अपराध और अपराधी

बंडा में ज़हरीली शराब का तांडव: 12 की मौत, 10 से ज़्यादा गंभीर; सोता रहा आबकारी विभाग

सागर। जहरीली शराब के कहर से बंडा तहसील में चीख-पुकार मची है और मौतों का आंकड़ा बढ़कर 12 तक पहुंच गया है। पिछले 48 घंटों से जारी इस भयानक त्रासदी के बाद भी आबकारी महकमा गहरी नींद में सोता रहा, जिससे अब तक एक दर्जन परिवारों के लोग बेमौत मारे चुके हैं। सिविल अस्पताल में मौजूद लोगों का कहना है कि मौतों का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है, क्योंकि 10 से ज्यादा गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए सागर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।नौराज, बरेठी, बमूरा, गूगरा और आसपास के गांवों में मौत का यह तांडव शुक्रवार से ही शुरू हो गया था। बमूरा में शुक्रवार को पहली और शनिवार को तीन मौतें हुईं, लेकिन प्रशासन और आबकारी विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। सही समय पर कार्रवाई न होने से परिजनों ने मौतों का सही कारण जाने बिना कई शवों का अंतिम संस्कार भी कर दिया। इधर जिला प्रशासन द्वारा बंडा की 5 शराब दुकानों को सील किए जाने की खबर है।

 

घटना में मारे गए और गंभीर रूप से प्रभावित लोगों के नाम सामने आए हैं-

मृतक: नौराज निवासी करतार लोधी (30 वर्ष, पिता: जोधन लोधी), डिगविजय लोधी (28 वर्ष, पिता: देवेन्द्र लोधी) व राजेन्द्र लोधी (26 वर्ष, पिता: मूरत सिंह लोधी); चाटन निवासी रोशन लोधी (32 वर्ष, पिता: जगन्नाथ लोधी); गूगराकुड़ निवासी गोगलू उर्फ चयन सिंह लोधी (42 वर्ष, पिता: साहब सिंह); चौका निवासी हरनाम सिंह लोधी (42 वर्ष, पिता: घनश्याम सिंह लोधी) और उजयार सिंह लोधी (56 वर्ष, पिता: विजय सिंह लोधी)।

गंभीर व रेफर मरीज: दलपतपुर निवासी उत्तम सिंह राय (35 वर्ष, पिता: नाथू सिंह राय) की हालत अत्यंत नाजुक (Critical) बनी हुई है। वहीं, गूगरा निवासी मक्खन (35 वर्ष, पिता: अनरथ) और हिनौती निवासी धनसिंह आदिवासी (40 वर्ष, पिता: परमसिंह आदिवासी) को गंभीर हालत में इलाज के लिए सागर रेफर किया गया है।

आबकारी महकमे की घोर लापरवाही और लाचारी

यह पूरी घटना आबकारी विभाग की आपराधिक लापरवाही और नाकामी को उजागर करती है। ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब के अड्डे बेखौफ फल-फूल रहे हैं और विभाग की नाक के नीचे मौतों का ज़हर बेचा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा गरम है कि शराब अवैध अड्डों से खरीदी गई थी, वहीं कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि यह सरकारी ठेके से ही बेची गई थी। सवाल यह उठता है कि यदि अवैध अड्डों पर ज़हर बिक रहा था तो आबकारी गश्त दल क्या कर रहा था? और यदि सरकारी ठेके से मिलावटी शराब बिकी है, तो महकमे का चेकिंग तंत्र कहां सो रहा था?

डॉक्टरों ने की जहरीली शराब की पुष्टि

प्रभावितों का चेक-अप करने वाले डॉक्टरों के अनुसार, मौत की वजह मिथाइल अल्कोहल (जहरीली शराब) का अत्यधिक सेवन ही है। मरीजों के शरीर का नीला पड़ना, दौरे/झटके आना और अचानक आंखों की रोशनी जाना जैसे लक्षण साफ इशारा करते हैं कि उन्हें शराब के नाम पर ज़हर परोसा गया था।घटना की भयावहता को देखते हुए क्षेत्र में भारी राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। स्थानीय भाजपा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी, पूर्व विधायक तरुवर सिंह, नारायण प्रजापति, नगर पंचायत अध्यक्ष वैभव कुकरेले और जिला कांग्रेस अध्यक्ष भूपेंद्र मोहासा मौके पर पहुंचे। जनप्रतिनिधियों और आक्रोशित ग्रामीणों ने आबकारी विभाग के भ्रष्ट और सुस्त रवैये के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

– 9425172417

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