5 लाख रु. के रिश्वत मामले में तत्कालीन ईपीएफओ कमिश्नर दोषी करार, गिरफ्तारी वारंट जारी
30 जुलाई को सजा के प्रश्न पर होगी सुनवाई, 4 साल पुराने चर्चित रिश्वतकांड में विशेष न्यायालय का बड़ा फैसला

सागर। चार साल पुराने एक चर्चित रिश्वतकांड में जिले की विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने आरोपी को दोषी पाया है। यह मामला साल 2022 के तत्कालीन क्षेत्रीय ईपीएफओ कमिश्नर सतीश कुमार से जुड़ा है। बुधवार को विशेष न्यायाधीश एस. हाश्मी के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी सतीश कुमार कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। उनकी गैर-हाजिरी में उनके वकील इमरान उस्मानी ने अदालत से सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की, लेकिन जज इसके लिए राजी नहीं हुए। न्यायालय ने कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्रीय आयुक्त सतीश कुमार के विरुद्ध अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को सिद्ध पाते हुए उन्हें दोषी करार दिया। चूंकि आरोपी कोर्ट में मौजूद नहीं थे, इसलिए उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया है। अब 30 जुलाई को दंड के प्रश्न पर सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से सहायक निदेशक अभियोजन शाखा अरुण कुमार मिश्रा मौजूद रहे।
क्या था पूरा मामला?
सागर संभाग के इस सबसे बड़े रिश्वतकांड की शुरुआत जून 2022 में हुई थी। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) सागर की टीम ने सिविल लाइंस स्थित कार्यालय के तत्कालीन क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त सतीश कुमार को सिविल लाइंस/सनराइज टाउन स्थित उनके आवास पर 5 लाख रुपए की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों ट्रैप किया था। सतीश कुमार ने सागर की प्रतिष्ठित बीड़ी निर्माता फर्म ‘बीआर एंड कंपनी’ के स्वामी अनिरुद्ध पिंपलापुरे से 10 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। यह रिश्वत बीड़ी फर्म में कार्यरत कर्मचारियों के पीएफ कटौती के सर्वे के बाद सामने आई कथित गड़बड़ियों को दुरुस्त करने और श्रम अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई न करने के एवज में मांगी गई थी।
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