
सागर। प्रदेश के अन्य जिलों की तरह सागर में भी गेहूं उपार्जन प्रक्रिया भारी अव्यवस्थाओं और विरोधाभासी नियमों की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिले के खरीदी केंद्रों पर इन दिनों दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर भोपाल स्थित खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों द्वारा जारी गेहूं के कड़े मानकों का हवाला देकर खरीदी केंद्र किसानों की उपज लेने में आनाकानी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यदि केंद्र पर गेहूं खरीद भी लिया जाए, तो वेयर हाउस संचालक उस ‘चिन्हित’ गेहूं को रिसीव करने से साफ इनकार कर रहे हैं। इस विभागीय खींचतान और तकनीकी खामियों के बीच अन्नदाता बेबस खड़ा है।आंकड़ों में उपार्जन: लक्ष्य से कोसों दूर है खरीदी
सागर जिले में गेहूं खरीदी की मौजूदा रफ्तार बेहद चिंताजनक है, जो पिछले वर्षों के मुकाबले काफी पिछड़ी हुई नजर आती है। बीते साल जिले में रिकॉर्ड 44 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की गई थी। इस सफलता को देखते हुए सरकार ने इस बार जिले के लिए 4 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया है।परंतु, वर्तमान स्थिति लक्ष्य से काफी दूर है। अब तक मात्र 66 हजार मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीदी हो पाई है। प्रशासनिक देरी का आलम यह है कि कुल खरीदे गए अनाज में से केवल 1,714 मीट्रिक टन का ही उठाव संभव हो सका है। जहां पिछले साल इसी अवधि तक हजारों किसान अपनी उपज बेच चुके थे, वहीं इस बार अब तक केवल 16,590 किसान ही अपना गेहूं बेच पाए हैं, जबकि 33,272 किसानों के स्लॉट बुक हो चुके हैं। बारदाने की कमी भी एक बड़ा रोड़ा बनी हुई है; प्रशासन का दावा है कि 11 हजार बारदाना गठानें उपलब्ध होने पर ही करीब 2 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त गेहूं खरीदा जा सकेगा।
नियमों का पेच: गुणवत्ता के नाम पर रिजेक्शन
राजधानी भोपाल से जारी आदेशों ने इस बार गेहूं खरीदी की डगर कठिन कर दी है। खाद्य विभाग के उपसचिव द्वारा जारी पत्र के अनुसार, गेहूं की फसल पर बेमौसम बारिश को देखते हुए लस्टर लॉस में 50%, सुकड़े और टूटे दानों में 10% तथा क्षतिग्रस्त दानों में 6% तक की छूट दी गई है। धरातल पर सर्वेयर इन नियमों की आड़ में अच्छे गेहूं को भी रिजेक्ट कर रहे हैं। विडंबना यह है कि जो गेहूं केंद्रों पर पास हो जाता है, उसे वेयर हाउस पहुंचने पर भंडारण अधिकारी रिसीव करने से मना कर रहे हैं। इस विरोधाभास ने समितियों और किसानों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
तकनीकी विफलता और मौसम का साया
खरीदी की सुस्त रफ्तार का एक बड़ा कारण सर्वर का डाउन होना भी है। पिछले कई दिनों से पोर्टल न चलने के कारण किसान स्लॉट बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं। सर्वर की इसी समस्या को देखते हुए प्रशासन ने स्लॉट बुकिंग की तिथि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई कर दी है।इधर, 176 केंद्रों पर हजारों मीट्रिक टन अनाज खुले आसमान के नीचे पड़ा है। पिछले दो दिनों से बदल रहे मौसम ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने हाल ही में केंद्रों का औचक निरीक्षण कर अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई और केंद्र संचालक, प्रशासक व सर्वेयर को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक दिन में जवाब मांगा है। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तुलाई के लिए 6 कांटे बढ़ाए जाएं और किसानों के लिए छाया व शीतल पेयजल की व्यवस्था की जाए।
02/05/2026



