सागर। गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने जब पद्म पुरस्कारों की घोषणा की, तो सागर की धरती गर्व से भर उठी। पारंपरिक बुंदेली अखाड़ा मार्शल आर्ट संस्कृति को अपने पसीने से सींचने वाले 82 वर्षीय भगवानदास रायकवार को ‘अनसंग हीरो’ श्रेणी में पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उस साधना की जीत है जिसने पिछले 60 वर्षों से लाठी, ढाल, भाला, त्रिशूल और तलवार जैसे प्राचीन शस्त्रों को जीवित रखा है। भारत सरकार ने कुल 131 पद्म पुरस्कार घोषित किए हैं। इनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्मभूषण 131 पद्म श्री शामिल हैं।
जीवन भर दिया हजारों युवाओं को प्रशिक्षण
एक दौर में भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहे पारंपरिक अखाड़े आज विलुप्ति की कगार पर हैं। ऐसे समय में रायकवार ने न केवल श्री छत्रसाल बुंदेलखंड अखाड़े का संचालन किया, बल्कि हजारों युवाओं को प्रशिक्षित कर इस प्राचीन कला को नई पहचान दी। उन्होंने देश भर में 50 से अधिक मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर बुंदेली वीरता का परचम लहराया है। चयनकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि पद्म पुरस्कार रसूख से नहीं, बल्कि जीवन भर की निःस्वार्थ साधना से मिलते हैं।
प्रचार की चकाचौंध और ‘राजकुमारी’ की दौड़-भाग
सूत्रों की मानें तो एक रसूखदार दावेदार ने पुरस्कार पाने की लालसा में अपने आलीशान आवास को बाकायदा एक ‘हाई-टेक वार रूम’ में तब्दील कर दिया था। भोपाल के मंत्रालय से लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक सिफारिशों के घोड़े दौड़ाए गए। इस पूरी कवायद की सूत्रधार वह ‘इम्पोर्टेड राजकुमारी’ थीं, जो एक ओर दिल्ली के सत्ता प्रतिष्ठान में अपनी पैठ का दावा करती हैं, तो दूसरी ओर भगोड़े विजय माल्या जैसे विवादित चेहरों के साथ अपने “सुमधुर” संबंधों की नुमाइश करने से नहीं चूकतीं। विडंबना देखिए कि जो परिवार गाहे-बगाहे वामपंथी विचारधारा का पोषण करने के लिए जाना जाता है, वह ‘पद्म श्री’ जैसे गौरवशाली सम्मान पर छद्म अधिकार जताने की कोशिश कर रहा था। लेकिन चयन समिति ने उनकी इस ‘दौड़-भाग’ और ‘कथित संबंधों’ के गुब्बारे की हवा निकाल दी।
अकादमिक पतन और कांक्रीटीकरण का ‘दावा’
सिफारिशों के इस खेल में शिक्षा जगत की एक तथाकथित ‘बड़ी हस्ती’ भी पीछे नहीं रहीं। सागर में शिक्षा के सर्वोच्च केंद्र की मुखिया होने के नाते उन्होंने अपने पद और प्रभाव का भरपूर दुरुपयोग किया। स्थानीय विधायकों और सांसदों से लेकर दिल्ली के रसूखदारों तक से अनुशंसा पत्र लिखवाने की होड़ मच गई। जिस संस्थान को ‘अकादमिक उन्नयन’ की दरकार थी, वहां केवल ‘कांक्रीटीकरण’ के नाम पर उपलब्धियों के पुल बांधे गए। चयन समिति ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि ईंट-पत्थरों के निर्माण और कागजी अनुशंसाओं से ‘पद्म’ की गरिमा को नहीं खरीदा जा सकता।
आधा दर्जन लोगों ने की थी दावेदारी
सागर से इस बार करीब आधा दर्जन रसूखदार हस्तियों ने पद्म पुरस्कार के लिए आवेदन किया था, लेकिन चयन समिति ने उनके लंबे-चौड़े दावों को दरकिनार कर दिया।
शिक्षा जगत : डॉ. नीलिमा गुप्ता
समाजसेवा: डॉ. मीना पिंपलापुरे
योग विधा: विष्णु आर्य
साहित्य व कला: कवि डॉ. हरगोविंद विश्व, बुंदेली गायक शिवरतन यादव और जयंत विश्वकर्मा आदि।
25/01/2026