विवि:भूगोल के विभागाध्यक्ष प्रो. भारद्वाज हटाया, महिला शोधार्थी के डिनर पर ले जाने की करते थे जिद !
विवि ने आंतरिक जांच समिति गठित की

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के सामान्य एवं व्यावहारिक भूगोल विभाग में महिला शोधार्थियों के उत्पीड़न, दबाव और पत्रों में हेरफेर का गंभीर मामला सामने आया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को तत्काल प्रभाव से विभागाध्यक्ष के प्रशासनिक दायित्व से मुक्त कर दिया है। आंतरिक शिकायत समिति की जांच जारी रहने तक विभागाध्यक्ष का कार्यभार व्यावहारिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता संभालेंगे। आरोप है कि प्रो.विनोद भारद्वाज महिला शोधार्थियों का उत्पीड़न कर रहे थे। वे एक शोधार्थी को वाट्स एप पर मैसेज कर डिनर पर चलने के लिए दबाव बनाते थे।
शिकायतों और आरोप-प्रत्यारोपण का दौर
मामले की शुरुआत इसी महीने हुई, जब भूगोल विभाग की महिला शोधार्थियों ने विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज पर मानसिक उत्पीड़न, अमर्यादित व्यवहार, चाय-नाश्ते के गैर-अकादमिक आमंत्रण और बुनियादी सुविधाओं का अभाव का आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत सौंपी। इसके जवाब में, 20 जुलाई 2026 को विभागाध्यक्ष की ओर से भी शोधार्थियों के खिलाफ अनुशासनहीनता, अनुपस्थिति और फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने जैसे आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई।
शिकायत वापसी के लिए जबरन हस्ताक्षर, फर्जीवाड़ा का भी संदेह
इस मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब 23-24 जुलाई को शोधार्थियों द्वारा शिकायत वापस लेने का एक पत्र प्रस्तुत हुआ। हालांकि, 24 जुलाई 2026 को छह शोधार्थियों ने अधिष्ठाता प्रो. देवाशीष बोस को लिखित पत्र सौंपकर खुलासा किया कि उनसे बंद कमरे में डरा-धमकाकर तथा बिना विषय-वस्तु पढ़ाए सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। शोधार्थियों ने आरोप लगाया कि दो सहायक प्राध्यापकों डॉ. शिवानी मीना एवं डॉ. दीपिका वशिष्ठ ने उन्हें पुलिस शिकायत, मानहानि केस और करियर बर्बाद करने की धमकी देकर जबरन हस्ताक्षर लिए। वहीं शिकायत वापसी के इस पत्र में उस शोधार्थी के भी हस्ताक्षर थे। जिसने शिकायत ही नहीं की थी।
उच्च स्तरीय जांच की अनुशंसा
व्यावहारिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता प्रो. देवाशीष बोस ने 24 जुलाई 2026 को कुलपति को लिखे पत्र में पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध और भयभीत करने वाला बताते हुए निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की अनुशंसा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि शोधार्थियों की सुरक्षा और विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखना सर्वोपरि है। डीन की अनुशंसा और ICC की चल रही जांच के आधार पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने 29 जुलाई 2026 को कार्यालय से आदेश जारी कर प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को विभागाध्यक्ष पद से हटा दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह एक अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था है ताकि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी दबाव के पूरी हो सके।
सागरवाणी…9425172417
30/07/2026



