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फर्जी खाता खुलवाने के आरोप में बुरी तरह से फंस गए थे एड. दीपक तिवारी

सागर। दो दिन पहले मंगलवार को सदर निवासी एड. दीपक तिवारी ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या कर ली थी। उनके पेट में नुकीली वस्तु से घाव के निशान भी मिले थे। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण क्या था, इसका सही खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। बहरहाल, एड. दीपक तिवारी की इस संदिग्ध मौत को लेकर बीते दिन जिला न्यायालय परिसर में वकीलों के बीच दिनभर चर्चाओं का माहौल बना रहा। ​जानकारी के अनुसार, एड. तिवारी फर्जी बैंक खाते से जुड़े एक मामले में अपने छोटे भाई पंकज तिवारी के साथ आरोपी थे। यह मामला करीब 6 साल पुराना है। जानकारी के मुताबिक, दीपक तिवारी ‘प्रवरा एसोसिएट्स’ के नाम से एक ठेकेदारी फर्म चलाते थे, जिसमें उनके छोटे भाई पंकज भी पार्टनर थे। वर्ष 2014-15 में उनके परिचित देवब्रत सिंह बैस ने अपने नाम से कैंटोनमेंट बोर्ड के प्रवेश कर नाकों का ठेका लिया था, जिसके लिए बैस ने बतौर सिक्योरिटी मनी, कैंट बोर्ड ऑफिस में 5 लाख रु. की एफडी जमा की थी। पंकज की फर्म इस ठेके में ऑफ-द-रिकॉर्ड पार्टनर के रूप में काम कर रही थी। बाद के वर्षों में जब देवब्रत बैस का ठेका खत्म हो गया और वे कैंट ऑफिस अपनी सिक्योरिटी राशि निकलवाने पहुंचे। उन्हें पता चला कि विजया बैंक (राधा टॉकीज शाखा) स्थित खाते में यह राशि पहले ही ट्रांसफर कर दी गई है। बैस को इस पर बेहद अचरज हुआ कि बिना आवेदन के यह राशि खाते में कैसे आई। उन्होंने जब आरटीआई के जरिए कैंट बोर्ड ऑफिस से दस्तावेज निकलवाए, तब मालूम चला कि विजया बैंक में ही देवब्रत के नाम से एक और फर्जी खाता उन्हीं के दस्तावेजों में हेर-फेर करके खुलवाया गया था।​इस फर्जी खाते की इंट्रोड्यूसर (नए खाते के लिए परिचय कराने वाला खातेदार) ‘प्रवरा एसोसिएट्स’ थी। इसी जानकारी के आधार पर साल 2018 में देवब्रत बैस ने दीपक और उनके छोटे भाई पंकज तिवारी के विरुद्ध धोखाधड़ी का मामला कोतवाली थाने में दर्ज कराया था। पुलिस ने इस मामले में कैंट बोर्ड के कर्मचारियों के साथ-साथ बैंक प्रबंधन को भी गवाह बनाया था।​वर्तमान में इस केस में कैंट बोर्ड के कर्मचारियों के बयान दर्ज हो चुके थे, जबकि बैंक अधिकारियों समेत अन्य महत्वपूर्ण साक्षियों के बयान होना बाकी थे। न्यायालय परिसर में चर्चा थी कि इस प्रकरण में दीपक बुरी तरह उलझ चुके थे और उन्हें इसका अहसास भी हो गया था, जिसके चलते वे गहरे डिप्रेशन में चले गए थे। दूसरी ओर, उनकी आर्थिक स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं रह गई थी। माना जा रहा है कि इन्हीं परिस्थितियों और मानसिक दबाव से घबराकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

सागरवाणी….9425172417… 30/07/26

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