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ट्रम्प के अलावा सागर में भी हैं ग्रीनलैंड के तलबगार !

         नारदवाणी !

सागर। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हावो-हावो ( मतलब…. हमें तो आलपिन से एयरोप्लेन तक सब चाहिए) जग-जाहिर है। आज कल वे एक चिनू साइज के द्वीप ” ग्रीनलैण्ड” को कब्जाने की कोशिश में हैं। …. बात ग्रीनलैण्ड की निकली है तो सागर में भी ग्रीनलैंड ( ग्रीन बेल्ट) के प्रेमियों की कमी नहीं है। मालूम हुआ है कि जमीनों की तिजारत करने वालों की एक नई कमेटी बनी है। जो तिली क्षेत्र की महाविवादित ग्रीनलैंड टेग्ड जमीन को ठिकाने लगाने के लिए नए सिरे से तरकीब निकालेगी। नारदवाणी के “जग्गा जासूस” का कहना है कि ग्रीनलैंड खरीदने वाली असल फर्म के पुराने मेम्बरान रुखसती ले गए हैं। उनकी जगह नई कमेटी के मेम्बरान शामिल हुए हैं। इनमें जमीनों के खुदा का दर्जा रखने वालों से लेकर स्वास्थ्य विभाग में रहकर भी अस्वस्थ रहने वाले, जमीन के लिए अक्सर “कमीनपन” के आरोपों में घिरे रहने वाले समेत तमाम “अच्छे-बुरे” लोग शामिल हैं। यहां साफ कर दें कि पुराने मेम्बरान इसलिए निकल लिए कि वे अब “कमाई पे टैक्स” वालों के फेर में अपनी सियासी सूरत और धूसर नहीं करना चाहते। ….तो पिलान ये है कि पुरानी फर्म अभी सीधे-सीधे कमाई पे टैक्स वालों के रडार में नहीं हैं। इसलिए उसके नाम बची दो-ढाई एकड़ जमीन को बड़ी ” राज-दारी” के साथ बेचकर फंसी हुई लग्गत निकाल ली जाए।

घायलों-मरीजों के बीच डॉक्टर का “कुकुर प्रेम”

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में एक डॉक्टर साहब हैं। जो बंडा ” दी सिटी ऑफ ब्लैक स्टोन” के रहने वाले हैं। इसलिए प्रेमवश लोग उन्हें बंडा भी कह देते हैं। खैर…. ये डॉक साब कुकुर माने श्वान माने कुत्ता के बड़े प्रेमी हैं। इतने कि वे अपने टॉमी को गोद में बैठाकर कैजुअलटी ड्यूटी करते हैं। नजारा ये होता है कि मरीज की पीठ पर आला चिपकाए… उले- उले…. पुच-पुच करने लगते हैं। कुत्ते पर गौर नहीं करने वाले मरीज कन्फ्यूज हो जाते हैं कि डॉक्टर साब मेरी पीठ से क्यों बात कर रहे हैं। चर्चा है कि डॉक्टर के इस व्यवहार की शिकायत कैजुअल्टी इंचार्ज ने अस्पताल और कॉलेज सुप्रीमो, दोनों से की। रिजल्ट ये निकला कि इंचार्ज बदल गए। डॉगेश भाई अभी भी कैजुअल्टी में आवन- जावन कर रहे हैं।

चंदेबाज ‘क्वीन्स’ और सागर में रसूख का नया सर्कस !

​सागर की फिजाओं में इन दिनों ‘आधी आबादी’ के नेतृत्व का एक अजीबोगरीब जलवा बिखरा हुआ है। 33 प्रतिशत महिला आरक्षण और आगामी परिसीमन ने जिले में ऐसी ‘स्वयंभू रानियों’ को जन्म दिया है, जो खुद को किसी प्रतिस्पर्धा का हिस्सा नहीं मानतीं, बल्कि सीधे ‘दबोच’ लेने वाली थ्योरी पर यकीन रखती हैं। दिल्ली के ‘वजीरों’ के साथ प्रोफाइल फोटो चिपकाकर ये मोहतरमाएं जिले में अपना खौफ कायम करना चाहती हैं। इनके लिए न दल मायने रखता है, न संगठन; बस ‘छपास’ का रोग और शोहरत की भूख है। वजीरों के बेटों की क्लासमेट होने का दावा करना तो महज एक छोटा सा जरिया है, असली हसरत तो सीधे संसद या विधानसभा की दहलीज लांघने की है।हद तो तब हो गई जब समाज सुधार का चोला ओढ़े ‘भद्र संगठनों’ में भी इन ‘चालाक मछलियों’ ने अपनी पैठ बना ली। नेतृत्व तराशने के पवित्र मकसद से शुरू हुए मंचों को इन गिरोहों ने ‘चंदेबाजी की दुकान’ बना दिया है। खेलकूद और सामाजिक मेलजोल के नाम पर रईस घरों की महिलाओं को ‘चीफ गेस्ट’ और ‘फ्लेक्स क्वीन’ बनने का सपना बेचा जा रहा है। खेल यह है कि चंदे का 90 प्रतिशत हिस्सा ये “क्वीन मेकर ” डकार जाती हैं और आयोजन के हिस्से आती है महज 10 प्रतिशत की खैरात। चंदाखोरी के इस नौसिखिए खेल में भद्द तब पिटी, जब संघ की चौखट पर माथा टेकने वाली रईसजादियों की तस्वीरें कांग्रेसियों के संग चस्पा कर दी गईं। ‘फायदे’ की चाह में रईस घरानों की ये खातूनों को मालूम ही नहीं कि वे चूना लगवाने के साथ-साथ अपनी सियासी जमीन भी गंवा रही हैं।

शहरी ने कांग्रेसी चरखे के बजाए राष्ट्रीय ध्वज फहराया, ग्रामीण ने दोपहर में रस्म निभाई

हाल ही में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 140 वां स्थापना दिवस मनाया गया। परंपरानुसार इस दिन स्थानीय पदाधिकारी कांग्रेस का चरखायुक्त तिरंगा झंडा फहराते हैं। लेकिन ये क्या…. शहर अध्यक्ष महेश जाटव ने चरखा वाले ध्वज के बजाए भारतीय ध्वज यानी चक्र युक्त तिरंगा फहरा दिया। कुछेक पदाधिकारियों ने रोक-टोक की तो अध्यक्ष के करीबियों ने कहा, पहली बार है गलती हो गई। अब जाने भी दो। इस आयोजन में शहर कांग्रेस के नए पुराने पदाधिकारी शामिल हुए थे। इधर कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष भूपेंद्रसिंह मोहासा ने भी स्थापना दिवस मनाया। महेश की तरह उनका आयोजन भी विवादित रहा। परंपरा के मुताबिक ध्वजारोहण या फहराने का उपक्रम सुबह 9 बजे के पूर्व तक किया जाना चाहिए लेकिन मोहासा ने ये आयोजन दोपहर 2 बजे किया। रजाखेड़ी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित ग्रामीण कांग्रेस के कार्यालय में कुछेक कांग्रेसजन जमा हुए। बताया जाता है कि भीतर बाजार के एक पुराने सेवादली, जो मकरोनिया बटालियन में रात के समय कुछ ज्यादा सक्रिय रहते थे, उन्होंने अध्यक्ष भूपेंद्र को टाइमिंग को लेकर टोका। जवाब मिला अगली बार सुधार लेंगे।

सुरक्षाकर्मियों को खुद की सिक्योरिटी का डर !

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पिछले दिनों एक सुरक्षाकर्मी को एक मरीज के परिचित ने चाकू मार दिया था। इस घटनाक्रम का असर ये है कि अब सुरक्षाकर्मी खुद की सिक्योरिटी को लेकर डरने लगे हैं। अभी तक अस्पताल स्टाफ से पहले मरीज या उसके परिजन पर पिल पड़ने वाली सुरक्षाकर्मियों की ये जमात मरीज- डॉक्टर के बीच जरा सी तेज आवाज सुन यहां-वहां होने लगी है। सलीके से ड्यूटी करने वाले डॉक्टर इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। वहीं कुछ साइड इफेक्ट भी सामने आए हैं। मसलन परिसर के भीतर बने भगवान भोलानाथ के मंदिर की दानपेटी ऐन महा शिवरात्रि के पहले चोरों के हत्थे चढ़ गई। एक डॉक्टर साब, बहसबाजी के बाद अटेंडर के उपचार का शिकार होते-होते बचे।

500 रु. देने के बजाए नया संघ बना लिया !

डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि में मास्साबों के रहनुमा बनने का मौसम चल रहा है। माने कि, शिक्षक संघ के गठन और चुनाव हो रहे हैं। मैदान में सबसे पहले “सागर विवि शिक्षक संघ” (सूटा) आया। जिसने चुनाव में वोटिंग का अधिकार पाने मास्साबों से सदस्यता शुल्क 500 रु. तय किया। इस चुनाव को लेकर नाक-भौं सिकोड़ रहे बाकी मास्साब समेत विवि मुखिया और अफसरों को इस शुल्क के नाम पर मौका मिल गया। उन्होंने 500 रुपया देने के बजाए नया संघ, लोकतांत्रिक शिक्षक संघ के नाम से खड़ा कर लिया। आनन-फानन में काम चलाऊ कार्यकारिणी गठित कर ली। इस कवायद का असर भी हुआ। सूटा की उम्मीद के मुताबिक सदस्य नहीं बने। करीब ढाई सौ बताए जा रहे शिक्षकों में से आधों ने ही सदस्यता ली। जिनके दम पर महीने के आखिरी में वोटिंग होगी।

– 9425172417

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