मालथौन के जैनियों की नजर में रानू सिंघई एक कब्जेबाज- धोखेबाज !
जिसने दयोदय गौशाला जैसे पवित्र सेवा कार्य को भी नहीं बख्शा।

सागरवाणी की ग्राउंड रिपोर्ट……
सागर। मालथौन के जिस रानू सिंघई ने खुद को पीड़ित बताकर सहानुभूति बटोरने का सियासी स्वांग रचा था, उसकी असलियत अब समाज और कानून के बीच बेनकाब हो चुकी है। धर्म की ओट में अवैध उगाही और कब्जे के इस खेल का पर्दाफाश करते हुए यहां की जैन समाज ने साफ कर दिया है कि रानू का समाज या धार्मिक मूल्यों से कोई वास्ता नहीं है, बल्कि वह एक पेशेवर कब्जेबाज है जिसने दयोदय गौशाला जैसे पवित्र सेवा कार्य को भी नहीं बख्शा। यह बात मालथौन के ब्रह्मचारी योगेश भैया और समाज के वरिष्ठों ने सागरवाणी से चर्चा में कही। समाज के लोगों ने आरोप लगाए कि रानू ने गौशाला की जमीन पर कब्जा करवाने के लिए न केवल आदिवासियों को उकसाया, बल्कि इस सेवा प्रकल्प को सुचारू रखने के बदले 15 लाख रुपये की अवैध चौथ मांगी।
आगे समाज के युवाओं और प्रबुद्धजनों ने दो टूक शब्दों में कहा कि पूर्व मंत्री और स्थानीय विधायक भूपेंद्र सिंह पर लगाए गए प्रताड़ना के आरोप पूरी तरह फर्जी और राजनीतिक रंजिश से प्रेरित हैं। हकीकत यह है कि मालथौन का समूचा समाज अपने विधायक भूपेंद्र सिंह की कार्यप्रणाली से न केवल संतुष्ट है, बल्कि उन्हें अपना सबसे प्रिय और भरोसेमंद नेता मानता है।उनका कहना है कि आज मालथौन में जो तहसील कार्यालय, भव्य पार्क, सिविल न्यायालय और चमचमाती सड़कें दिख रही हैं, वे विधायक जी की ही देन हैं। इससे पहले जैन समाज के व्यापारियों और आम नागरिकों ने एक स्वर में कहा कि पहले यहां गुंडागर्दी और नशेड़ियों का बोलबाला था, लेकिन विधायक जी की इच्छाशक्ति के कारण आज हम रात 10 बजे तक बिना किसी डर के व्यापार कर सकते हैं और सुरक्षित महसूस करते हैं।
चर्चा में यह बात भी सामने आई कि रानू ने खुद एडव्होकेट सुबोध जैन के मकान में 20 साल किराएदार रहकर उस पर कब्जा करने की कोशिश की थी और 7 साल तक किराया डकारने के बाद कानूनी डंडे के डर से मकान खाली किया था। इधर रानू की जालसाजी का सबसे गलीज चेहरा चुरारी गांव के दो गरीब अजा वर्ग के भाइयों, मोहन और रतन के साथ हुई धोखाधड़ी में सामने आता है। चुरारी डेम में अपनी दो एकड़ जमीन गंवाने के बाद इन मजदूर भाइयों को जो मुआवजा मिला था, उस पर रानू की गिद्ध दृष्टि पहले ही जम गई थी। रानू ने इन अनपढ़ भाइयों को अपने परिवार में शादी का वास्ता देकर और आदिवासियों की विवादित जमीन बेचने का झांसा देकर उनके बैंक खाते से ढाई लाख रुपये निकलवा लिए। जब पीड़ित भाइयों को पता चला कि जिस जमीन का सौदा किया जा रहा है वह आदिवासियों की नोटिफाइड जमीन है और उसकी रजिस्ट्री नहीं हो सकती, तब पैसे वापस मांगने पर रानू ने उन्हें अपनी रसूखदारी की धौंस दिखाई। रानू ने जो चेक इन भाइयों को थमाए, वे बैंक में बाउंस हो गए। अब पिछले चार-पांच साल से ये गरीब मजदूर भाई अपनी ही गाढ़ी कमाई वापस पाने के लिए कोर्ट की पेशियां भुगत रहे हैं। मालथौन के अलग- अलग लोगों का कहना है कि पीड़ित मोहन और उसके भाई का दर्द रानू के उस असली चेहरे को उजागर करता है जो गरीबों को डराता है, उन्हें गाली-गलौज कर भगा देता है और कोर्ट-कचहरी में सड़ा देने की धमकी देता है। हालांकि यहां का हर वर्ग अब एकजुट होकर रानू सिंघई के इस ‘कब्जा और ब्लैकमेलिंग’ मॉडल के खिलाफ खड़ा है। जिससे चिढ़ कर रानू अब विधायक भूपेंद्र सिंह की छवि धूमिल करने की घटिया हरकत कर रहा है। मालथौन के जैन समाज के लोग रानू के बारे में क्या कुछ बोले जानने के लिए ये कुछ वीडियो भी देखें……।
23/04/2026……9425172417



