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सागर कलेक्टोरेट में पदोन्नति पर ‘तुगलकी’ फरमान ! 18 दिन में 33 भृत्य का प्रमोशन निरस्त

भृत्यों ने खोला मोर्चा; बोले 7 दिन में आदेश रद्द नहीं किया तो कोर्ट जाएंगे

सागर। सागर कलेक्टोरेट में भृत्यों की पदोन्नति को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। कलेक्टोरेट प्रशासन द्वारा महज 18 दिनों के भीतर 35 में से 33 भृत्यों के सहायक ग्रेड-3 पद पर हुए पदोन्नति आदेश को अचानक निरस्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई से आक्रोशित पदोन्नति से वंचित कर्मचारियों ने कलेक्टोरेट के ही कतिपय लिपिकों और उच्च अफसरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर इस त्रुटिपूर्ण आदेश में सुधार नहीं किया गया, तो वे माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) की शरण लेंगे।

यह है प्रमोशन से रद्द होने तक का घटनाक्रम

कार्यालय कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, सागर द्वारा आदेश दिनांक 16/07/2026 के माध्यम से विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा पर 35 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नत किया गया था।आदेश की शर्त क्रमांक 2 (ख) में स्पष्ट उल्लेख था कि पदोन्नत कर्मचारियों को 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि के दौरान शासन द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था से 1 वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा तथा CPCT (कंप्यूटर टाइपिंग दक्षता प्रमाण पत्र) स्कोर कार्ड उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। यदि वे 2 वर्ष में इसे प्राप्त नहीं करते, तो उन्हें मूल पद पर वापस भेज दिया जाएगा। लेकिन मात्र 18 दिन बाद, कलेक्टर कार्यालय द्वारा नया आदेश 03/08/2026 को जारी कर दिया गया। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र का हवाला देते हुए कहा गया कि CPCT परीक्षा से छूट का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए CPCT प्रमाण पत्र के अभाव में पूर्व जारी पदोन्नति आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। इस आदेश में केवल गणेश ठाकुर एवं शिव कुमार वर्मा के पास पूर्व से CPCT प्रमाण पत्र उपलब्ध होने के कारण उनकी पदोन्नति बरकरार रखी गई, जबकि शेष 33 कर्मचारियों का प्रमोशन रद्द कर दिया गया।

इन 35 भृत्यों को मिला था प्रमोशन

भारतसिंह पटेलिया,ज्ञानवती गौड़,मानसिंह गौड़,भागीरथ गौड़, घनश्याम दास कोरी,बारेलाल अहिरवार,ताराचंद अहिरवार,मुन्नालाल कोरी, स्नेहलता कोरी,बालकिशन अहिरवार,इमरत लाल सोनी, ईश्वरदत्त तिवारी,आलोक प्यासी,रत्नेश कटारे,काशीराम प्रजापति,संतोष चौबे,आरिक जॉन थॉमस,विनोद कुमार रजक,प्रमोद सेन, राजकुमार श्रीवास्तव,संतोष कुमार तिवारी,मिथिलेश शर्मा,गिरीश पटेल, मनोज जैन, पवन यादव, गणेश ठाकुर (पदोन्नति यथावत),भास्कर रावत, पवन पाण्डेय (मूकबधिर), रत्नेश राव (दृष्टिबाधित),राजेन्द्र साहू (दृष्टिबाधित),कु० श्वेता गोस्वामी (विकलांग),त्रिभुवन विश्वकर्मा (विकलांग),अनिल गुप्ता,ब्रजेश रिछारिया, शिव कुमार वर्मा (पदोन्नति यथावत)

कर्मचारियों के तर्क, “अधिकारियों को गुमराह कर निरस्त कराया प्रमोशन”

पदोन्नति से वंचित किए गए भृत्यों का आरोप है कि कलेक्टोरेट में पदस्थ कतिपय लिपिकों ने उच्च अधिकारियों को गलत जानकारी देकर और गुमराह करके यह निरस्तीकरण का आदेश जारी करवाया है। क्योंकि जीएडी के जिस आदेश का हवाला देकर कार्रवाई की गई है, वह राज्य के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा उज्जैन स्थित राजकीय दर्जा प्राप्त विक्रम विश्वविद्यालय के लिए जारी किया गया था। राजस्व विभाग के अधीन कार्यरत कर्मचारियों पर इसे लागू करना पूरी तरह अनुचित है।मूल प्रमोशन आदेश (16 जुलाई) में साफ लिखा गया था कि “उच्च पद पर कार्यभार ग्रहण करने के 2 वर्ष के भीतर CPCT उत्तीर्ण करना होगा”, जबकि निरस्तीकरण आदेश (3 अगस्त) में तर्क दिया गया कि “पूर्व में CPCT न होने के कारण आप पात्र नहीं हैं”। एक ही प्रशासन के दो अलग-अलग आदेशों में यह विरोधाभास समझ से परे है। राजस्व विभाग के ही अधीन आने वाले संभागायुक्त (कमिश्नर) कार्यालय, सागर में भी हाल ही में भृत्य का प्रमोशन सहायक ग्रेड-3 पर किया गया, लेकिन वहां पदोन्नति से पूर्व CPCT की शर्त नहीं थोपी गई। फिर कलेक्टोरेट कर्मचारियों के साथ यह दोहरा मापदंड क्यों ?

7 दिन की मोहलत, वरना हाईकोर्ट में देंगे चुनौती

पदोन्नति से वंचित भृत्यों ने अपनी नई पदस्थापना पर कार्य जारी रखते हुए कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के नाम अपर कलेक्टर कार्यालय एवं संभागायुक्त कार्यालय में विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत किया है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने जिला प्रशासन को इस प्रशासनिक चूक व त्रुटि को सुधारने के लिए 7 दिनों का समय दिया है। यदि 7 दिनों के भीतर पदोन्नति निरस्तीकरण का आदेश वापस नहीं लिया जाता है, तो वे संयुक्त रूप से माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और इस अन्यायपूर्ण आदेश को चुनौती देंगे। इस मामले में कलेक्टर श्रीमती पाल का पक्ष जानना चाहा लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ।

06/08/2026…सागरवाणी…9425172417

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