जमीन के ख़ुदाओं की हुंकार के बीच कैसे बजेगा ‘जन विश्वास’ का ढोल, प्रमोशन की मांग लेकर हड़ताल पर बैठे पटवारी
बोले, भृत्य प्रमोशन का पात्र, हम लोग 37 साल से बिना प्रमोशन घिस रहे
सागर। राज्य सरकार 7 अगस्त से बड़े तामझाम के साथ “जन विश्वास अभियान 2026” की शुरुआत करने जा रही है। दावे संवाद, समाधान और सुशासन के हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सुशासन की मुख्य धुरी कहे जाने वाले पटवारी ही पुरानी कलेक्टोरेट परिसर में तंबू गाड़कर अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर बैठ गए हैं। शासन की उपेक्षापूर्ण और विसंगतिपूर्ण नीतियों के खिलाफ ताल ठोक रहे पटवारियों के मैदान से गायब होते ही सरकार के इस ‘जन विश्वास’ अभियान की हवा निकलती नजर आ रही है।
भृत्य को प्रमोशन, पर 36-37 साल सेवा देने वाले पटवारी उपेक्षित!
मध्य प्रदेश शासन की प्रशासनिक नीतियों और पदोन्नति व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए मप्र पटवारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार की नीतियां इतनी हास्यास्पद हैं कि भृत्य (चपरासी) को तो प्रमोशन का पात्र मान लिया जाता है, लेकिन 36-37 सालों से निष्ठापूर्वक सेवा दे रहे पटवारियों को उसी पद पर सुखाया जा रहा है।दर्जनों पटवारी अपनी पूरी नौकरी एक ही पद पर काट कर बिना किसी पदोन्नति के रिटायरमेंट की कगार पर पहुंच चुके हैं।
20 साल से नहीं हुई परीक्षा, कैडर रिव्यू से भी परहेज
नियमानुसार पटवारी से राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति के दो रास्ते हैं— सेवा अवधि या विभागीय परीक्षा। लेकिन शासन की अनदेखी का आलम यह है कि पिछले दो दशक से विभाग ने पदोन्नति परीक्षा का आयोजन ही नहीं किया। पटवारियों की मांग है कि उन्हें कम से कम कैडर रिव्यू का लाभ दिया जाए, ताकि वरिष्ठता के अनुसार उन्हें समयमान वेतनमान, भत्ते और पेंशन का हक मिल सके।
5-सूत्रीय मांगों को लेकरअनिश्चितकालीन मोर्चा
पटवारी संघ द्वारा सागर कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में अपनी 5 मुख्य मांगों को रेखांकित किया गया है। जिसमें कैडर रिव्यू लागू करना तथा पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान की विसंगतियों को दूर करना। नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा का तत्काल आयोजन।जज प्रोटेक्शन एक्ट के दायरे में पटवारियों को शामिल करना। वित्तीय लंबित भुगतान (जैसे स्वामित्व योजना, कृषि संगणना आदि के बकाया राशि) का तुरंत भुगतान। म.प्र. पटवारी संघ भोपाल के पदाधिकारियों के नियम विरुद्ध हुए स्थानांतरण निरस्त करना आदि शामिल हैं। बता दें कि सागर जिले के कुल 711 पटवारियों में से लगभग 650 पटवारी हड़ताल में शामिल हैं। शेष चिकित्सा एवं तकनीकी कारणों से ड्यूटी से बाहर हैं।
व्हाट्सएप ग्रुप्स से लेफ्ट, पोर्टल्स से लॉग-आउट, राजस्व तंत्र ठप
आक्रोशित पटवारियों ने खुद को प्रशासनिक कामकाज से पूरी तरह विलग कर लिया है। अधिकारियों द्वारा बनाए गए आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स को छोड़ दिया गया है तथा ‘सारा एप’ और ‘वेब जीआईएस’ पोर्टल से लॉग-आउट कर दिया गया है। इसके चलते नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और फौती जैसे अति-आवश्यक राजस्व कार्य ठप पड़ गए हैं। इधर जिले में अवर्षा के हालात के बीच गिरदावरी (फसल सर्वे) प्रभावित हो रही है। समय पर डेटा न मिलने से किसानों को फसल नुकसान के मुआवजे और उपज खरीदी में भारी दिक्कतें आएंगी। स्कूल-कॉलेजों में एडमिशन का दौर जारी है, लेकिन पटवारियों के कार्य बहिष्कार के कारण आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों का सत्यापन पूरी तरह रुक गया है।
ये प्रमुख पदाधिकारी व सदस्य रहे मौजूद
धरना स्थल पर प्रमुख रूप से राजभान घोषी (जिला अध्यक्ष), मोहन लाल खरे (उप-प्रांताध्यक्ष), संजय जैन (प्रांतीय प्रवक्ता), मनेश दुबे (तहसील अध्यक्ष सागर), शरद गोस्वामी, यशवंत सोनी, शैलेन्द्र सिंह, अखिलेश जैन, प्रेमचंद जैन, अरुण जैन (संभागीय अध्यक्ष), नरेश चौरसिया, रीतेश यादव, दीपक सेन, वंदना पटेल, स्वतंत्र चौबे, आशुतोष बड़ोन्या आदि।
सागरवाणी..9425172417….05/08/2026



