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न्याय की गुहार: एसपी ऑफिस के पोर्च में गूंजा— ‘ आलू ले लो… टमाटर ले लो’

सागर। शहर के सब्जी विक्रेता की बेबसी जब आक्रोश में बदली, तो नजारा देखने लायक था। आमतौर पर जहां फरियादी हाथ जोड़कर न्याय मांगते हैं, वहां इस शख्स ने सिस्टम को आईना दिखाने के लिए एसपी कार्यालय के भीतर ही ‘सब्जी मंडी’ सजा दी। करीब आधे घंटे तक ऑफिस का पोर्च बाजार में तब्दील रहा, जिसे देखकर पुलिसकर्मी सकते में रहे।

क्या है पूरा विवाद… खरीद-फरोख्त या धोखेबाजी ?

शिवाजी वार्ड के रहने वाले कौशल राठौर और हरिसिंह गौर वार्ड के अशोक यादव के बीच यह विवाद एक पुराने सब्जी के ठेले को लेकर शुरू हुआ। कौशल के मुताबिक, उन्होंने जुलाई 2025 में 6000 रू. में अशोक से ठेला खरीदा था ताकि वे अपना घर चला सकें। उनका आरोप है कि 16 दिसंबर को अशोक और उसके साथियों ने न केवल उनसे मारपीट की, बल्कि दिनदहाड़े उनकी कमाई के ₹2000 और पूरा ठेला लूट कर ले गए। कौशल का कहना है कि उन्होंने ठेला किराए पर लिया था लेकिन बाद में अशोक की पत्नी की बीमारी के चलते उन्होंने इसे खरीद लिया, जिसकी लिखा-पढ़ी उनके पास मौजूद है। अशोक की पत्नी निधि ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ठेला कभी बेचा ही नहीं गया था। उन्होंने केवल किराए पर दिया था और कौशल ने उसे धोखे से किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दिया। उनका कहना है कि वे केवल अपना हक वापस लेने गए थे।

पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिस की कार्यप्रणाली है। कौशल का आरोप है कि घटना के समय डायल-112 मौके पर पहुंची थी, वीडियो भी बनाया गया था, लेकिन जब वह गोपालगंज थाने पहुंचे तो वहां उसकी सुनवाई नहीं हुई। पुलिस मेरे साथ आरोपियों के घर गई, वहां मेरा ठेला खड़ा देखा, लेकिन फिर भी न तो ठेला दिलवाया और न ही उन पर कार्रवाई की। उल्टा मुझे ही थाने से धमकाकर भगा दिया गया।

अनोखा प्रदर्शन: जब एसपी ऑफिस बना ‘मंडी’

कई दिनों तक थाने के चक्कर काटने के बाद कौशल ने गांधीवादी तरीके से विरोध का रास्ता चुना। वह झोले में सब्जियां लेकर एसपी ऑफिस पहुंचा और सीधे पोर्च के पास जमीन पर बैठकर सब्जियां बेचने लगे। ” आलू ले लो… भटा- टमाटर ले लो… की आवाज परिसर में गूंजने लगी। हालांकि जैसे ही ये आवाज पुलिस अधिकारियों के कानों तक पहुंचीं तो कार्यालय में तैनात पुलिसकर्मियों ने कौशल को वहां से हटा दिया। 

05/01/2026

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