संपत्ति का ब्योरा बना गेमचेंजर इसलिए वरिष्ठता को पछाड़ प्रो.दुबे बने कार्यवाहक कुलपति

सागर। डॉ. हरी सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के नए कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति ने विश्वविद्यालय परिसर में वरिष्ठता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग के प्रो. नागेश दुबे को कार्यवाहक कुलपति का प्रभार सौंपे जाने के बाद से ही अध्यापकों के बीच वरिष्ठता के औचित्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, प्रशासनिक गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस नियुक्ति के लिए केवल वरिष्ठता सूची को ही आधार नहीं बनाया, बल्कि संपत्ति के खुलासे की शर्त इसमें सबसे बड़ा गेमचेंजर साबित हुई।
चर्चा है कि शिक्षा मंत्रालय ने कुलपति पद के दावेदार प्रोफेसर्स में से उन नामों को प्राथमिकता दी, जिन्होंने 30 जनवरी 2026 की निर्धारित समय-सीमा से पहले अपनी वार्षिक आय और संपत्ति का विवरण घोषित कर दिया था। वरिष्ठता क्रम में चौथे स्थान पर मौजूद प्रो. नागेश दुबे इस मानक पर पूरी तरह खरे उतरे, जिसके चलते मंत्रालय ने अन्य वरिष्ठ दावेदारों को दरकिनार करते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी। इससे पहले दावेदारों की दौड़ में प्रो. वर्षा शर्मा, प्रो. बी.आई. गुरु, प्रो. दिवाकर राजपूत, प्रो. चंदा बैन, प्रो. आशीष वर्मा, प्रो. अशोक अहिरवार, प्रो. दीपक व्यास, प्रो. आर.के. गंगेले और प्रो. देवाशीष बोस जैसे प्रमुख नाम शामिल थे।https://www.facebook.com/share/p/1BaNXFiFNv/
इस नियुक्ति के पीछे राजनीतिक खींचतान और दिल्ली से लेकर भोपाल तक की गई जोड़-तोड़ की चर्चाएं भी चरम पर थीं। यहां तक कि एक दावेदार के परिजन तात्कालिक कार्यवाहक कुलपति के कार्यकाल से ही प्रशासनिक परिसर में अपना प्रभाव जमाने में जुटे थे और साहित्यिक चोरी के आरोपों से घिरे एक अन्य प्रोफेसर के साथ मिलकर दिल्ली-भोपाल के चक्कर लगा रहे थे। परंतु, अंतिम क्षणों में संपत्ति की घोषणा न कर पाने का पेंच उनके आड़े आ गया। मूल रूप से वरिष्ठता में पांचवें स्थान पर रहे प्रो. दुबे, प्रो. दिवाकर राजपूत के जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर का कुलपति बनने के बाद चौथे क्रम पर आए थे और संपत्ति का ब्योरा समय पर जमा करने के कारण बाजी मार गए। विश्वविद्यालय के केजनसंपर्क अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल ने स्पष्ट किया कि मंत्रालय द्वारा विवि के 10 वरिष्ठ प्रोफ़ेसर की सूची, उनके बायोडाटा एवं अन्य जानकारी मांगी गई थी। उपरोक्त समस्त जानकारी विश्वविद्यालय द्वारा मंत्रालय को भेजी गई थी। माननीय विजिटर महोदया के अनुमोदनोपारंत मंत्रालय द्वारा विश्वविद्यालय को प्रेषित पत्र के अनुपालन में विश्वविद्यालय में कुलपति का प्रभार सौंपा गया है।



