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विवि: प्रोफेसर से मारपीट का ज्ञापन, ‘सूटा’ के लिए संजीवनी ! शिक्षकों का कानूनी अल्पज्ञान जाहिर

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में बीते दिनों स्कूल ऑफ लॉ के अधिष्ठाता प्रो. हिमांशु पांडे पर हुए जानलेवा हमले और मारपीट की घटना से आक्रोशित विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर पुलिस प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। गुरुवार को बड़ी संख्या में शिक्षकों ने पुलिस अधीक्षक (SP), आईजी हिमानी खन्ना और कुलपति प्रो. यशवंत सिंह राजपूत को ज्ञापन सौंपकर आरोपी विकास सराफ की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। ज्ञापन देने वालों में प्रो. राजेंद्र यादव, डॉ. संजय शर्मा, डॉ. राकेश सोनी, प्रो. हिमांशु पाण्डेय, डॉ. शशि कुमार सिंह, प्रो. अशोक अहिरवार, प्रो. रत्नेश दास, प्रो. सुशील काशव, प्रो. बी आई गुरु समेत भारी संख्या में प्राध्यापक शामिल रहे।

​’सूटा’ के लिए संजीवनी बना घटनाक्रम !

​विश्वविद्यालय के गलियारों में चर्चा है कि इस दुखद घटना ने नवगठित सागर विवि शिक्षक संघ (SUTA) के लिए ‘संजीवनी’ का काम किया है। दरअसल, सूटा के गठन को लेकर पिछले कुछ समय से शिक्षकों के बीच गुटबाजी और अलग-अलग धड़े नजर आ रहे थे। पुराने और नए शिक्षकों के बीच समन्वय की कमी दिख रही थी, लेकिन प्रो. पांडे पर हुए हमले ने सभी मतभेदों को दरकिनार कर दिया है। ​अब नए और पुराने, दोनों गुटों के शिक्षक सूटा के बैनर तले एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि इसी महीने सूटा के चुनाव होने हैं और फिलहाल सदस्यता अभियान चल रहा है। विवि सूत्रों का कहना है कि इस घटना के बाद उपजे आक्रोश के कारण सूटा की सदस्यता में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे संघ और अधिक मजबूत होकर उभरेगा।

भावनाएं या कानून का अल्पज्ञान ?

​इस पूरे मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि जिस ज्ञापन को लेकर शिक्षक सड़कों पर हैं, उसे लेकर शहर के कानूनविदों के बीच नई बहस छिड़ गई है। मारपीट के शिकार हुए प्रो. हिमांशु पांडे स्वयं लॉ डिपार्टमेंट के हेड और कानून के बड़े विशेषज्ञ हैं। सिविल लाइन पुलिस ने आरोपी विकास सराफ के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज और सरकारी काम में बाधा डालने की धाराओं के तहत मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन शिक्षकों द्वारा की जा रही ‘तत्काल गिरफ्तारी’ की मांग कानूनी कसौटी पर कमजोर दिख रही है। जानकारों का कहना है कि हालिया वर्षों में हुए कानूनी संशोधनों के अनुसार, जिन धाराओं में मामला दर्ज हुआ है, उनमें तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान तब तक नहीं होता जब तक कि आरोपी आदतन अपराधी न हो या साक्ष्यों को प्रभावित करने की प्रबल संभावना न हो। ऐसे में विवि के प्रबुद्ध शिक्षकों द्वारा गिरफ्तारी की जिद को कानूनविद उनके भावनात्मक आक्रोश के साथ कानून के ‘अल्प ज्ञान’ के रूप में भी देख रहे हैं। बता दें कि मारपीट के शिकार प्रो. पांडे विवि के लॉ डिपार्टमेंट के हेड भी हैं।

​क्या है पूरा मामला ?

​घटना 31 दिसंबर 2025 की दोपहर करीब 12 बजे की है। सूचना अधिकारी कार्यालय परिसर में एक अपील प्रकरण की सुनवाई चल रही थी। आरोप है कि इसी दौरान विकास सराफ नामक व्यक्ति ने सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाते हुए प्रो. हिमांशु पांडे के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन पर जानलेवा हमला कर दिया। विश्वविद्यालय समुदाय का कहना है कि यदि एक वरिष्ठ प्रोफेसर और लॉ डीन सुरक्षित नहीं हैं, तो परिसर में शैक्षणिक माहौल कैसे बना रहेगा? वही विकास सराफ का कहना था कि मैं अपनी पुत्री का ट्रांसफर एडमिशन चाहता था। जिसके संबंध में मैंने आरटीआई का आवेदन लगाया था। उसी की अपीलीय सुनवाई के दौरान प्रो. पांडे ने मुझ से बदसलूकी की।

01/01/2026 

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