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सागर जिला अधिवक्ता संघ चुनाव: हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले री-काउंटिंग स्थगित

देर रात आया स्टेट बार काउंसिल का नया आदेश

सागर। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष पद पर जारी विवाद में देर रात एक बड़ा मोड़ आ गया है। राज्य अधिवक्ता परिषद ने बुधवार को दोपहर 1 बजे होने वाली वोटों की री-काउंटिंग को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। परिषद के सचिव एड. आशीष आनंद द्वारा जारी इस नए आदेश के बाद अब दोपहर में होने वाली दोबारा मतगणना की प्रक्रिया रोक दी गई है। इससे पहले यह विवाद सागर जिला न्यायालय परिसर से निकलकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर की चौखट तक पहुंच गया था। मौखिक रूप से विजयी घोषित प्रत्याशी एड. डॉ. अंकलेश्वर दुबे ‘अन्नी’ ने री-काउंटिंग की प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर बुधवार सुबह 10 बजे सुनवाई होना संभावित थी।

याचिका में तदर्थ समिति के फैसले को दी गई चुनौती

​याचिकाकर्ता एड. अंकलेश्वर दुबे ‘अन्नी’ ने अपनी पिटीशन में राज्य अधिवक्ता परिषद (जबलपुर) की तदर्थ समिति के री-काउंटिंग के फैसले को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि समिति के पास परिणाम को रोककर दोबारा मतगणना कराने का कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने समिति के अध्यक्ष व महाधिवक्ता एड. प्रशांत सिंह और दूसरे स्थान पर रहे प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी एड. संजय द्विवेदी को पक्षकार बनाया है।

5 वोटों के अंतर और दबाव के आरोपों पर मचा बवाल

 21 अगस्त को हुए मतदान के बाद 22 अगस्त को आए नतीजों में संजय द्विवेदी मात्र 7 वोटों से पीछे रह गए थे। संजय द्विवेदी का आरोप है कि कुल 1350 वोट पड़े थे, लेकिन गणना पत्रक में 1355 दर्ज हो गए। इस विवाद में सबसे बड़ा मोड़ पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी सीनियर एड. केपी दुबे के जवाब से आया। उन्होंने राज्य अधिवक्ता परिषद को दिए पेन ड्राइव साक्ष्य में स्वीकार किया कि 5 वोटों का अंतर था, इसलिए उन्होंने री-काउंटिंग का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में भारी दबाव, विवाद और मारपीट की आशंका के कारण उन्हें अपना आदेश निरस्त करना पड़ा था।

अनिश्चितता के बीच आया फैसला

​इसी बयान और अपील के आधार पर स्टेट बार काउंसिल ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज एचपी सिंह की मौजूदगी में री-काउंटिंग का आदेश जारी किया था। री-काउंटिंग को लेकर पूरे जिला न्यायालय परिसर में अनिश्चितता और गहमागहमी का माहौल बना हुआ था। हालांकि, अब स्टेट बार काउंसिल द्वारा जारी स्थगन आदेश के बाद री-काउंटिंग टल गई है, और सभी की निगाहें हाईकोर्ट के रुख पर टिकी हैं।

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