चर्चित

पुलिस बैंड भर्ती विवाद: अभ्यर्थी ने पूछा इंटरव्यू लेने वाले अफसर कितना जानते हैं संगीत

भर्ती पर हाईकोर्ट ने लगाया स्टे, अभ्यर्थी ने पीएचक्यू में आरटीआई दाखिल कर पैनल की संगीत विशेषज्ञता पर उठाए सवाल

सागर। मध्य प्रदेश पुलिस आरक्षक (बैंड) भर्ती 2026 में चयन समिति की तकनीकी अनभिज्ञता और मनमानी का एक मामला सामने आया है। भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर आयोजित वादन कौशल परीक्षा (स्किल टेस्ट) के दौरान अधिकारियों द्वारा बिना ट्यूनिंग के जबरन बैगपाइपर बजवाने से आहत सागर निवासी पीड़ित अभ्यर्थी दिलीप बंसल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अभ्यर्थी की याचिका पर जबलपुर हाईकोर्ट की मुख्य पीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मामले में नियमों के उल्लंघन और रिश्वत के स्टिंग ऑपरेशन के विवादों के बीच इंदौर खंडपीठ पहले ही इस भर्ती के अंतिम परिणाम पर अंतरिम रोक (स्टे) लगा चुकी है।

इसके साथ ही, प्रभावित अभ्यर्थी ने पुलिस मुख्यालय में एक आरटीआई भी दाखिल की है, जिसमें उन्होंने परफॉर्मेंस इंटरव्यू लेने वाले चयन समिति के सदस्यों की संगीत विशेषज्ञता संबंधी विस्तृत जानकारी मांगी है। अभ्यर्थी दिलीप का कहना है कि जिन लोगों को बैगपाइपर ट्यून करने जैसा संगीत का बेसिक नियम तक नहीं पता हो, वे इस विशेष और संवेदनशील साज की धुन को कैसे समझ और सही ढंग से परख सकते हैं? भोपाल में परीक्षा स्थल पर मौजूद अधिकारियों ने दिलीप को उनका बैगपाइपर ट्यून करने के लिए पर्याप्त समय भी नहीं दिया था। जब दिलीप ने बिना ट्यूनिंग सुर न निकलने की असमर्थता जताई, तो अधिकारियों ने उन पर दबाव बनाते हुए बिना ट्यूनिंग के ही ‘राष्ट्रगान’, ‘जनरल सैल्यूट’ और एक अन्य धुन बजवाई। अभ्यर्थी ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद तीनों धुनें बजाकर दिखाईं, लेकिन सुरों में तकनीकी कमी का बहाना बनाकर चयन समिति ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि संगीत विशेषज्ञों की एक निष्पक्ष कमेटी गठित कर उनका वादन टेस्ट दोबारा कराया जाए। दिलीप का कहना है कि बैगपाइपर एक अत्यंत संवेदनशील वाद्य यंत्र है, जिसे बजाने से ठीक पहले मौसम और हवा के दबाव के अनुसार ट्यून करना संगीत का सबसे बुनियादी नियम होता है। बता दें कि यह साज मूलतः स्कॉटलैंड आर्मी से एडाप्ट किया गया है, जो प्राचीन समय में युद्ध के मैदान में सैनिकों में जोश जगाने के लिए बजाया जाता था। भारतीय फिल्मों में भले ही इसकी मधुरता को उभार कर कुछ मशहूर गीत जैसे कि फिल्म संगम का प्रसिद्ध गाना “मेरे मन की गंगा, तेरे मन की जमना…” तैयार किए गए हैं, जबकि इसका असल स्वर थोड़ा सा कर्कश होता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसमें तीन ड्रोन और एक बेस ड्रोन रॉड होती है, जिसके चलते वादन के समय इसमें से एक साथ तीन अलग-अलग आवाजें निकलती हैं जो धुन को साधने में समस्या पैदा करती हैं। भारत में इस विशेष वाद्य यंत्र को बजाने वाले सबसे अधिक साजिंदे राजस्थान और पंजाब राज्यों में पाए जाते हैं। इसके बाद कुछ हिंदी भाषी राज्यों में भी इसकी थोड़ी संख्या है, जबकि दक्षिण भारत में इस साज का चलन लगभग न के बराबर है।

12/09/2026

 

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!