चुनाव चर्चा

क्या “नटराजन” को उनकी ही लीगल टीम ने दिखा दी “नटवरलाली” ?

सागर। मध्य प्रदेश की सियासी बिसात पर राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर एक ऐसा गेम हुआ जिसने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को बैकफुट पर धकेल दिया है। कांग्रेस की घोषित उम्मीदवार और पूर्व सांसद सुश्री मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र स्क्रूटनी में ताश के पत्तों की तरह ढह गया। नतीजतन रिटर्निंग ऑफिसर ने इसे आधिकारिक तौर पर निरस्त कर दिया। चुनावी चौसर पर कांग्रेस की इस करारी शिकस्त का सबसे बड़ा और मुख्य कारण नटराजन द्वारा अपने खिलाफ कोर्ट में चल रहे आपराधिक आरोपों संबंधी परिवाद (केस) और समन की जानकारी को छिपाना बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस के कथित ‘विद्वान’ वकीलों और चुनावी सलाहकारों के रायते ने बची-खुची कसर पूरी कर दी। नामांकन तैयार करने वालों ने नटराजन की चल-अचल संपत्ति के कुल मूल्य (टोटल) के जोड़ में ही भारी गणितीय गड़बड़ी कर डाली। इतना ही नहीं, ओवर-स्मार्टनेस दिखाते हुए निर्वाचन आयोग के तयशुदा फॉर्म के कॉलम साइज और प्रारूप तक से अनधिकृत छेड़छाड़ कर दी गई। इन्हीं तमाम छोटे- बड़े ब्लंडर्स और आधे-अधूरे हलफनामे को ढाल बनाकर बीजेपी ने ऐसा कानूनी घेरा कसा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नटराजन का पर्चा सीधे डस्टबिन में डाल दिया।

बीजेपी की घेराबंदी में फंसी कांग्रेस, स्क्रूटनी के दौरान हुआ ‘खेला’

सियासी गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी इस सीट पर कांग्रेस को वॉकओवर देने के मूड में बिल्कुल नहीं थी। 9 जून 2026 को जैसे ही दोपहर 2:00 बजे नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) शुरू हुई, बीजेपी के रणनीतिकार पूरी तैयारी के साथ उतरे। बीजेपी उम्मीदवार रजनीश कुमार अग्रवाल, महेश केवट और बीजेपी प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने नटराजन के पर्चे पर लिखित आपत्तियों का ऐसा पुलिंदा पेश किया कि कांग्रेस के चाणक्य बगले झांकने लगे। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-36 के तहत जब इन शिकायतों की परख हुई, तो कांग्रेस उम्मीदवार के दावों की धज्जियां उड़ गईं।

मात्र चार ‘सियासी पंच’, और कांग्रेस चित्त

रिटर्निंग ऑफिसर अरविन्द शर्मा द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, कांग्रेस उम्मीदवार के पर्चे में ऐसी बुनियादी और अक्षम्य गलतियां थीं, जिन्हें किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।माननीय न्यायालय में प्रकरण क्रमांक एसआर नं. 4427/2025 (निजी परिवाद) के तहत सुश्री नटराजन के खिलाफ केस दर्ज है, जिसमें कोर्ट ने 17 सितंबर 2025 को बाकायदा समन जारी किया था और नटराजन ने 24 अक्टूबर 2025 को अपना जवाब भी कोर्ट में पेश किया था। इस पूरे मामले को नटराजन ने अपने फॉर्म 26 यानि एफिडेविट में गोल कर दिया। कांग्रेस की लीगल टीम ने संपत्ति का हिसाब किताब किसी नौसिखिए की तरह लगाया। नामांकन पत्र के भाग-‘बी’ में जो संपत्ति का टोटल दिखाया गया, वह शपथ पत्र के भाग-‘ए’ के कुल मूल्य से मैच ही नहीं खा रहा था। दोनों के गणितीय जोड़ में अंतर था।​एक आत्मघाती कदम यह भी रहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा तय किए गए मूल प्रारूप के दूसरे पन्ने पर मौजूद इनकम टैक्स डिटेल्स वाले कॉलम के साइज को ही छोटा कर दिया गया और तय कॉलमों की संख्या कम कर दी गई। एफिडेविट के पेज नंबर 5, 6 और 7 पर लगी सत्यापन मोहरें इतनी धुंधली और अपूर्ण थीं कि उन्हें वैध नहीं माना गया। इसके अलावा, आपराधिक मामलों वाले अनिवार्य कॉलम (कॉलम नंबर 5) में जहां ‘हां’ या ‘ना’ का टिक मार्क करना था, उसे बिना भरे ही छोड़ दिया गया। ​रिटर्निंग ऑफिसर ने अपनी हैंडबुक के अध्याय 6 के बिंदु क्रमांक 10(xiii) के तहत इस कृत्य को मतदाताओं से सच छिपाने का दोषी पाया और कांग्रेस का पर्चा खारिज कर दिया।

कांग्रेस के सांगठनिक स्तर पर कितनी गहरे षड़यंत्र ! 

​चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार मध्य प्रदेश की इस तीसरी राज्यसभा सीट के सारे समीकरण अब पूरी तरह बदल चुके हैं और इस पर कांग्रेस का दावा खत्म हो चुका है। चूंकि मुख्य उम्मीदवार रेस से बाहर हो चुकी हैं और प्रस्तावक नियमों की जटिलताओं के चलते कांग्रेस के पास अब कोई वैध विकल्प नहीं बचा है, इसलिए यह तीसरी सीट अब थाली में परोसकर सीधे तौर पर बीजेपी की झोली में चली गई है। बीजेपी अब बेहद आसानी से अपने अतिरिक्त उम्मीदवार को निर्विरोध संसद भेजने की स्थिति में आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी के प्रदेश नेतृत्व और दिल्ली के आला वकीलों द्वारा संपत्ति के जोड़ और फॉर्म के कॉलम साइज जैसी बचकानी गलतियों पर ध्यान न देना यह बताता है कि पार्टी के भीतर सांगठनिक स्तर पर कितनी गहरे षड़यंत्र चल रहे हैं। जिन्हें लापरवाही और समन्वय की कमी का नाम देकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।

09/06/2026

 

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