खबरों की खबर

विवि: हटाए गए पूर्व कुलसचिव डॉ. प्रधान का आवास पर ‘अवैध कब्जा’!

संपदा विभाग ने की पानी-बिजली काटने की तैयारी

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर ने करीब ढाई साल पहले तत्कालीन कुलसचिव डॉ. रंजनकुमार प्रधान की सेवाएं समाप्त कर दी थीं, लेकिन वे तब से लेकर अब तक कैंपस में आवंटित बी-टाइप सरकारी आवास पर कब्जा जमाए बैठे हैं। विवि के नियमानुसार यह कब्जा अब पूरी तरह से अवैध माना जा रहा है। हालांकि, इस विवादित अवधि में कुछ समय ऐसा भी था जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने डॉ. प्रधान को आवास खाली न करने की अंतरिम रियायत दी थी, लेकिन वह मियाद कब की खत्म हो चुकी है। इसके बावजूद वे दिसंबर 2023 से इस सरकारी आवास का किराया तक जमा नहीं कर रहे हैं, जबकि विवि ने इस बी-टाइप आवास का मासिक किराया 3000 रुपये से अधिक तय कर रखा है। बहरहाल इस मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। विश्वविद्यालय के संपदा विभाग ने इस अवैध कब्जे को हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, विवि के संपदा अधिकारी प्रो. राजेंद्र यादव ने हाल ही में वर्तमान रजिस्ट्रार डॉ. एसपी उपाध्याय को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने पूर्व कुलसचिव डॉ. प्रधान द्वारा सरकारी आवास खाली न किए जाने की पूरी क्रोनोलॉजी बताते हुए, अब सख्त कदम के तौर पर उक्त भवन की पानी और बिजली सप्लाई काटने की लिखित अनुमति मांगी है।

अज्ञात लोगों की आवाजाही से सुरक्षा पर सवाल

संपदा अधिकारी प्रो. राजेंद्र यादव ने अपने पत्र में आगे लिखा है कि उक्त विवादित आवास में कतिपय अज्ञात लोग कभी-कभार आते-जाते रहते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन बाहरी लोगों का विवि के सुरक्षा विभाग के पास कोई रिकॉर्ड या ब्योरा दर्ज नहीं है। प्रो. यादव ने पत्र में सीधे तौर पर सवाल खड़ा किया है कि यदि भविष्य में कैंपस में या इसी आवास के भीतर कोई भी अप्रिय घटना घटित होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? जानकारी के अनुसार, रजिस्ट्रार ऑफिस इस पत्र को अंतिम मुहर और आगे की दंडात्मक कार्रवाई के लिए कुलपति कार्यालय को भेज रहा है।

4 महीने की लिमिट के बाद वसूला जाता है 40 गुना किराया

विश्वविद्यालय प्रशासन के नियमों के मुताबिक, सेवा से मुक्त होने, रिटायर होने या पद छोड़ने वाला कोई भी अधिकारी/कर्मचारी विवि के सरकारी आवासों में अधिकतम 4 महीने तक ही रह सकता है। यदि इस अवधि के बाद भी आवास खाली नहीं किया जाता है, तो नियम विरुद्ध कब्जा रखने वाले व्यक्ति से 40 गुना प्रति माह के मान से दंडात्मक किराया वसूलने का प्रावधान है। इधर, विवि की लीगल सेल (विधिक शाखा) के सूत्रों ने भी साफ कर दिया है कि डॉ. प्रधान को इस आवास में कब्जा बनाए रखने की अनुमति वर्तमान में किसी भी स्तर या न्यायालय से प्राप्त नहीं है। लिहाजा, उनका वर्तमान कब्जा पूरी तरह से गैर-कानूनी और विधि विरुद्ध है। गौरतलब है कि डॉ. रंजनकुमार प्रधान को 1 दिसंबर 2023 को आयोजित कार्यपरिषद की बैठक में पद से हटा दिया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने कुलसचिव पद के लिए निर्धारित आवश्यक शैक्षणिक और अनुभव संबंधी अनिवार्य योग्यताएं पूरी नहीं की थीं।

 4-5 बार नोटिस जारी, मूल संस्था से होगी वसूली

पूर्व कुलसचिव डॉ. प्रधान को आवंटित आवास खाली करने के लिए प्रशासन की ओर से अब तक 4-5 बार आधिकारिक नोटिस दिए जा चुके हैं। विधिक प्रक्रिया के तहत मकान खाली कराए जाने की कार्रवाई तेजी से प्रक्रियाधीन है। इसके साथ ही, इस पूरी अवधि के दौरान बकाया रहे किराए की शत-प्रतिशत वसूली हेतु उनकी मूल संस्था को पहले ही पत्र प्रेषित किया जा चुका है और इस संबंध में जल्द ही एक और रिमाइंडर भेजा जाएगा।

डॉ. विवेक कुमार जायसवाल, प्रभारी पीआरओ, डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर (मप्र)

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!