जल,जंगल और जानवर

शुक्र है कि….. टाईगर जिंदा है

गौरझामर में सुबह घायल मिले बाघ को देर शाम उपचार के लिए भेजा गया भोपाल, बरकोटी गांव की घाटी के पास रोड एक्सीडेंट की आशंका

सागर। शुक्र है कि…… टाईगर जिंदा है। ऐसा इसलिए कहेंगे क्योंकि  अज्ञात वाहन ने रविवार- सोमवार की रात के अंधेरे में इस टाईगर (बाघ) को जोरदार टक्कर मार दी और उसकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार वन विभाग दिन के उजाले में उपचार (ट्रेंकुलाइज) करने का इंतजाम भी नहीं कर सका। जैसे-तैसे डॉक्टरों का इंतजाम किया गया। फिर कहीं देर शाम भोपाल स्थित वन विहार शिफ्ट किया गया। मामला दक्षिण वन मंडल के गौरझामर रेंज का है। यहां बरकोटी गांव के पास घाटी पर यह अज्ञात बाघ घायलावस्था में मिला। ये किशोरवय बाघ सागर- नरसिंहपुर रूट के फोरलेन से कुछ मीटर पड़ा था। इसी आधार पर आशंका जताई जा रही है कि ये बाघ किसी भारी वाहन की टक्कर से घायल हुआ होगा। एक अंदाजा ये भी है कि ये बाघ इन-फाईट (आपसी द्वंद) में घायल हुआ हो। बाघ के पिछले पैर और पसली में खासी चोट है।
……इसलिए ट्रेंकुलाइज करने में देरी हुई
वन विभाग को इस बाघ के घायल होने की खबर सुबह ही मिल गई थी। इसके बाद ही उसे ट्रेंकुलाइज (दवा द्वारा बेहोश) करने की तैयारी शुरु हो गई। लेकिन दक्षिण वन मंडल, शाम तक वेटरेनरी डॉक्टर का इंतजाम नहीं कर सका। बताया जा रहा है कि रानी दुर्गावती टाईगर रिजर्व में एक डॉक्टर हैं लेकिन वे चीता के मामलों में एक्सपर्ट मानी जाती हैं, इसलिए निर्णय लिया गया कि जबलपुर और पन्ना से एक्सपर्ट डॉक्टर्स का पैनल बुलाकर इस बाघ को ट्रेंकुलाइज किया जाए। जैसे-तैसे टीम जमा हुई तो रात 8 बजे के आसपास इस बाघ को भोपाल रवाना किया गया।
वन्यप्राणियों के रोड एक्सीडेंट का 10 दिन में ये दूसरा मामला
ये कहना अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा कि सागर जिले के चारों ओर के फोरलेन रोड निजी, यात्री से लेकर माल ढुलाई वाहनों की आवाजाही को जितना सुगम व तेज कर रहे हैं। उतना ही वे इस क्षेत्र के वन्य प्राणियों के लिए नुकसानदायक साबित होते दीख रहे हैं। करीब 10 दिन पहले ही मालथौन के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से एक युवा तेंदुआ मारा गया था। इसके पहले भी साल भर में फोरलेन पर तीन से चार इसी तरह के हादसे हुए। ताजा मामले में भी बाघ के घायल होने की वजह रोड एक्सीडेंट ही मानी जा रही है क्योंकि वह फोरलेन से चंद मीटर दूर मिला है।
डीएफओ बोले, एनएएचआई को विस्तृत रिपोर्ट भेजेंगे
पूर्व के अधिकारियों ने भी इस तरह के मामलों में एनएचएआई को रपट भेजी हैं। नेशनल टाईगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने वन्य प्राणियों के क्षेत्र से निकले सड़क, फोरलेन के लिए कई गाईडलाइंस तय की हैं। जिसके तहत उन्हें अंडर पास, ओवर पास, गति नियंत्रक आदि का प्रावधान करना होगा। ताजा मामले में एनएचएआई को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाएगी। ताकि इस तरह के घटनाओं को रोका जा सके।
– वरुण यादव, डीएफओ (साउथ ), सागर
.….इसलिए बाघ का संरक्षण जरूरी है
संरक्षित वन्य प्राणियों की सूची में बाघ का महत्व सबसे विशिष्ट और सर्वोच्च माना जाता है। भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत बाघ को अनुसूची-I में रखा गया है, जो इसे देश में सबसे उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। बाघ को छत्र प्रजाति यानी एक ‘अम्ब्रेला स्पीशीज’ माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि बाघ को बचाने का मतलब पूरे जंगल और पारिस्थितिकी तंत्र ( को बचाना है।बाघ के संरक्षण के लिए सरकार जब बड़े जंगलों को संरक्षित क्षेत्र घोषित करती है, तो उस जंगल में रहने वाले हज़ारों अन्य जीव-जंतु, पेड़-पौधे और पक्षी अपने आप सुरक्षित हो जाते हैं।बाघ खाद्य श्रृंखला के सबसे शीर्ष पर आता है। यह हिरण, सांभर और जंगली सूअर जैसे शाकाहारी जीवों की आबादी को नियंत्रित रखता है। यदि बाघ न हों, तो शाकाहारी जीवों की संख्या अत्यधिक बढ़ जाएगी, जिससे जंगल की वनस्पतियां समाप्त हो जाएंगी और अंततः पूरा पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा।
सागरवाणी….9425172417

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