इस्तीफा देने वाले आईपीएस अभिषेक इस क्षेत्र में बनाएंगे करियर
2-3 साल से पुलिस सेवा छोड़ने का बना रहे थे मन


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सागर। भारतीय पुलिस सेवा के 2013 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी अभिषेक तिवारी ने अपनी सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया है! वर्तमान में दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर तैनात श्री तिवारी के इस अचानक लिए गए फैसले ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि चर्चाओं में इसे ‘स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति’ कहा जा रहा था, लेकिन तकनीकी रूप से यह वीआरएस नहीं बल्कि ‘इस्तीफा’ है। नियमतः अखिल भारतीय सेवाओं में 20 वर्ष की सेवा पूर्ण करने के बाद ही वीआरएस की पात्रता होती है, जबकि अभिषेक तिवारी की सेवा अवधि अभी 12 वर्ष के आसपास है। आईपीएस अभिषेक वर्ष 2023-24 में सागर एसपी रहे हैं।
इस्तीफे के पीछे का वास्तविक कारण
अभिषेक तिवारी के पद छोड़ने के पीछे किसी तात्कालिक विवाद के बजाय उनके भविष्य के बड़े लक्ष्य और पेशेवर सपने बताए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो उन्होंने यह निर्णय रातों-रात नहीं लिया है, बल्कि वे पिछले 2-3 वर्षों से आईपीएस छोड़ने पर विचार कर रहे थे। जबलपुर के शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्प्यूटर साइंस में बीई और प्रतिष्ठित आईआईएम इंदौर से फाइनेंस में एमबीए की डिग्री रखने वाले अभिषेक तिवारी तकनीकी रूप से बेहद सक्षम अधिकारी माने जाते हैं।विश्वस्त सूत्रों और उनके करीबियों का कहना है कि वे अब साइबर सिक्योरिटी सेक्टर में अपना खुद का स्टार्टअप या कंपनी शुरू करने की योजना बना रहे हैं। सागर में उनकी पदस्थापना के दौरान उनके साथ काम कर चुके राज्य पुलिस सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि मुमकिन है कि श्री तिवारी अपने इस स्टार्टअप या कंपनी की नींव भारत से बाहर किसी अन्य देश में रखें। उनकी तकनीकी पृष्ठभूमि और ‘नेशनल टेक्नोलॉजी रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ‘ जैसी एजेंसी में काम करने का अनुभव उनके इस नए सफर में काफी मददगार साबित हो सकता है।
विवादों और गलतफहमियों पर विराम
अभिषेक तिवारी के करियर को लेकर एक बड़ी गलतफहमी सागर जिले में हुई एक दुखद घटना से जुड़ी रही है। डेढ साल पहले सागर में दीवार गिरने से नौ मासूम बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद उन्हें वहां से हटाए जाने की चर्चाएं उठी थीं। लेकिन वास्तविकता इसके उलट है। सच यह है कि इस दुखद हादसे से काफी समय पहले ही उन्हें दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर जाने की मंजूरी मिल चुकी थी। वे केवल रिलीव होने का इंतजार कर रहे थे और एक्सीडेंट के समय वे विदेश में थे। तभी यह दुर्घटना घट गई, जिसे सार्वजनिक रूप से उनकी रवानगी से जोड़कर ‘हटाया जाना’ प्रचारित कर दिया गया।
शानदार रहा है अब तक का सफर
अभिषेक तिवारी मध्य प्रदेश के बालाघाट और रतलाम जैसे महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी कार्यशैली और अपराध नियंत्रण के लिए उन्हें दो बार ‘प्रेसिडेंट मेडल’ से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार भी कई विशेष अभियानों के लिए उन्हें पुरस्कृत कर चुकी है। 



