिला वकील के लिए आरक्षित किया गया है और दो कार्यकारिणी सदस्य के पद महिलाओं के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। साथ ही, एक नया अनारक्षित पद ‘सह-कोषाध्यक्ष’ के रूप में सृजित किया गया है। इस प्रकार अब नए ढांचे के अनुसार अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, सचिव, दो सह-सचिव, कोषाध्यक्ष, सह-कोषाध्यक्ष, पुस्तकालय अध्यक्ष और 6 कार्यकारिणी सदस्यों को मिलाकर कुल 15 पदों का गठन किया गया है, जिनमें से 5 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।हालांकि, कार्यकारिणी द्वारा पदों में किए गए इस विस्तार को लेकर अधिवक्ताओं का एक वर्ग सहमत नहीं है और उन्होंने इस आरक्षण प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर ली है। विरोध कर रहे वकीलों का तर्क है कि महिला आरक्षण संघ की मूल 11 सदस्यीय कार्यकारिणी के आधार पर ही तय किया जाना चाहिए था, जैसा कि भोपाल और जबलपुर के अधिवक्ता संघों ने किया है। वकीलों का आरोप है कि वर्तमान कार्यकारिणी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में मनमाने और विधि-विरुद्ध तरीके से पदों की संख्या में इजाफा किया है, जिसको लेकर संघ के भीतर खींचतान की स्थिति बनी हुई है।

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