उसने दोनों हाथ गंवाने के 6 साल बाद बोर्ड पर लिखा अपना नाम
उम्मीदों को मिले नए ‘हाथ’, सागर में इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ पाकर खिले 102 दिव्यांगों के चेहरे

– स्वास्थ्य विभाग और इनाली फाउंडेशन की अनूठी 
सागर। जिला चिकित्सालय परिसर सागर आज मानवीय संवेदनाओं और नई उम्मीदों का साक्षी बना। स्वास्थ्य विभाग एवं इनाली फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित निःशुल्क कृत्रिम हाथ वितरण शिविर ने दर्जनों परिवारों के जीवन में खुशियों का उजाला भर दिया। कलेक्टर संदीप जी आर के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना था, जो किसी दुर्घटना या जन्मजात विकृति के कारण अपने हाथ खो चुके थे।
जब कृत्रिम हाथों ने थामे कलम और माइक
शिविर में कई ऐसे पल आए जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। एक 10वीं पास युवक, जिसने 6 साल पहले एक हादसे में अपने दोनों हाथ गंवा दिए थे और उसकी पढ़ाई रुक गई थी, उसने इलेक्ट्रॉनिक हाथ लगते ही सबसे पहले व्हाइट बोर्ड पर अपना नाम लिखा। उसकी आंखों में भविष्य के सपने फिर से तैरने लगे और उसने राज्य सरकार का आभार जताया। वहीं, एक अन्य युवक ने इन्हीं कृत्रिम हाथों से आत्मविश्वास के साथ कॉर्डलेस माइक थामकर अपनी भावनाओं को साझा किया। अपनी कमी को छिपाने के लिए हमेशा शॉल या गमछा लपेटने वाले सुरेश ने भावुक होकर कहा, “अब मुझे अपने कटे हाथ छिपाने की जरूरत नहीं, अब मैं शान से फुल बांह की शर्ट पहनकर लोगों से मिल सकूंगा।”
क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. नीना गिडियन ने बताया कि जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र की टीम ने संभाग के सागर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़ और छतरपुर से कुल 102 हितग्राहियों का चिन्हांकन किया था। आज 48 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया, शेष 54 हितग्राहियों को कल 23 जनवरी को लाभ दिया जाएगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता तिमोरी ने कहा कि कोहनी के नीचे से हाथ गंवा चुके ये लोग अब अपने दैनिक कार्यों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहेंगे। सिविल सर्जन डॉ. आर. एस. जयंत ने इस सफलता का श्रेय RBSK की जिला प्रभारी श्रीमती सुरभी साहू और उनकी पूरी टीम की एक महीने की कड़ी मेहनत को दिया।
राज्य स्तर से आए RBSK स्टेट कंसल्टेंट डॉ. शैलेश शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन संचालक एवं उप संचालक डॉ. निधि शर्मा के निर्देशन में पूरे प्रदेश में इनाली फाउंडेशन के सहयोग से यह पुनीत कार्य किया जा रहा है। पुणे (महाराष्ट्र) से आए फाउंडेशन के विशेषज्ञों ने बताया कि ये इलेक्ट्रॉनिक हाथ मात्र 2 से 2.30 घंटे में चार्ज होकर 2-3 दिन का बैकअप देते हैं। इनसे भोजन करना, पानी पीना और वजन उठाने जैसे काम आसानी से किए जा सकते हैं। उचित प्रशिक्षण के बाद व्यक्ति वाहन चलाने और वेल्डिंग जैसे आजीविका के काम भी कर सकता है। इस मानवीय सरोकार के कार्यक्रम में डॉ. अभिषेक ठाकुर, डॉ. शैलेश शर्मा, इनाली फाउंडेशन के सदस्य, आरबीएसके (RBSK) की समस्त टीम एवं डीईआईसी (DEIC) की पूरी टीम सक्रिय रूप से उपस्थित रही।



