गरीबों पर नजर रखो…. क्योंकि वही अवैध शराब पीते हैं!
जहां आबादी से शराब दुकान दूर, वहां निगरानी बढ़ाएं: आबकारी आयुक्त, जहरीली शराब की घटनाओं के बाद शासन ने कलेक्टर्स को जारी किए निर्देश

सागर। जिले के बंडा और फिर देवास में जहरीली शराब पीने से हुई दर्जनों मौत के बाद राज्य सरकार की तंद्रा टूटी है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सागर समेत पूरे प्रदेश के कलेक्टर्स को अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए हैं। जिसके तहत दुकानविहीन क्षेत्रों, अवैध पैकारी, एजेंट और डायरी सिस्टम, ढाबों पर सघन जांच के साथ-साथ पुलिस और आबकारी अमले को संयुक्त कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। साथ ही, गरीब बस्तियों और लाइसेंस दुकानों से दूरदराज के इलाकों में निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है। दिए गए निर्देशों को देख ऐसा लगता है कि अवैध शराब केवल गरीब लोग ही पीते हैं। शहर के गली- कूचे की चाय-पान की छोटी-मोटी दुकानों से लेकर ताला बंद पड़े बार में ये शराब नहीं खपाई जाती ? इधर शहर के शराब के लाइसेंसी कारोबारियों का कहना है ये पूरी कवायद कागज़ी खानापूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं है। इसमें कई गंभीर व्यावहारिक समस्याएं और कमियां हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अमले और स्थानीय प्रशासन के संरक्षण या नाकामी के चलते बंडा और देवास जैसे हादसे हुए, आखिर वही अमला इस व्यवस्था को कैसे सुधारेगा। ग्रामीण इलाकों और दूर-दराज की बस्तियों में जहां वैध शराब की दुकानें कोसों दूर हैं, वहां अचानक से सख्त पाबंदी कैसे कारगर होगी, क्योंकि अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए प्रशासन के पास कोई ठोस प्लान ही नहीं है।
निर्देशों में ढाबों और संवेदनशील मार्गों पर औचक निरीक्षण की बात कही जा रही है, जबकि मैदानी स्तर पर अमले की कमी और संसाधनों का अभाव इन छापे- कार्रवाइयों को महज औपचारिकता बनाकर रख देगी। अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटकाने से वे सिर्फ देखने- दिखाने के लिए कागजी कार्रवाई करेंगे, जिससे भ्रष्टाचार का दायरा ही बढ़ना तय है! जब तक आबकारी विभाग अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता नहीं लाता और सिस्टम में बैठे भ्रष्ट तंत्र पर प्रहार नहीं करता, तब तक ऐसे सतही निर्देश सिर्फ हादसों के बाद लीपापोती का एक हिस्सा ही साबित होंगे। 
सागरवाणी….9425172417



