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गणतंत्र दिवस: सत्ता का ‘चौकी भोज’, बच्चों की ‘आधी पत्तलें’ और तिरंगे पर ‘हंसिए’ के वार!

 

सागर। जिले में गणतंत्र दिवस के जश्न के बीच से निकली ये तीन तस्वीरें लोकतंत्र के तीन अलग-अलग चेहरों को बेनकाब करती हैं। कहीं सत्ता का रसूख अपनी चमक बिखेर रहा है, तो कहीं व्यवस्था की सड़ांध नौनिहालों के हक और राष्ट्र के गौरव को लहूलुहान कर रही है।

चौकी पर सजा ‘शाही’ भोज फोटोसेशन तक सिमटा

​मकरोनिया के एक सरकारी स्कूल में आयोजित गणतंत्र दिवस के भोज ने ‘सबके साथ’ की परिभाषा ही बदल दी। जिले के प्रभारी एवं डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल, सांसद डॉ. लता वानखेड़े, वरिष्ठ विधायक प्रदीप लारिया, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरासिंह राजपूत और भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी जैसे दिग्गजों के लिए यहाँ बड़े सलीके से चौकियाँ सजाई गईं। लेकिन व्यवस्था की विडंबना देखिए, जिस स्कूल में बच्चों का हुजूम होना चाहिए था, वहां महज तीन स्कूली बच्चियां इन ‘माननीयों’ और अधिकारियों की भीड़ के बीच सहमी हुई भोजन करती दिखीं। कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में खींची गई यह तस्वीर यह सवाल पूछती है कि क्या यह आयोजन बच्चों के लिए था या केवल सत्ता के रसूख और कैमरों की संतुष्टि के लिए?

आधी पत्तल में परोसा ‘बजट’ का रोना और मास्टर जी की ढीठता

​सत्ता की इस चकाचौंध से कुछ ही दूर, ग्राम बिहारी खेड़ा (शासकीय प्राथमिक शाला) में व्यवस्था का एक और विभत्स चेहरा सामने आया। यहाँ हेड मास्टर रामप्रसाद शर्मा ने मानवता और मर्यादा दोनों को ताक पर रख दिया। स्कूल में तिरंगा फटा हुआ फहराया गया और जब बच्चों को भोजन कराने की बारी आई, तो उन्हें स्टील की थालियों के बजाय कागज की आधी-आधी पत्तलों में खाना परोसा गया।

 

जब ग्रामीणों ने इस संवेदनहीनता पर जवाब मांगा, तो मास्टर साहब ने बड़ी ढीठता से ‘बजट नहीं आने’ का बहाना बना दिया। हकीकत यह थी कि स्कूल में बर्तन मौजूद थे, लेकिन केवल उन्हें धोने की मेहनत से बचने के लिए बच्चों के निवाले को कचरे की तरह परोसा गया। यह सीधे तौर पर नौनिहालों के हक पर डाका डालने जैसा कृत्य है।

तिरंगे पर ‘हंसिए’ का वार और सरपंच का पुत्र-मोह

​सबसे शर्मनाक और कानून को चुनौती देने वाली घटना राहतगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत हनौता पारी छत से आई। यहाँ नारी शक्ति और पंचायती राज के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गईं। सरपंच तारा रानी शर्मा की जगह उनके पुत्र और ‘कथित’ प्रतिनिधि राजकुमार शर्मा ने मुख्य अतिथि की भूमिका निभाई। सोमवार को जब झंडा फहराने में कुछ बाधा आई, तो लोकतांत्रिक गरिमा का परिचय देने के बजाय उसे किसी धारदार हथियार (हंसिया) से काटकर फाड़ दिया गया। इस घोर निंदनीय कृत्य में सरपंच प्रतिनिधि राजकुमार शर्मा, सचिव वीरेंद्र दुबे और सहायक सचिव श्रीकांत भारद्वाज की सीधी लापरवाही और संवेदनहीनता सामने आई है। तिरंगे को सलीके से उतारने के बजाय उस पर हथियार चलाना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि उन शहीदों के अपमान के समान है जिन्होंने इस ध्वज की शान के लिए प्राण दिए।

“सागर की ये तीन तस्वीरें बताती हैं कि एक ओर मकरोनिया में चौकी पर ‘वीआईपी कल्चर’ का प्रदर्शन हुआ, तो दूसरी ओर बिहारी खेड़ा और हनौता पारी छत में गरीब बच्चों और राष्ट्र के गौरव का अपमान। क्या प्रशासन इन ‘अखाड़े’ के सूरमाओं और लापरवाह शिक्षकों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई करेगा या ये तस्वीरें केवल सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा बनकर रह जाएंगी ?”

26/01/2026

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