
सागर। मिलिए उत्तर प्रदेश के बदायूं से आए ‘राजू’ से। राजू एक तीन वर्षीय काला घोड़ा है, जो शायद दुनिया का सबसे अनूठा ‘बिजनेस एनालिस्ट’ है। राजू जब 100 किलोमीटर तक सड़क पर अपने खुरों की घिसाई करता है, तब जाकर रामू जाटव की ‘चलती-फिरती कंपनी’ का प्रोडक्ट तैयार होता है। सरल शब्दों में कहें तो, राजू जितना सड़क पर रगड़ा जाएगा, उतना ही ‘चमत्कारी माल’ तैयार होगा। दर असल रामू अपने घोड़े से निकली नाल, उससे बनी अंगुठियां और ताबीज बेचता है।
अंधविश्वास की अंगूठी और ‘गारंटीड’ समाधान
रामू के पास हर उस समस्या का समाधान है जिसका उत्तर न तो गूगल के पास है और न ही देश के संविधान के पास। अगर मियां-बीबी में महाभारत छिड़ी है, तो राजू की नाल पहनिए—शांति छा जाएगी। अगर आप बेरोजगार हैं और डिग्री रद्दी के भाव बिक रही है, तो नाल की अंगूठी पहनिए—शायद नौकरी खुद चलकर आपके दरवाजे पर घंटी बजा दे। और तो और, ‘मनचाही प्रेमिका’ पाने का जो शॉर्टकट रामू बताता है, वह तो किसी डेटिंग ऐप के पास भी नहीं।
विद्वानों का ‘बौद्धिक दिवालियापन’ उजागर
मजा तो देखिए, रामू के ग्राहकों की सूची में केवल भोले-भाले ग्रामीण ही नहीं, बल्कि ‘कानून के रखवाले’ भी शामिल हैं। हाईकोर्ट के वे वकील जो कोर्ट में दलीलों और सबूतों पर जिरह करते हैं, चैंबर के बाहर निकलते ही रामू के राजू की नाल पर अपनी किस्मत टिका देते हैं। यह हमारे समाज की ‘बौद्धिक दिवालियापन’ की पराकाष्ठा है कि हम मंगल ग्रह पर यान भेजने वाले देश में रहकर भी, घोड़े के ‘विशिष्ट अंगों’ के बालों के ताबीज में अपना उद्धार देख रहे हैं।
रिजल्ट की ‘नो गारंटी’, क्योंकि राजू की रफ़्तार तेज है!
रामू अपनी साफगोई से आधुनिक मार्केटिंग गुरुओं को मात देता है। जब उससे पूछा कि क्या वाकई लोगों की किस्मत बदलती है? तो वह मुस्कुराकर कहता है— “साहब, जब तक रिजल्ट आता है, मैं और मेरी गाड़ी किसी दूसरे राज्य में नई किस्मतें चमका रहे होते हैं।” यानी रामू जानता है कि उसने जो बेचा है वह ‘उम्मीद’ है, और उम्मीद की एक्सपायरी डेट नहीं होती, बस लोकेशन बदल जाती है।
बेरोजगारी का ‘नाल’ कनेक्शन
एक लाख का राजू हर महीने रामू को 25 हजार रुपये की शुद्ध कमाई कर देता है। दरअसल, यह रामू की चतुराई से ज्यादा हमारी बेरोजगारी और हताशा का जश्न है। जब सिस्टम फेल होता है, तो लोग ‘राजू’ जैसे घोड़ों के पैरों में अपनी तकदीर ढूंढने लगते हैं। साउंड सिस्टम चलाने के लिए रामू ने तांगा गाड़ी में सोलर पैनल भी इंस्टाल करा रखा है। खैर…. यूपी से मध्य प्रदेश तक फैला यह कारोबार इस बात का सुबूत है कि देश में भले ही फैक्ट्रियां बंद हो जाएं, लेकिन ‘अंधविश्वास की दुकान’ कभी मंदी की शिकार नहीं होती। बदायूं का राजू आज बुंदेलखंड की सड़कों पर टप-टप कर रहा है, और उसके हर कदम के साथ किसी न किसी ‘पढ़े-लिखे’ आदमी का तर्क मौन हो रहा है।
04/01/2026



