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शाहपुर के दोहरे हत्याकांड में शासन के 5 करोड़ रु. उलझे

सागर। शाहपुर में बीते दिनों हुए दोहरे हत्याकांड और शराब दुकान में हुई आगजनी की घटना का सीधा असर अब मध्य प्रदेश शासन की राजस्व वसूली पर पड़ता दिख रहा है। इस घटनाक्रम के चलते सरकार के करीब 5 करोड़ रुपये दांव पर लग गए हैं। दरअसल, मार्च में शाहपुर की यह शराब दुकान 5 करोड़ रुपये से अधिक की सालाना लाइसेंस फीस पर नीलाम हुई थी। इस दुकान का ठेका छोटू उर्फ हर्ष लोधी ने लिया था, जो वर्तमान में दो युवकों की हत्या के संगीन आरोप में फरार है। ​विभागीय नियमों के मुताबिक, ठेकेदार को 15 मई तक पाक्षिक लाइसेंस फीस (15 दिनों की फीस) के रूप में करीब 22 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा करने थे। आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार, लाइसेंसी ठेकेदार छोटू लोधी के फरार होने के बाद उसके किसी भी घोषित-अघोषित पार्टनर या परिजन ने यह राशि जमा नहीं की है। हालांकि, आबकारी नीति के तहत ठेकेदार को यह फीस चुकाने के लिए 7 दिनों का अतिरिक्त समय (ग्रेस पीरियड) दिया जाता है, लेकिन ठेकेदार के पारिवारिक सूत्रों की मानें तो उसकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे इस बकाया राशि का भुगतान कर पाएं।

पहले नोटिस, फिर होगी दोबारा नीलामी

​इस संकट से निपटने के लिए आबकारी विभाग अब वैधानिक प्रक्रिया अपनाने की तैयारी में है। आबकारी विभाग के जानकारों के मुताबिक, पाक्षिक लाइसेंस फीस जमा न करने की दशा में विभाग सबसे पहले डिफॉल्टर ठेकेदार को दो से तीन नोटिस जारी करेगा। इस नोटिस अवधि के दौरान ठेकेदार पर सरकारी वेयरहाउस से देसी और विदेशी शराब खरीदने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाता है। ​यदि इन नोटिसों के बाद भी ठेकेदार की तरफ से बकाया राशि जमा नहीं की जाती है, तो जिला कलेक्टर की अनुशंसा पर आबकारी कमिश्नर इस शराब दुकान की पुर्न-नीलामी (री-टेंडर) का आदेश जारी करते हैं।

कैसे होगी सरकारी राजस्व की भरपाई?

​पुर्न-नीलामी के दौरान शराब दुकान का आरक्षित मूल्य (रिजर्व प्राइस) निवर्तमान ठेकेदार की बोली में से चुकाई गई लाइसेंस फीस कम करके तय किया जाता है। यदि इस नई नीलामी में आरक्षित मूल्य से कम की बोली आती है, तो शासन को होने वाले नुकसान की भरपाई निवर्तमान ठेकेदार (छोटू लोधी) की बैंक गारंटी को राजसात करके की जाएगी। इसके अलावा, जो पाक्षिक फीस बकाया है, उसकी वसूली के लिए ठेकेदार द्वारा पूर्व में जमा किए गए हस्ताक्षरित ब्लैंक चेकों को बैंक में लगाया जाएगा। यदि ये चेक बाउंस होते हैं, तो ठेकेदार के खिलाफ विधिक और भू-राजस्व अधिनियम के तहत कड़ी वसूली की कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के लिए बता दें कि आबकारी विभाग संबंधित दुकान की लाइसेंस फीस को 24 समान किस्त में वसूल करता है। उपरोक्त मामले में ठेकेदार लोधी ने तीन किस्त जमा कर दी होंगी। यह राशि कम कर पुर्न नीलामी का आरक्षित मूल्य तय किया जाएगा।

आसपास के ठेकेदारों पर टिकी नजरें

​शाहपुर शराब दुकान के भविष्य को लेकर आबकारी विभाग के सूत्रों का कहना है कि वहां जिस तरह का हिंसक घटनाक्रम और तनावपूर्ण माहौल रहा है, उसे देखते हुए नए ठेकेदार इस दुकान को लेने में कतरा सकते हैं। इसके बावजूद, शाहपुर के नजदीकी क्षेत्र परसोरिया शराब दुकान के लाइसेंसी ठेकेदार या फिर जिले के कुछ अन्य बड़े शराब कारोबारी इस पुर्न-नीलामी की प्रक्रिया में अपनी रुचि दिखा सकते हैं और बोली लगा सकते हैं।

क्या था पूरा मामला

​बीते दिनों शाहपुर में अवैध शराब के कारोबार और आपसी वर्चस्व को लेकर शराब दुकान के लाइसेंसी ठेकेदार छोटू लोधी और उसके गुर्गों ने दो युवकों पर लाठियों से जानलेवा हमला कर दिया था। इस बर्बर मारपीट में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दूसरे ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इस दोहरे हत्याकांड से पूरे क्षेत्र में भारी जन-आक्रोश फैल गया था। उग्र हुई स्थानीय जनता और परिजनों ने न केवल सड़क पर चक्काजाम किया था, बल्कि शाहपुर स्थित शराब दुकान को भी आग के हवाले कर दिया था, जिससे दुकान में रखा लाखों का माल जलकर खाक हो गया था।

15/05/2026….9425172417

 

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