डॉ. आंबेडकर अभयारण्य: दुर्लभ सेई और शावकों को पीठ पर लादे दिखी मादा भालू

सागर। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अधिसूचित नए ‘डॉ. भीमराव आंबेडकर अभयारण्य’ (बंडा-शाहगढ़) से वन्यजीव प्रेमियों को उत्साहित करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। वन विभाग के कैमरा ट्रैप में एक दुर्लभ सेई और अपने दो शावकों को पीठ पर लादे घूमती एक मादा भालू की दुर्लभ झलक कैद हुई है। उत्तर वन मंडल के डीएफओ चंद्रशेखर सिंह द्वारा सागरवाणी से साझा इन तस्वीरों में इस नवगठित सेंचुरी की जैविक विविधता बखूबी झलक रही है।
कैमरा ट्रैप में कैद हुए रोमांचक दृश्य
सेंचुरी क्षेत्र में लगाए गए कैमरा ट्रैप में वन्यजीवों की सक्रियता लगातार दर्ज की जा रही है। ताज़ा फुटेज में कांटों से ढका शर्मीला जीव सेई आमतौर पर मानवीय आहट से दूर रहता है, लेकिन विनायका-बरेठी के जंगलों में इसकी मौजूदगी दर्ज हुई है। वहीं एक भारी-भरकम मादा भालू अपने दो बच्चों को पीठ पर बैठाकर जंगल का सफर तय करती नजर आ रही है। जबकि इसी वन मंडल में तेंदुए की भी चहल-पहल है, जहाँ एक वीडियो में तेंदुआ बंदर का शिकार करता दिखाई दे रहा है।
‘सेई’ जिसका शिकार तेंदुए- बाघ भी नहीं कर पाते
सेई एक बड़े आकार का निशाचर शाकाहारी प्राणी है, जिसके शरीर पर नुकीले कांटों का कवच होता है। यह एक अत्यंत शर्मीला प्राणी है। खतरे का आभास होने पर यह अपने कांटों को खड़ा कर लेता है और पीछे की ओर हमला कर शिकारी को घायल कर देता है। कांटों को देखते हुए इस जीव का शिकार तेंदुए और बाघ भी नहीं कर पाते हैं। डॉ. बीआर आंबेडकर सेंच्युरी में सेई का दिखना स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है।
विकास कार्यों के लिए बजट मांगा है
अप्रैल 2025 में अधिसूचित हुई यह सेंचुरी 25,864 हेक्टेयर में फैली है, जिसमें बंडा और शाहगढ़ रेंज के विनायका, बरेठी और बरायठा के जंगल शामिल हैं। डीएफओ सिंह के अनुसार सेंचुरी के लिए बजट की मांग की गई है, जिससे पहुंच मार्ग, जांच चौकियां, वॉच टावर और टिकट घर बनाए जाएंगे। पर्यटकों के लिए दो गेट प्रस्तावित हैं—एक बंडा की ओर से बरेठी में और दूसरा शाहगढ़ की ओर से बरायठा गांव में बनाया जाएगा। सेंचुरी क्षेत्र के भीतर आने वाले इकलौते गांव ‘धवारा’ को भविष्य में विस्थापित करने की योजना है।
बाघों का प्राकृतिक गलियारा
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पन्ना टाइगर रिजर्व से लेकर यूपी के ललितपुर और नौरादेही-रातापानी के बीच बाघों के मूवमेंट के लिए एक ‘नेचुरल कॉरिडोर’ (प्राकृतिक गलियारा) का काम करता है। वन्य प्राणी विशेषज्ञ एवं पारिस्थिति तंत्र के जानकारों के अनुसार की सक्रियता से यह क्षेत्र भविष्य में ईको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र बन सकता है।
08/05/2026…..9425172417



