कोचिंग संचालकों को अब टॉपर के साथ फेल विद्यार्थियों के बारे में भी बताना होगा
उच्च शिक्षा विभाग ने छात्रों और अभिभावकों के हितों को केंद्र में रखकर उठाया कदम

सागर। प्रतियोगी परीक्षाओं की आड़ में लंबे समय से छात्रों और अभिभावकों को भ्रामक दावों के जाल में फंसाने वाले कोचिंग संस्थानों पर राज्य सरकार ने चाबुक चलाया है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए गए ”मप्र कोचिंग केंद्र (पंजीयन एवं विनियमन) नियम, 2026″ के तहत अब सागर समेत पूरे प्रदेश में कोचिंग माफिया की मनमानी पर लगाम लग सकती है। अब तक नीट, जेईई, यूपीएससी और पीएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थान विज्ञापनों और होर्डिंग्स पर केवल चुनिंदा टॉपर्स की तस्वीरें चमकाकर वाहवाही लूटते थे, लेकिन नए नियमों के बाद उन्हें सफलता के साथ-साथ यह भी साफ तौर पर बताना होगा कि उनके यहां पढ़ने वाले कितने विद्यार्थी असफल हुए।छात्रों और अभिभावकों के हितों को केंद्र में रखकर शिक्षा के नाम पर चल रहे व्यावसायिक खेल में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब कोचिंग संस्थानों को पिछले पांच वर्षों के दौरान हुए कुल एडमिशन और उनमें से पास व फेल होने वाले छात्रों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना होगा। इस व्यवस्था से अभिभावक विज्ञापनों की चकचौंध में उलझने के बजाय यह सटीक आंकलन कर सकेंगे कि दाखिला लेने वाले कुल बच्चों के मुकाबले वास्तव में सफलता का प्रतिशत क्या है। इसके साथ ही, एक ही टॉपर का चेहरा भुनाकर कई-कई संस्थानों द्वारा किए जाने वाले फर्जी दावों के खेल का भी अब अंत होगा।
सरकार का यह नई व्यवस्था सिर्फ परिणामों तक सीमित नहीं है, बल्कि दाखिले के बाद छात्रों के शोषण को रोकने के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अक्सर देखने में आता था कि उम्मीद के मुताबिक पढ़ाई न मिलने पर जब छात्र कोचिंग छोड़ना चाहते थे, तो उन्हें अपनी जमा फीस से हाथ धोना पड़ता था और दूसरी जगह नया खर्च उठाना पड़ता था। अब इस दोहरी मार से राहत देते हुए नियम बनाया गया है कि संस्थानों को एडमिशन से पहले ही अपनी फीस संरचना, एग्रीमेंट और रिफंड पॉलिसी (फीस वापसी के नियम) अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी। इससे अभिभावक अलग-अलग कोचिंगों के नियमों की तुलना करके ही अपने बच्चे का भविष्य तय कर सकेंगे।
इतना ही नहीं, शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़ रोकने के लिए भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। अब किसी भी संस्थान में बिना स्नातक योग्यता के कोई शिक्षक नहीं पढ़ा सकेगा। संस्थानों को अपने सभी शिक्षकों का नाम, उनकी शैक्षणिक योग्यता, सहायक कर्मचारियों का ब्योरा और दी जाने वाली अकादमिक सहायता की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसके अलावा, हर शाखा के लिए अलग से पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी अवधि केवल तीन साल होगी। पुराने संस्थानों को भी 90 दिनों के भीतर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पंजीयन से लेकर पढ़ाई का स्तर, सुरक्षा, छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य और उनकी शिकायतों के निवारण तक की पूरी जिम्मेदारी अब सीधे तौर पर कोचिंग संचालकों की होगी। शिक्षा जगत के जानकारों के अनुसार सरकार का यह साहसिक कदम न केवल मध्यमवर्गीय परिवारों के गाढ़े पसीने की कमाई को लुटने से बचाएगा, बल्कि विद्यार्थियों को मानसिक तनाव और भ्रामक प्रचार से मुक्त कर एक पारदर्शी व सुरक्षित शैक्षणिक माहौल भी प्रदान करेगा।
– 9425172417….25/10/2026



