क्रेटा को किया था चकनाचूर, आयोग ने बीमा कंपनी को दिया क्लेम देने का आदेश
अगर आपसी झगड़े या बवाल में गाड़ी हो जाए डेमेज, तो बीमा कंपनी नहीं कर सकती क्लेम रिजेक्ट!

सागर। अगर कभी सड़क पर कहासुनी, आपसी रंजिश या किसी झगड़े-विवाद में आपकी कार या बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाए, तो क्या बीमा कंपनी यह कहकर क्लेम खारिज कर सकती है कि “यह तो दो पक्षों के बीच की लड़ाई का मामला है?” बिल्कुल नहीं! हाल ही में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग सागर ने ऐसे ही एक विवाद में बीमा कंपनी की मनमानी को ख़ारिज करते हुए वाहन मालिक के हक में फैसला सुनाया है।
यह चर्चित मामला करीब डेढ़ साल पुराना है। अप्रैल 2026 में सागर जिले में वाहन पार्क करने को लेकर हुए एक मामूली विवाद ने काफी बड़ा रूप ले लिया था। इसमें महेश बड़गान के पुत्र सूर्या बड़गान की क्रेटा गाड़ी को सिविल कॉन्ट्रेक्टर अजय लोधी और उनके कर्मचारियों ने पत्थरों, लाठी और डंडों से बुरी तरह कुचलकर क्षतिग्रस्त कर दिया था। यह मामला उस समय काफी ज्यादा सुर्ख़ियों और चर्चा में आया था, क्योंकि उस दौर में थार गाड़ी कतिपय मामलों में हाई-स्पीड, स्टंट्स और लोगों को कुचलने के केसों के कारण काफी ‘हाई-प्रोफाइल’ बनी हुई थी। लेकिन इस अनोखे मामले में उल्टी गंगा बह गई थी और पहली बार एक थार गाड़ी को ही कुछ लोगों द्वारा बुरी तरह से कुचलकर तबाह कर दिया गया था। यह गाड़ी ठेकेदार बड़गान की ही थी।
बीमा कंपनी की ना-नुकर और आयोग का तर्क
घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई और अपनी बीमित गाड़ी का इंश्योरेंस क्लेम दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के पास सबमिट किया। लेकिन कंपनी ने यह खोखला तर्क देकर क्लेम निरस्त कर दिया कि “गाड़ी को हुआ नुकसान किसी दुर्घटना का नतीजा नहीं, बल्कि दो पक्षों के बीच हुए आपसी झगड़े का रिजल्ट है”। इस पर पीड़ित महेश सिंह ठाकुर की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता पवन नन्होरिया ने उपभोक्ता आयोग के समक्ष पक्ष रखा और बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज कराया। आयोग के अध्यक्ष राजेश कुमार कोष्टा ने बीमा नीति की बारिकियों को समझाते हुए स्पष्ट किया कि पॉलिसी में द्वेषपूर्वक कारित की गई क्षति साफ तौर पर कवर्ड होती है। कोर्ट ने कहा कि जब वाहन मालिक ने सामने वाले को उकसाया ही नहीं और अचानक विरोधियों ने हमला करके गाड़ी तोड़ दी, तो यह पूरी तरह से बीमित रिस्क का हिस्सा है। आयोग ने बीमा कंपनी को गाड़ी रिपेयरिंग और क्लेम राशि के रूप में 2,06,309/-रु . (02 जुलाई 2025 से भुगतान की तारीख तक 6% सालाना ब्याज के साथ), मेंटल हैरेसमेंट और सेवा में कमी के मुआवजे के रूप में 50,000/- रु.तथा केस के खर्च के तौर पर 2,000/- रु.का भुगतान करने का आर्डर दिया।



