जहरीली शराब कांड: घोषणा को एक महीना गुजरा, न्यायिक जांच आयोग लापता!
आयोग को तीन महीने में पूरी करना है जांच

सागर। बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में हुए भयावह जहरीली शराब कांड की न्यायिक जांच अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इस हृदयविदारक घटनाक्रम को हुए 40 दिन बीत चुके हैं और राज्य सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की घोषणा को भी एक महीने से अधिक समय हो गया है। इस दौरान प्रशासनिक स्तर पर तत्कालीन पुलिस व आबकारी विभाग के अफसरों और कर्मचारियों के निलंबन तथा 35 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई जरूर हुई है। मुख्य आरोपी चंदू राजा ततरवारा, और रवि लखेरा, मनीष लोधी को भी पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन इस पूरे कांड का सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है कि आखिर जहरीली शराब के निर्माण और अवैध बिक्री में किसकी लापरवाही रही, इसके लिए कौन जिम्मेदार है, घटना में वास्तव में कितने लोगों की जान गई और कितनों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई। इन बुनियादी सवालों का कोई आधिकारिक जवाब अब तक सामने नहीं आ पाया है।
राज्य सरकार ने इस चर्चित कांड की निष्पक्ष जांच के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक आयोग के गठन का ऐलान किया था। आयोग को तीन महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में आबकारी, पुलिस व अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तथा लापरवाही की जांच करना और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस उपाय सुझाना है। हालांकि, न्यायिक जांच प्रक्रिया प्रारंभ होने में हो रही देरी के बीच बंडा और जैसीनगर एसडीएम स्तर पर सौंपी गई मजिस्ट्रियल जांच भी अब तक पूरी नहीं हो पाई है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया की सुस्ती पर सवाल उठ रहे हैं। इधर, प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन फिलहाल आयोग के कामकाज संचालन के लिए कार्यालय सह अदालत कक्ष की तलाश में जुटा है। जिला प्रशासन की एक टीम ने हाल ही में पुराने आरटीओ परिसर स्थित स्मार्ट सिटी के इंक्यूबेशन सेंटर का निरीक्षण कर कुछ कमरों और हॉल को चिन्हित किया है। हालांकि, इस स्थान को अंतिम रूप देने के लिए कलेक्टर प्रतिभा पाल की मंजूरी का इंतजार है।
कार्यालय तय होने के बाद आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति चौहान इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की गहन जांच शुरू करेंगे। जांच के दायरे में पुलिस, आबकारी, चिकित्सा विभाग, स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ पीड़ित परिवारों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करना शामिल रहेगा।
आयोग विशेष रूप से इस बात की भी पड़ताल करेगा कि मिथाइल अल्कोहल युक्त जहरीली शराब के सेवन से हुई जनहानि और स्वास्थ्य पर पड़े गंभीर प्रभावों का वास्तविक दायरा क्या था।
उल्लेखनीय है कि आधिकारिक आंकड़ों में मृतकों की संख्या 22 बताई गई है, जबकि स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि मौतों का आंकड़ा 40 से अधिक है। वहीं, घटना के बाद बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में भर्ती कराए गए 102 मरीजों में से 75 मरीज आंखों की गंभीर समस्या से पीड़ित थे। इन सभी की अस्पताल से छुट्टी हो चुकी है।
9425172417…16/10/2026



