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प्रसार भारती का बड़ा फैसला, सागर एफएम अब तैयार नहीं करेगा ‘किसानवाणी’

भोपाल से तैयार कार्यक्रम को किया जाएगा रिले

सागर। प्रसार भारती ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रायोजित लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘किसानवाणी’ के स्थानीय निर्माण (रिकॉर्डिंग) को 1 अगस्त से देश के कई चुनिंदा रेडियो स्टेशनों पर बंद करने का निर्णय लिया है। इस सूची में आकाशवाणी सागर भी शामिल है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सागर केंद्र पर अब तक प्रत्येक मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को सायंकाल प्रसारित होने वाला यह 40 मिनट का कार्यक्रम यहां रिकॉर्ड न होकर अब भोपाल केंद्र से रिले किया जाएगा। इस फैसले से स्थानीय किसानों और नियमित श्रोताओं में निराशा देखी जा रही है। श्रोताओं और कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि बुंदेलखंड सागर संभाग और मध्य भारत यानी भोपाल की भौगोलिक स्थिति, मौसम, मिट्टी तथा कृषक परिस्थितियों में बड़ा अंतर है। दोनों क्षेत्रों की प्रमुख फसलों और कीट-प्रकोप की समस्याएं भी भिन्न हैं। ऐसे में भोपाल से प्रसारित होने वाले सामान्यीकृत कृषि सुझाव, मौसम चेतावनियां और तकनीकी जानकारियां सागर संभाग के स्थानीय किसानों के लिए कितनी सटीक और उपयोगी साबित होंगी, इस पर बड़ा सवालिया निशान लगा रहेगा। अब तक सागर केंद्र से इस कार्यक्रम के तहत स्थानीय कृषि वैज्ञानिकों से सीधी बातचीत, ‘ऑन-कॉल’ समस्याओं का त्वरित समाधान और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान—जैसे बुंदेली लोकगीत व पारंपरिक वाद्य यंत्रों का आनंद श्रोताओं को मिलता रहा है, जो अब प्रभावित हो सकता है। इस गंभीर मसले पर जब ‘सागरवाणी’ ने आकाशवाणी सागर के कार्यक्रम अधिकारी दीपक निषाद से चर्चा की, तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि 1 अगस्त से सागर में किसानवाणी की रिकॉर्डिंग बंद होने की बात सही है और फिलहाल इसका प्रसारण भोपाल से ही रिले होगा। हालांकि, उन्होंने किसानों के लिए राहत भरी उम्मीद भी जगाई। उन्होंने बताया कि सागर संभाग की विशिष्ट क्षेत्रीय कृषि, मौसम, भौगोलिक और सांस्कृतिक जरूरतों की महत्ता को समझते हुए सागर केंद्र की ओर से प्रसार भारती के ‘जबलपुर क्लस्टर’ को एक विशेष मांग पत्र भेजा गया है। इस प्रस्ताव में यह बात रखी गई है कि सागर केंद्र में भोपाल से सप्ताह के तीन दिन रिले व्यवस्था तो बरकरार रखी जाए, लेकिन बाकी बचे चार दिनों के कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग व निर्माण प्रसार भारती अपने स्तर पर स्वयं सागर केंद्र में ही कराए। राहत की बात यह है कि जबलपुर क्लस्टर ने इस प्रस्ताव पर अपनी औपचारिक सहमति दे दी है। जैसे ही मुख्यालय से इसकी लिखित मंजूरी मिल जाएगी, पूर्व की भांति सागर स्टेशन पर ‘किसानवाणी’ का निर्माण पुनः शुरू कर दिया जाएगा। 

प्रसार भारती का नया मीडिया प्लान और पुनर्गठन नीति

उल्लेखनीय है कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा अनुमोदित 1 अगस्त 2026 से लागू हो रहे नए मीडिया प्लान के तहत प्रसार भारती पूरे देश में एक नया ढांचा लागू कर रहा है। इस नई नीति के तहत देश भर में केवल 60 चुनिंदा केंद्रों जैसे मध्य प्रदेश में भोपाल, रायपुर, आदि को ही ‘किसानवाणी’ कार्यक्रम के प्रोडक्शन का अधिकार दिया गया है। यह कार्यक्रम इन 60 केंद्रों द्वारा सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, गुरुवार और शनिवार तैयार किया जाएगा और देश भर के 203 प्रसारण केंद्रों पर प्रसारित किया जाएगा। सागर सहित जिन केंद्रों पर कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग को बंद किया जा रहा है, वे अब अपने-अपने राज्यों के मुख्य राजधानी केंद्रों से प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों का ही प्रसारण करेंगे। नए निर्देशों के अनुसार, प्रसारित होने वाले किसानवाणी कार्यक्रमों में दैनिक कृषि बुलेटिन, लाइव फोन-इन, मौसम व एग्रो-मैट सलाह, जीएपी, आईपीएम और आईएनएम पर व्यावहारिक मार्गदर्शन, नकली बीज/उर्वरक/कीटनाशकों के प्रति जागरूकता, मंडी भाव, केवीके व आईसीएआर के विशेषज्ञों की भागीदारी और महिला किसानों व स्वयं सहायता समूहों का समावेश अनिवार्य किया गया है। 

 नए कार्यक्रमों और डिजिटल मीडिया पर जोर

31 जुलाई 2026 के बाद पुराने ‘किसान की बात’ कार्यक्रम को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके स्थान पर शहरी श्रोताओं और युवाओं को कृषि व प्रकृति से जोड़ने के लिए दो नए विशेष कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं।  

Farm2City: पूरे देश के 25 एफएम रेनबो और 29 विविध भारती चैनलों पर प्रत्येक रविवार को 30 मिनट का एक संगीतमय साप्ताहिक कार्यक्रम ‘Farm2City’ प्रसारित होगा। यह कार्यक्रम युवाओं को जैविक खेती, टेरेस गार्डनिंग, एग्री-स्टार्टअप और आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का काम करेगा, जिसमें हर डेढ़ मिनट पर मनमोहक संगीत पिरोया जाएगा। 

हेलो फार्मर्स : दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता के चारों एफएम गोल्ड स्टेशनों से प्रत्येक सोमवार को ‘हेलो फार्मर्स’ नाम से एक लाइव फोन-इन कार्यक्रम प्रसारित किया जाएगा, जो शहरी उपभोक्ताओं और प्रगतिशील किसानों के बीच एक सेतु का काम करेगा। इसके अलावा, आकाशवाणी के सभी प्रायोजित कार्यक्रमों को अब यूट्यूब, रील्स और शॉर्ट्स के माध्यम से सोशल मीडिया (X, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी व्यापक रूप से प्रचारित किया जाएगा। इधर स्थानीय किसानों की निगाहें अब जबलपुर क्लस्टर से मिलने वाली अंतिम लिखित मंजूरी पर टिकी हैं, ताकि बुंदेलखंड की अपनी आवाज ‘किसानवाणी’ के रूप में सागर केंद्र से गूंजती रहे।  

सागरवाणी…9425172417

31/07/2026

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