हाईकोर्ट से सोम डिस्टिलरीज को झटका, टेंडर प्रक्रिया से बाहर


जबलपुर/ सागर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश की दिग्गज शराब निर्माता कंपनी ‘सोम डिस्टिलरीज’ को तगड़ा कानूनी झटका दिया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकल पीठ ने कंपनी के 8 लाइसेंसों को निलंबित करने के आबकारी आयुक्त के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद अब सोम डिस्टिलरीज आगामी वित्त वर्ष 2026-27 की टेंडर प्रक्रिया से लगभग बाहर हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि आबकारी विभाग के कतिपय अफसर कंपनी को देसी-मसाला शराब की सप्लाई के टेंडर में शामिल करने के लिए लगातार तारीखें बढ़ा रहे थे। हालिया तारीख 28 मार्च तय की गई थी, लेकिन कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अफसरों की यह ‘युक्ति’ काम नहीं आई।
लाइसेंस निलंबन पर मुहर, निर्माण भी थमा
कोर्ट के इस फैसले का सीधा असर कंपनी के उत्पादन पर पड़ेगा। आगामी आदेश तक सोम की डिस्टिलरीज में देसी-अंग्रेजी शराब और बीयर का निर्माण पूरी तरह बंद रहेगा। बता दें कि मध्य प्रदेश के शराब बाजार में सोम कंपनी का बड़ा दबदबा रहा है। शराब निर्माण में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है, जबकि बीयर के निर्माण और खपत में इसका 35 प्रतिशत तक कब्जा है। जाली परमिट बुक के जरिए शराब के अवैध परिवहन और धोखाधड़ी के आरोपों को कोर्ट ने गंभीर माना और स्पष्ट किया कि पुराने वित्तीय वर्ष के अपराधों के आधार पर वर्तमान लाइसेंस को भी निलंबित किया जा सकता है।
बाजार में साख गिरी, शेयर 70 रुपये पर लुढ़का
कानूनी कार्यवाही और तालाबंदी का असर सोम के शेयर बाजार प्रदर्शन पर भी दिख रहा है। शेयर बाजार में लिस्टेड इस कंपनी की स्थिति वर्तमान में कोविड काल से भी बदतर हो गई है। पिछले महीने जब डिस्टिलरीज पर ताला लटका, तब कंपनी का शेयर 120 रुपये से गिरकर सीधे 70 रुपये पर आ गया। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के दौरान भी कंपनी का शेयर 80 रुपये तक ही गिरा था। निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता ने कंपनी की वित्तीय सेहत पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
ठेकों में पिछड़ी, 40% दुकानें अभी बाकी
कभी प्रदेश की ‘सिरमौर’ कही जाने वाली सोम डिस्टिलरीज इस बार रिटेल दुकानों के टेंडर में भी पिछड़ गई है। ताजा हालात में कंपनी अब तक केवल 5 प्रतिशत रिटेल दुकानों के टेंडर ही ले पाई है। हालांकि, प्रदेश में अभी औसतन 40 प्रतिशत शराब दुकानों के टेंडर होने बाकी हैं, लेकिन वर्तमान कानूनी संकट और निर्माण पर रोक के चलते कंपनी की वापसी बेहद मुश्किल नजर आ रही है।
क्या था मामला?
दरअसल, सोम डिस्टिलरीज ने आबकारी आयुक्त ग्वालियर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें जाली परमिट के आधार पर अवैध परिवहन के मामले में उनके 8 लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे। कंपनी का तर्क था कि नया लाइसेंस फ्रेश होता है और पुराने मामले में उस पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। लेकिन कोर्ट ने ‘कॉर्पोरेट पर्दे’ को हटाते हुए माना कि गंभीर राजस्व चोरी और धोखाधड़ी के मामलों में तकनीकी आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।
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