खबरों की खबर
Trending

विवि की कार्य-परिषद में एकेडमिक के बजाय प्रोफेसर के विवाह संबंधों पर चर्चा

सागर। डॉ. हरी सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय की कार्य-परिषद (ईसी) की गुरुवार को हुई बैठक चर्चाओं के केंद्र में रही। बैठक में विवि के विकास और शैक्षणिक गुणवत्ता के मुद्दों से ज्यादा शोर प्रभारी कुलपति प्रो. वाय.एस. ठाकुर के उस ‘ऑन स्पॉट’ एजेंडे का रहा, जिसने विश्वविद्यालय की गरिमा और कुलपति की प्रशासनिक समझ पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं!

​विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, बैठक का सबसे चर्चित और विवादित एजेंडा एमबीए विभाग के डीन प्रो. श्री भागवत के 10 साल पुराने वैवाहिक विवाद को लेकर था। प्रभारी कुलपति प्रो. ठाकुर ने लखनऊ के किसी न्यायाधीश की समिति की रिपोर्ट का हवाला देकर प्रो. भागवत के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा। जबकि चर्चा ये रही कि इस घेराबंदी के पीछे की पटकथा एमबीए विभाग में ‘कॉन्टेक्चुअल’ (संविदा) शिक्षक की नियुक्ति से जुड़ी है। सूत्रों का कहना है कि प्रो. ठाकुर के पुत्र इसी पद के प्रबल दावेदार हैं। चूंकि प्रो. भागवत विभाग के डीन हैं, इसलिए कुलपति को डर है कि वे उनके पुत्र के चयन में बाधा बन सकते हैं। इसी रास्ते को साफ करने के लिए प्रो. भागवत को उनके पारिवारिक विवाद के जरिए डीनशिप से हटाने की यह कोशिश की जा रही है। बैठक के दौरान एक सदस्य ने तो दबी जुबान में यहाँ तक कह दिया कि यह पूरा मामला एक पिता द्वारा अपने पुत्र की नौकरी के लिए पद के दुरुपयोग का है।

सदस्यों ने कुलपति को याद दिलाई ‘मर्यादा’

​जैसे ही यह एजेंडा पटल पर आया, ईसी सदस्यों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। सदस्यों का स्पष्ट मत था कि जो मामला एक दशक से न्यायालय में विचाराधीन है, उसमें विश्वविद्यालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता। सदस्यों ने प्रभारी कुलपति को उनकी प्रशासनिक सीमाओं की भी याद दिलाई। चर्चा रही कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत प्रभारी कुलपति के पास इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई के अधिकार ही नहीं हैं। इसके बावजूद ऐसे एजेंडे को लाना प्रो. ठाकुर की प्रशासनिक और निजी मंशा पर सवाल खड़े करता है।

पुरानी गलतियों से नहीं लिया सबक

विश्वविद्यालय की ईसी पहले भी विवादित निर्णयों के कारण हाईकोर्ट के कोप का भाजन बन चुकी है। पिछले वर्ष ही तत्कालीन कुलपति और ईसी सदस्यों पर हाईकोर्ट ने 5 लाख रुपये का जुर्माना ठोका था। ऐसे में प्रभारी कुलपति द्वारा व्यक्तिगत द्वेष के चलते ईसी को फिर से विवादों में झोंकने का प्रयास किया गया! करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक में प्रो. भागवत के विवाद को छोड़कर शेष विषयों, जैसे लॉ और एमबीए में कॉन्टेक्चुअल नियुक्तियों की व्यवस्था, बजट स्वीकृतियों और भवन निर्माण संबंधी प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई।बैठक में प्रो. नीरज दुबे, डॉ. अभिषेक बंसल, डॉ. रश्मि जैन और प्रो. देवाशीष बोस, प्रो. श्वेता यादव, प्रो. राजकुमार गंगेले सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

15/01/2026

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!