सुप्रीम कोर्ट: कलेक्टर और एसपी मौके पर जाकर आदिवासी महिला को जमीन का कब्जा दिलाएं

सागर। जब एक रसूखदार और प्रभावशाली सफेदपोश ने पिता की विरासत में मिली एक असहाय आदिवासी महिला की तीन एकड़ कृषि भूमि हड़पने की कोशिश की, तो देश की सर्वोच्च अदालत ने न केवल उस अन्याय पर कड़ा प्रहार किया, बल्कि न्याय व्यवस्था की एक मिसाल कायम की। माननीय उच्चतम न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सागर को सीधे निर्देशित किया है कि वे स्वयं मौके पर पहुंचकर पीड़िता को उसकी जमीन का वास्तविक कब्जा दिलाएं, सीमांकन कराकर उसे सुरक्षित करें और उसकी सुरक्षा का अभेद्य ढांचा तैयार करें। न्याय की इस लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ने संवेदनशीलता की अनूठी नजीर पेश करते हुए पीड़िता को दिल्ली में हाजिर होने के बजाय उसकी ससुराल के जिले (श्योपुर) की कोर्ट में बयान दर्ज कराने की विशेष सुविधा दी। उसे विधिक सहायता के तहत 25 हजार रुपये का वाद-व्यय भी प्रदान कराया।
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के पति ने कब्जाई थी जमीन
जिले के मालथौन तहसील स्थित ग्राम अंडेला चक्क बघोनिया की यह घटना उस समय उजागर हुई जब स्व. सीताराम आदिवासी की बेटी मालती को पिता की मृत्यु के बाद मिली तीन एकड़ जमीन पर आरोपी गोविंद सिंह मालथौन ने अनधिकृत रूप से कब्जा कर लिया।
आरोपी गोविंद सिंह, जो सागर जिला ग्रामीण कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष कल्पात्री सिंह का पति है, ने पीड़िता को जान से मारने की धमकियां देकर और गाली-गलौज कर जमीन से बेदखल कर दिया था। पूर्व में तहसीलदार द्वारा कागजों में कब्जा दिलाने के बावजूद दबंगई के बल पर मालती को अपनी ही जमीन पर खेती करने से वंचित रखा गया। जब मालती ने विरोध किया, तो उसे गंभीर अंजाम भुगतने की धमकियां दी गईं, जिस पर मालथौन थाने में बीएनएस की विभिन्न धाराओं सहित एससी-एसटी एक्ट के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया।निचली अदालतों से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद आरोपी गोविंद सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने आरोपी की याचिका पर सुनवाई के दौरान पीड़ित आदिवासी महिला के अधिकारों को सर्वोपरि रखा। मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस जायमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से श्योपुर कोर्ट में मालती के विस्तृत कथन दर्ज कराए, जिसमें महिला ने आरोपी के अवैध कब्जे और उत्पीड़न की पूरी सच्चाई बयां की।
सच्चाई सामने आते ही सुप्रीम कोर्ट ने बेहद तल्ख और सख्त रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया कि सागर कलेक्टर और मालथौन तहसीलदार तुरंत स्थल का निरीक्षण कर भूमि का सीमांकन करें और मालती को वास्तविक भौतिक कब्जा सौंपें। इसके साथ ही सागर एसपी को पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने का आदेश दिया गया है, ताकि कोई भी रसूखदार इस प्रक्रिया में अड़चन न डाल सके। अदालत ने कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी गोविंद सिंह या उसका कोई भी समर्थक इस कार्यवाही में जरा सी भी बाधा उत्पन्न करता है, तो उसे तत्काल मौके से ही गिरफ्तार कर लिया जाए। इसके अलावा, पीड़िता को भविष्य में भी निर्भीक होकर खेती करने के लिए आवश्यकतानुसार स्थाई पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को 13 अक्टूबर 2026 तक अनुपालन शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं।
22/ 09/2026



