विवि: विवादित हाथों में शिक्षक संघ ” सूटा” की कमान!
डॉ. नीरज को कमान, डॉ. जोशी निर्विरोध सचिव निर्वाचित

सागर। हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि परिक्षेत्र गुरुवार को एक अजीबोगरीब विरोधाभास का केंद्र बना रहा। एक तरफ जहाँ शिक्षक संघ ‘सूटा’ के चुनावों के जरिए लोकतांत्रिक उत्सव मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर इन चुनावों की वैधानिकता और निर्वाचित पदाधिकारियों के भविष्य पर सवाल उठाए जा रहे थे। नतीजों का गणित देखें तो ’सूटा’ के चुनाव में विवि के 131 शिक्षक मतदाताओं में से 116 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव अधिकारी प्रो. अशोक अहिरवार के अनुसार, शाम तक आए परिणामों ने नई कार्यकारिणी की तस्वीर साफ कर दी। जिसके अनुसार अध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय मुकाबला था, जिसमें केमिस्ट्री विभाग के डॉ. नीरज उपाध्याय ने 53 मत पाकर बाजी मारी।
उपाध्यक्ष पद पर अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. वीरेंद्र मटसेनिया ने 72 मतों के साथ एकतरफा जीत दर्ज की। सचिव पद पर कोई प्रतिद्वंद्वी न होने के कारण केमिस्ट्री विभाग के डॉ. के.बी. जोशी निर्विरोध चुन लिए गए। कोषाध्यक्ष पद पर शिक्षा शास्त्र विभाग के डॉ. संजय बारोलिया (46 मत) और कार्यकारिणी सदस्य के रूप में डॉ. अभिषेक प्रजापति (92 मत) व डॉ. महेंद्र (68 मत) निर्वाचित घोषित किए गए।
विवादित भर्ती 2013 का ‘जाल’: क्या यह ‘पंगु’ नेतृत्व है?
इस पूरी जीत के पीछे का सबसे बड़ा और कड़वा सच यह है कि निर्वाचित होने वाले लगभग सभी पदाधिकारी वर्ष 2013 की उस ‘कु-ख्यात’ भर्ती का हिस्सा हैं, जो पिछले एक दशक से विवि की साख पर प्रश्नचिह्न बनी हुई है। मप्र हाईकोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए निर्देश दिए थे कि 2013 में विज्ञापित मात्र 78 पदों के बदले जिन 191 शिक्षकों को पिछले दरवाजे से ‘रेवड़ियों’ की तरह नियुक्तियाँ दी गई थीं, उनकी सेवाएँ समाप्त की जाएं। कोर्ट की डेडलाइन के मुताबिक 15 नवंबर 2025 तक इन ‘अतिरिक्त’ शिक्षकों को विदा हो जाना चाहिए था। विडंबना देखिए, जिस प्रशासन की ‘कृपा’ और ‘तकनीकी खामियों’ के सहारे ये शिक्षक आज भी अपनी कुर्सियों से चिपके हुए हैं, कल ये उसी प्रशासन के सामने शिक्षकों की समस्याओं को लेकर दहाड़ेंगे? यह वैसा ही है जैसे कोई मुसाफिर उसी नाव में छेद करने की बात करे जिसने उसे डूबने से बचा रखा है। परिक्षेत्र में यह चर्चा आम है कि जिनकी अपनी नौकरी ‘अंतिम सांसें’ गिन रही है और जो विवि प्रशासन की रहमदिली पर टिके हैं, वे शिक्षक हितों के लिए प्रशासन से टकराने का साहस कहाँ से लाएंगे? यदि अगले कुछ महीनों में हाईकोर्ट के आदेश का कड़ाई से पालन होता है, तो ‘सूटा’ का ये नया ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा।
’गौर यूथ फोरम’ की छात्र पंचायत
शिक्षकों के इस चुनाव के बीच विद्यार्थियों का धैर्य जवाब दे गया। गौर यूथ फोरम के आह्वान पर आयोजित ‘छात्र पंचायत’ ने विवि की जर्जर प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी। विवि परिसर में विद्यार्थियों ने एक विशाल रैली निकाली और प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ के चुनावों के लिए नारेबाजी की। भरत सोनी, अंशुल शर्मा और मनीष बोहरे जैसे छात्र नेताओं ने साफ़ कहा कि विवि प्रशासन दोहरे मापदंड अपना रहा है। एक तरफ शिक्षकों के चुनाव कराए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर छात्र संघ चुनावों को वर्षों से दबाकर रखा गया है। आखिर में छात्रों ने कुलानुशासक और रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपा।
29/01/2026



