शहर के छपासिए… इस हातिमताई से सबक लें
कांग्रेस अध्यक्ष ना हुए तांगे में जुते घोड़े हो गए

1. शहर के छपासिए… इस हातिमताई से सबक लें
अग्निवीर भर्ती के दौरान देश के होने वाले रक्षकों की सेवा का एक अभूतपूर्व उदाहरण सागर में देखने को मिला, जहां समाजसेवी जंडेल सिंह गुर्जर, सेना की सेवा के प्रति अद्भुत समर्पण के साथ केंद्र में रहे। आज के दौर में जहां लोग दो पैकेट भोजन या चार केले बांटकर सोशल मीडिया पर ‘फोटो वीर’ बनने की होड़ में लग जाते हैं, वहीं जंडेल, बिना किसी शोर-शराबे और प्रचार-प्रसार के पिछले तीन वर्षों से भारतीय सेना की यह अप्रत्यक्ष सेवा कर रहे हैं। मप्र और छत्तीसगढ़ से आई 293 बेटियों और 10 ज़िलों से पहुंचे 10 हज़ार से अधिक अभ्यर्थियों के लिए उन्होंने निःशुल्क ठहरने, नाश्ते और भरपेट भोजन की व्यवस्था संभाली। महात्मा पूरनदास ट्रस्ट मगरोनी (शिवपुरी) के अध्यक्ष जंडेल का यह निस्वार्थ प्रयास हातिम ताई के उस महान चरित्र से मेल खाता है, जो ‘नेकी कर और दरिया में डाल’ की नीति पर चलते थे। देश की सीमा पर जाने वाले युवाओं को शक्ति और संबल देने का यह जज़्बा भारतीय सेना और उसकी गरिमा के प्रति सच्ची भक्ति को दर्शाता है।
2. वे ननि कमिश्नर ना हुए संगठन प्रभारी हो गए
नगर निगम में भाजपा पार्षद दल का डिवाइडेशन सामने खुली गर्वर्मेंट स्कूल के बच्चे तक को पता है। एक खेमा महापौर एंड कंपनी तो दूसरा विधायक प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। और ये दोनों ही खेमे अपने- अपने आका के इशारे पर नगर निगम कमिश्नर की ग्रेडिंग करते रहते हैं। बीते सप्ताह महापौर एंड कंपनी कमिश्नर को निगम के लिए अनसूटेबिल बताते हुए सब में बड़े कमिश्नर यानी संभागीय आयुक्त को दे आए। जवाबी कार्रवाई करते हुए विधायक के ननि में कमांडर इन चीफ उर्फ ननि अध्यक्ष भी बड़े आयुक्त को एक ज्ञापन दे आए। बोल आए कि साब, कमिश्नर सही काम कर रहे हैं। उनके खिलाफ शिकायत पर ध्यान नहीं दें। ननि में चल रहे भाजपाई महापौर Vs विधायक को देख अपने अच्छे दिन की जुगाली करते एक भाजपाई ने कहा, ऐसा लगता है कि कमिश्नर… कमिश्नर न हुए पार्टी के संगठन प्रभारी हो गए हैं। जिनके बलबूते इन दो खेमों की राजनीति की दिशा और दशा तय होती है।
3.कांग्रेस अध्यक्ष ना हुए तांगे में जुते घोड़े हो गए
कभी तांगे में जुते घोड़े को गौर से देखिएगा। उसकी आंखों पर चमड़े का एक कव्हर लगा होता ताकि वह यहां-वहां न देख सके। कुछ ऐसी हालत जिले के देहाती और शहरी अध्यक्ष की है। जब कभी भोपाल इंदौर- भोपाल से संटी पड़ती है ये लोग चार आधे- पूरे कांग्रेसियों को तांगे में लाद राजधानियों की तरफ दौड़ पड़ते हैं। चूंकि आंखों पर चमड़े का कव्हर है सो इन्हें जिले भर में बंट रहे मनमाने बिजली बिल, खाद का संकट, जहरीली शराब से मौत के बाद जुडिशरी जांच की स्थिति, ननि में कमिश्नर की खींचतान के नाम पर सड़क- पानी समेत कई मुद्दे, ऐतिहासिक स्कूलों के मनमाने नामकरण आदि दिखाई नहीं देते। उन्हें तो बस संटी पड़ने का इंतजार रहता है कि भाई लोग, भोपाल के टीन शेड से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंच जिले की इन छोटी-मोटी समस्याओं से पिंड छुड़ा सकें।
4.सागर जेल मानें ड्रग्स, जर्दा और मौत का अड्डा
केंद्रीय जेल सागर में बीते 15-20 दिन में दो बन्दी बादलों में चले गए माने भगवान को प्यारे हो गए। मालूम हुआ कि जेल प्रबंधन काफी समय तक इन मौतों को लुकाने- छिपाने की कोशिश करता रहा। लेकिन बात बाहर आ ही गई। साथ में ये बात भी निकल आई कि जेल में हाईप्रोफाइल नशा भी पहुंच रहा है। महीना- डेढ़ महीना पहले एक हवालाती की शर्ट में सिलकर सफेद पावडर की खुराक पहुंच गई। तीली दिखाकर हवालाती प्लेजर ले ही रहा था कि धर लिया गया। यहां जर्दा- गांजा वापरना ( इस्तेमाल) आम बात है। जेल के एजेंट्स बताते हैं कि यहां नंबर टू पर एक बघेली मिसरा जी हैं जो जम कर चखरी चला रहे हैं। सुपरटेंडेन्ट का रिटायरमेंट पास है सो उन्होंने पूरे जेल की चाबी मिसरा जी को सौंप दी है। गोल इंचार्ज और पेटीएम का खेल तो यहां जिक्र करने लायक भी नहीं है। ताजा खबर ये है कि मिसरा जी की कृपा से जहरीली शराब बनाने – बेचने के आरोपी बड़ी मौज में हैं। उन्हें वो सब सुविधाएं दी जा रहीं हैं जो किसी वीआईपी हवालाती को दी जाती हैं।
5.आबकारी मैडम को कोई सिरदर्द नहीं चाहिए
जहरीली शराब कांड के बाद बंडा की एक सिंगल दुकान बरेठी और मगरधा ग्रुप (मगरधा, बिनैका, बहरोल) की नीलामी कागजों में अटकी है। 15 दिन पहले मगरधा ग्रुप के लिए बोली आ चुकी है लेकिन मामला आबकारी कमिश्नर दफ्तर ग्वालियर में अटका पड़ा है। चर्चा है कि दुकान लेने के इच्छुक ठेकेदार जब तक यहां के बाबू-अफसरों को लक्ष्मीनारायण जी का परसाद नहीं बांटेंगे। नीलामी की फाइल यूं ही धूल खाती रहेगी। भले सरकार को रोजाना लाखों रु. की लाइसेंस फीस की चपत लगती रहे। चपत तो यहां बैठी मादाम भी लगा रहीं हैं ? वे डेढ़ महीने से इन बंद दुकानों पर ठेकेदार के ताले डलवाए हैं जबकि शासन हित में इन दुकानों का संचालन उनको आबकारी अमले से करा लेना था। जानकारों का कहना है कि यह घाटा आगे और बढ़ सकता है क्योंकि नया ठेकेदार जब भी चार्ज लेगा वह नीलामी में बोली लगाने से लेकर दुकान आवंटित होने की तारीख की लाइसेंस फीस देने उत्तरदायी नहीं रहेगा। खबरी एजेंट्स का कहना है कि अभी उनका का पूरा ध्यान पुरानी मादाम और ठेकेदारों के बीच की ट्यूनिंग को थोड़ा सा बढ़ा कर करने में है। इसलिए उनका ध्यान बंद दुकान, नीलामी, कहीं सस्ती तो कहीं ओवर रेट मदिरा, लिकर, दारू वगैरह- वगैरह पर नहीं जा रहा।
14/10/2026



