नगर निगम: अब प्राइवेट फर्म संभालेगी प्रॉपर्टी, जल, कचरा और सीवर टैक्स की वसूली
'इंटीग्रेटेड डिजिटल बिलिंग सिस्टम' लागू होगा

सागर। खस्ताहाल आर्थिक स्थिति से उबरने और राजस्व वसूली को पारदर्शी व दुरुस्त बनाने के लिए सागर नगर निगम एक बड़ा , प्रयोग करने जा रहा है। अब शहरवासियों को संपत्ति, जल, कचरा और सीवर टैक्स के भुगतान के लिए नगर निगम के बार- बार चक्कर नहीं काटना होंगे। इन चारों करों को मिलाकर एक ‘इंटीग्रेटेड डिजिटल बिलिंग सिस्टम’ लागू किया जा रहा है, जिसकी कमान एक प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर फर्म के हाथों में होगी। महापौर परिषद से हरी झंडी मिलने के बाद नगर निगम ने टेंडर प्रक्रिया की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
क्यों पड़ी नए सिस्टम की जरूरत
नगर निगम के अनुसार, वर्तमान में एक ही मकान या व्यावसायिक प्रतिष्ठान को चार अलग-अलग बिल थमाए जाते हैं, जो न तो व्यावहारिक है और न ही पारदर्शी। कई नागरिक टैक्स जमा करना चाहते हैं, लेकिन कतारों और अव्यवस्था को देखकर बिना भुगतान किए लौट जाते हैं। नियमित बिल न मिलने से बकाया राशि बढ़ती जाती है, जिससे उपभोक्ता एकमुश्त भुगतान करने में आनाकानी करते हैं। इधर निगम को बिजली बिल, स्ट्रीट लाइट, ईंधन और कर्मचारियों के वेतन मद में हर महीने 7 करोड़ रुपये से अधिक की आवश्यकता होती है। शासन से मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति सीधे बिजली कंपनी के खाते में चले जाने से निगम गंभीर वित्तीय संकट झेल रहा है।
ऐसे काम करेगा नया इंटीग्रेटेड सिस्टम
उपभोक्ता को चारों सेवाओं का एक ही बिल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा। बिल में प्रत्येक सेवा (जल, सीवर, कचरा, प्रॉपर्टी) का विवरण अलग-अलग दर्ज होगा। उपभोक्ता चाहें तो हर महीने चारों बिल एक साथ चुकाएं या अपनी सुविधानुसार किसी चुनिंदा सेवा का 3 से 6 महीने या सालाना भुगतान करें।प्रत्येक संपत्ति की यूनिक ID के आधार पर एक QR कोड जनरेट किया जाएगा, जिसे घर या दुकान के बाहर नंबर प्लेट के रूप में लगाया जाएगा। इस कोड को स्कैन करते ही उपभोक्ता अपने पिछले और वर्तमान भुगतान का पूरा ब्योरा देख सकेंगे।
POS मशीन से मौके पर ही जमा होगा टैक्स
प्राइवेट फर्म के कर्मचारी घर-घर और प्रतिष्ठानों पर जाकर न केवल ऑफलाइन बिल देंगे, बल्कि पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीन के जरिए मौके पर ही डिजिटल भुगतान भी स्वीकार करेंगे। किसी भी तकनीकी या व्यावहारिक समस्या के समाधान के लिए ठेकेदार कंपनी को सभी जोन स्तर पर अपने कार्यालय खोलने होंगे।
हर महीने 3 से 4 करोड़ राजस्व का लक्ष्य
नगर निगम महापौर संगीता सुशील तिवारी ने बताया कि इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य शत-प्रतिशत उपभोक्ताओं को पारदर्शी व्यवस्था से जोड़ना है। नए सिस्टम के लागू होने से निगम को हर महीने औसतन 3 से 4 करोड़ रुपये के नियमित टैक्स कलेक्शन की उम्मीद है। यह नई इंटीग्रेटेड बिलिंग व्यवस्था अगले 1 से 2 महीने के भीतर शहर में पूरी तरह लागू कर दी जाएगी।
सागरवाणी…9425172417…. 08/06/2026



