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कटरबाज’ मनु सोनी गिरफ्तार: जब मुल्जिम को देखने कोर्ट रूम छोड़ सड़क पर आए मजिस्ट्रेट

जानिए मनु सोनी की फरारी से जेल तक की पूरी इनसाइड स्टोरी

सागर। शहर की पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। ‘कटरबाज गैंग 0001’ का सरगना और शातिर अपराधी मनु सोनी आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गया है। मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह, एसआई शशिकांत गूर्जर और उनकी टीम ने बीती रात घेराबंदी कर लेहदरा नाका के पास से मनु को दबोच लिया। मनु पर बीती 21 मई को मयंक साहू की हत्या की साज़िश रचने (षडयंत्र) का संगीन आरोप है। गिरफ्तारी के वक्त मनु के साथ उसके दो और ‘क्राइम पार्टनर’ और मयंक साहू की हत्या का मुख्य आरोपी यश सोनी और ओम अहिरवार भी थे, लेकिन वे अंधेरे का फायदा उठाकर रफूचक्कर होने में कामयाब रहे। पुलिस ने जब मनु की तलाशी ली, तो उसके पास से 20 ग्राम हाई-क्वालिटी एमडी ड्रग्स बरामद हुई, जिसकी इंटरनेशनल मार्केट में कीमत करीब 2 लाख रुपये आंकी जा रही है।

एनकाउंटर के डर से पुल से कूदा, पैर-हाथ टूटे, पार्किंग में ही लगी कोर्ट

​पुलिसिया दबिश और खौफ का आलम यह था कि शुक्रवार की रात जब पुलिस ने घेराबंदी की, तो मनु ने लेहदरानाका बाईपास पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज से छलांग लगा दी। इस ‘हाई-वोल्टेज ड्रामे’ में उसका एक पैर और एक हाथ फ्रैक्चर हो गया। शनिवार दोपहर जब पुलिस उसे कोर्ट लेकर पहुंची, तो वह चलने-फिरने की हालत में बिल्कुल नहीं था। मजबूरी में उसे पुलिस जीप की सीट पर ही लेटाकर रखना पड़ा। इसके बाद जो हुआ, वह अदालत में कम ही देखने को मिलता है। मनु सोनी की शारीरिक लाचारी को देखते हुए स्पेशल रिमांड कोर्ट के मजिस्ट्रेट हिमांशु पालीवाल खुद अपने डायस (कोर्ट रूम) से उठकर नीचे वाहन पार्किंग तक आए। मजिस्ट्रेट ने गाड़ी के पास ही मनु के बयान दर्ज किए और अरेस्ट वारंट व रिमांड के कानूनी दस्तावेजों पर दस्तखत लिए।

इंदौर के “56 दुकान” से लाया था ड्रग्स; मां-बहन की बेल के लिए जुटाता रकम

​पुलिस कस्टडी में मनु सोनी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने कुबूल किया कि वह खुद भी ड्रग्स का आदी है और इसे बेचता भी है। मनु ने बताया: “हत्या के मामले में फरार मेरे साथी यश सोनी की मां और मेरी खुद की सगी बहन ड्रग्स तस्करी के आरोप में जेल में बंद हैं। मैं इस एमडी ड्रग्स को बेचकर तगड़ा कैश इकट्ठा करना चाहता था ताकि दोनों की जमानत  करा सकूं। हमारा प्लान था कि बेल कराने के बाद हम सब सरेंडर कर देंगे, लेकिन पुलिस ने खेल बिगाड़ दिया।” मनु के मुताबिक, यह नशीला कंसाइनमेंट उसने इंदौर के मशहूर ’56 दुकान’ इलाके से किसी पेडलर से खरीदा था।

पुलिस ने काटा ‘राशन-पानी’, सोशल मीडिया के ‘गुर्गों’ को भेजा जेल

​मनु सोनी करीब एक महीने से फरार चल रहा था। दुस्साहस ऐसा कि फरारी के दौरान भी उसने सोशल मीडिया पर लाइव आकर एक और मर्डर करने की खुली धमकी दे डाली थी। इसके बाद सागर एसपी अनुराग सुजानिया ने मनु सोनी एंड कंपनी के सिंडिकेट को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने की ठान ली। कमान सीएसपी ललित कश्यप को सौंपी गई। सीएसपी ने सबसे पहले मनु के ‘राशन-पानी की लाइन’ काटी। पुलिस ने मनु के करीब तीन दर्जन (36) मददगारों और सपोर्टर्स को चिन्हित कर सलाखों के पीछे भेज दिया। ये वो लोग थे जो इंस्टाग्राम पर मनु के खौफ और ‘रुतबे’ को मेंटेन रख रहे थे और उसे छिपने के लिए फंडिंग (आर्थिक मदद) पहुंचा रहे थे। जैसे ही ये गुर्गे जेल गए, मनु और उसके साथी पाई-पाई को मोहताज हो गए।

ऐशो-आराम से लंगर तक का सफर, कई राज्यों में काटी फरारी

​पैसे खत्म हुए तो मनु की गैंग को बिलों से बाहर आना पड़ा। खर्च निकालने के लिए इन लोगों ने अशोकनगर, पीथमपुर और आष्टा में ताबड़तोड़ लूट की वारदातों को अंजाम दिया। इन वारदातों से पुलिस को इनके ‘फुटप्रिंट्स’ (सुराग) मिल गए। इसके बाद पुलिस की स्पेशल टीमें इनके पीछे साए की तरह लग गईं। पुलिस से बचने के लिए मनु ने गुजरात, यूपी, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र तक की खाक छानी। मनु ने पुलिस को बताया कि आखिरी दिनों में वे पूरी तरह कंगाल हो चुके थे। हालात इतने बदतर थे कि पेट भरने के लिए उन्हें ऐसे शहरों में पनाह लेनी पड़ी जहाँ गुरुद्वारों में मुफ्त लंगर या मंदिरों में भंडारे चलते हों। लेकिन जब सागर में उसकी बहन भी पुलिस के हत्थे चढ़ गई, तो लाचार होकर उसे वापस सागर का रुख करना पड़ा और वह पुलिस के जाल में फंस गया। पुलिस अब इसके बाकी साथियों की तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही है।

9425172417…..20/06/2026

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