खबरों की खबर

दो अरब रुपए की अवैध शराब सागर में बिक जाती है !

पुलिस की सख्ती से टूटी माफिया की कमर, लाइसेंसी दुकानों की बिक्री 50% तक उछली

सागर। बंडा में हुए जहरीली शराब कांड के बाद पुलिस और प्रशासन के सख्त रुख से जिले में अवैध शराब का काला कारोबार पूरी तरह चरमरा गया है। कार्रवाई के डर और अवैध ठिकानों पर पसरे सन्नाटे के कारण मदिराप्रेमी अब लाइसेंसी दुकानों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे अधिकृत दुकानों की दैनिक बिक्री में 25 से 50 प्रतिशत तक का भारी उछाल दर्ज किया गया है।
शहर के प्रमुख हिस्सों संजय ड्राइव, काकागंज, तहसीली, झांसी बस स्टैंड, गुजराती बाजार, गऊ घाट और रेलवे स्टेशन की लाइसेंसी दुकानों पर ग्राहकों की अचानक भीड़ बढ़ गई है। झांसी बस स्टैंड शराब दुकान समूह के जीएम राज बहादुर सिंह के मुताबिक, उनके समूह की बिक्री में 25 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि एक दुकान पर तो यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि सदर क्षेत्र में मीट मार्केट, लाल ब्रांच और झांसी बस स्टैंड के आसपास लंबे समय से चल रहे बृजेंद्र खटीक, सुमित खटीक, चिंटू और मोनू खटीक तथा गंगा केशरवानी जैसे अवैध शराब विक्रेताओं के ठिकाने अब पूरी तरह बंद हैं। हालांकि, स्थानीय ठेकेदारों का कहना है कि यदि प्रशासन गयागंज में कच्ची शराब बनाने वालों पर भी शिकंजा कस दे, तो सदर क्षेत्र से अवैध तंत्र का नामोनिशान मिट जाएगा।
संजय ड्राइव दुकान समूह के ठेकेदार अजय जैन और अन्य कारोबारियों का गणित चौंकाने वाला है। ठेकेदारों के अनुसार, यदि पुलिस की यह सख्ती निरंतर जारी रहती है, तो जिले की सभी 104 लाइसेंसी दुकानों की दैनिक बिक्री में औसतन 60 से 65 लाख रुपये का इजाफा होगा। सालाना आधार पर यह वृद्धि 200 करोड़ रुपये से अधिक बैठती है। इस 200 करोड़ रुपये के आंकड़े ने जिले के समानांतर अवैध शराब नेटवर्क की पोल खोलकर रख दी है। इसका सीधा मतलब यह है कि सागर जिले में हर साल 200 करोड़ रुपये की जहरीली, कच्ची और अवैध शराब खपा दी जाती थी, जिससे शासन को एक रुपये के राजस्व का लाभ नहीं होता था और पूरी मोटी कमाई भ्रष्ट तंत्र की जेब में जाती थी।
ठेकेदारों का स्पष्ट मानना है कि यह सख्ती केवल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जहरीली शराब से होने वाली मौतों को रोकने के लिए बेहद जरूरी है। यदि पुलिस-प्रशासन की यह कार्रवाई कुछ दिनों का दिखावा बनकर रह गई और ढील दी गई, तो आगामी वित्तीय वर्ष में सरकार को आबकारी दुकानों के लिए खरीदार तक नहीं मिलेंगे और शासन को इस वर्ष की तरह दुकानें औने-पौने दामों में नीलाम करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
10/09 /2026

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!