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बाघ की मौत: टाईगर रिजर्व के डीएफओ सिंह लापरवाह कर्मचारियों को बचा रहे हैं!

बाघ की मौत पर पीसीसीएफ सख्त, डिप्टी डायरेक्टर सिंह को थमाया दोबारा नोटिस

सागर। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर मप्र में एक बाघ की मौत के मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख विजय कुमार नामदेव अम्बाडे ने कड़ा रुख अपनाते हुए डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह को दोबारा नोटिस जारी किया है। वे बाघ की मौत को लेकर डिप्टी डायरेक्टर सिंह द्वारा दी गई दलीलों से संतुष्ट नहीं है।26 फरवरी 2026 को जारी इस नोटिस में पीसीसीएफ अम्बाडे ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि स्थानीय अमले द्वारा घोर लापरवाही को छिपाने का प्रयास किया गया है। बाघ की लोकेशन 13 फरवरी 2026 से एक ही स्थान पर मिल रही थी, फिर भी मॉनिटरिंग टीम उसे देखने नहीं गई। 48 घंटे बाद जब टीम मौके पर पहुँची, तब तक बाघ की मौत हो चुकी थी। ​रिपोर्ट के अनुसार, बाघों के संघर्ष की गूंज 1-2 किलोमीटर तक सुनाई देती है, जिसे स्थानीय कर्मचारियों ने अनसुना कर दिया।

मौत के 48 घंटे बाद लिया था  संज्ञान

​करीब 15 दिन पहले कान्हा टाइगर रिजर्व से नौरदेही (अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व) लाए गए एक सैटेलाइट कॉलर वाले बाघ की आपसी संघर्ष में मृत्यु हो गई थी। नियमतः रेडियो कॉलर वाले बाघों की 24 घंटे मॉनिटरिंग अनिवार्य है लेकिन, इस मामले में गंभीर लापरवाही सामने आई जब बाघ की मौत की खबर मिलने में 48 घंटे से अधिक का समय लग गया। 

लापरवाही टाईगर के पुर्नवास के लिए घातक

​आरटीआई एक्टिविस्ट और वन्यजीव विशेषज्ञ अजय दुबे ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि “लाखों की लागत वाले सैटेलाइट रेडियो कॉलर और विशेष मॉनिटरिंग टीमों के बावजूद बाघ का दो दिनों तक मृत पड़ा रहना अक्षम्य है”। दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपने अधीनस्थों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जो टाइगर रिलोकेशन प्रोजेक्ट के लिए घातक है।

डिप्टी डायरेक्टर के जवाब पर असंतोष

​इससे पहले 23 फरवरी को डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को पीसीसीएफ ने गैर-समाधानकारक माना है। नए नोटिस में उन पर अधीनस्थ कर्मचारियों की लापरवाही पर पर्दा डालने का सीधा आरोप लगाया गया है और तत्काल प्रभावी कार्रवाई कर सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां बता दें कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की गाइडलाइन के अनुसार कॉलर पहने बाघ की सतत निगरानी की जाए। उसके कॉलर को भी इस तरह से प्रोग्राम्ड किया गया है कि अगर उसके शरीर में 4-6 घंटे से अधिक समय तक कोई हरकत नहीं दिखे तो तत्काल उसकी खोजबीन करना चाहिए। लेकिन इस बाघ के मामले में 48 घंटे तक बाघ की लोकेशन एक ही स्थान पर बनी रही। उसके बावजूद मॉनीटरिंग के लिए जबावदेह अमले ने कोई एक्शन तक नहीं लिया। 

9425172417

28/02/2026

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