विवि में अब ”लोकतांत्रिक शिक्षक संघ” का उदय, प्रशासनिक “कमांड” की जंग या साथी शिक्षकों हित?
चंद माह पहले ही एक अन्य संघ "सूटा" का हुआ था गठन

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर में इन दिनों अकादमिक हलचलों से ज्यादा शिक्षक संघों के गठन और आगामी चुनावों की बयार तेज है। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में अपनी धमक और पकड़ बनाए रखने की होड़ के बीच अब एक नया संगठन ‘लोकतांत्रिक शिक्षक संघ’ अस्तित्व में आ गया है। बीते महीने ‘सागर विवि शिक्षक संघ’ (SUTA) के पंजीयन और उसके आसन्न चुनावों की सुगबुगाहट के बीच, मंगलवार को लोकतांत्रिक शिक्षक संघ की आम सभा आयोजित की गई। इस नई हलचल ने विश्वविद्यालय की शिक्षक राजनीति में एक नया समीकरण पैदा कर दिया है।
संघों की असली जंग “प्रशासनिक कमांड” के लिए !
विश्वविद्यालय के भीतर चर्चा है कि इन दिनों नए-नए शिक्षक संघों का उदय शिक्षकों की मूलभूत सुविधाओं या अधिकारों तक सीमित नहीं है। जानकारों का मानना है कि इन संघों के गठन के पीछे की असली मंशा विश्वविद्यालय के प्रशासनिक हलके पर अपनी-अपनी ‘कमांड’ बनाए रखना है। शिक्षकों के अलग-अलग गुट अपनी शक्ति प्रदर्शन के जरिए प्रशासन पर दबाव बनाने और भविष्य की नियुक्तियों व निर्णयों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की गरज से इन संगठनों को ढाल बना रहे हैं।
प्रो. राजेन्द्र यादव अंतरिम अध्यक्ष की कमान
मंगलवार को आयोजित आम सभा में शिक्षकों ने सर्वसम्मति से ‘लोकतांत्रिक शिक्षक संघ’ की अंतरिम कार्यकारिणी का गठन किया। बैठक में यह भावना व्यक्त की गई कि विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक मजबूत संगठन की कमी थी।कार्यकारिणी का स्वरूप अंतरिम अध्यक्ष प्रो. राजेन्द्र यादव (हिन्दी विभाग), उपाध्यक्ष प्रो. रत्नेश दास,सचिव डॉ. संजय शर्मा,संयुक्त सचिव डॉ. अनूपी समैया एवं डॉ. नीरज उपाध्याय,कोषाध्यक्ष डॉ. रंजीत रजक इसके अलावा प्रो. सुशील काशव, डॉ. विवेक साठे, डॉ. दीपाली जाट समेत कई वरिष्ठ शिक्षकों को कार्यकारिणी सदस्य चुना गया है। संगठन का दावा है कि पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होते ही लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव संपन्न कराए जाएंगे। नवनियुक्त अध्यक्ष प्रो. राजेन्द्र यादव ने कहा कि उनका संगठन शिक्षकों के अधिकारों और हितों के संरक्षण के लिए संकल्पित है। इस दौरान प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत, प्रो. चंदा बेन, और प्रो. भवतोष इंद्र गुरु जैसे वरिष्ठ शिक्षकों ने नई कार्यकारिणी को शुभकामनाएं दीं। बैठक में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने स्वयं पहुंचकर और ऑनलाइन, दोनों माध्यमों से जुड़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
बढ़ती खींचतान और भविष्य की राह
एक तरफ जहाँ ‘सागर विवि शिक्षक संघ’ पहले से ही मैदान में है, वहीं ‘लोकतांत्रिक शिक्षक संघ’ के आने से कैंपस में वैचारिक और रणनीतिक खींचतान बढ़ना तय है। देखना ये होगा कि ये संगठन वास्तव में शिक्षकों की अकादमिक समस्याओं का समाधान करते हैं या फिर केवल प्रशासनिक वर्चस्व की लड़ाई का एक जरिया बनकर रह जाते हैं।
20/01/2026



