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जिला न्यायालय: सरकारी वकीलों का कार्यकाल खत्म, पीड़ितों की पैरवी की गुणवत्ता पर सवाल !

सागर। जिला न्यायालय में न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ितों और गंभीर मुकद्दमों में शासन का पक्ष रखने वाली अभियोजन व्यवस्था खुद ‘तदर्थ’ सहारे पर टिकी हुई है। सागर जिला न्यायालय में तैनात सभी 8 सरकारी वकीलों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन राज्य शासन के विधि विभाग द्वारा नई सूची को हरी झंडी न दिए जाने के कारण यही वकील अदालतों में डटे हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ वकीलों को तो बीते 2 से 5 साल से रिन्यूअल तक नहीं मिला है, इसके बावजूद वे नियमित रूप से पैरवी कर रहे हैं और शासन से निर्धारित करीब 1,400 रुपये प्रतिदिन की फीस भी ले रहे हैं। ​हाल ही में मध्य प्रदेश के 20 से अधिक जिलों के लिए सरकारी वकीलों के पैनल की सूची जारी की गई, लेकिन सागर जिला इस सूची से पूरी तरह महूसम रहा। जानकारी के मुताबिक, एडवोकेट दीपक पौराणिक का कार्यकाल वर्ष 2021 से और एडवोकेट हरिशंकर विश्वकर्मा, अमित श्रीवास्तव व रमन जारौलिया का कार्यकाल वर्ष 2024 से बिना रिन्यूअल के चल रहा है। इसी फेहरिस्त में चार महीने पहले (मार्च 2026) सीनियर एडवोकेट दीपक भंडारी, आशीष चतुर्वेदी, रामबाबू रावत और देवेश बचकैंया का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है।

अनिश्चितता के साए में ‘बेहतर पैरवी’ पर सवाल

​न्यायालय के विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने और गुणवत्तापूर्ण पैरवी के लिए वकीलों का सेवाकाल सुनिश्चित होना बेहद जरूरी है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद काम कर रहे अधिवक्ताओं के सिर पर हमेशा यह तलवार लटकी रहती है कि वे किसी भी दिन आधिकारिक रूप से हटाए जा सकते हैं। इस मानसिक अनिश्चितता के बीच मुकद्दमों में वैसी शिद्दत और समर्पण की उम्मीद करना बेमानी है, जैसी राज्य शासन की मंशा होती है। नतीजतन, इसका सीधा असर पीड़ितों के न्याय और केस के नतीजों पर पड़ सकता है।

एडीपीओ का विकल्प भी व्यावहारिक नहीं

​नियमों के मुताबिक, सरकारी वकीलों की अनुपलब्धता या विकल्प के तौर पर गृह विभाग द्वारा नियुक्त सहायक लोक अभियोजन अधिकारियों को केस सौंपे जा सकते हैं। लेकिन सागर जिला न्यायालय के सूत्रों का कहना है कि यहां अधिकांश एडीपीओ के पास 10 वर्ष की आवश्यक न्यायालयीन प्रैक्टिस का अनुभव नहीं है, जिसके कारण तकनीकी रूप से उन्हें ये महत्वपूर्ण प्रकरण नहीं सौंपे जा सकते।

पैनल लंबित, फैसले का इंतजार

वर्तमान प्रशासनिक गतिरोध को तोड़ने का एकमात्र जरिया यही है कि जिला प्रशासन विधि विभाग से त्वरित पत्राचार करे। जानकारी के अनुसार, कलेक्टर सागर की ओर से 8 स्वीकृत पदों के विरुद्ध 26 वकीलों के नामों का पैनल पहले ही विधि विभाग को भेजा जा चुका है। अब गेंद पूरी तरह शासन के पाले में है कि वह कब सागर जिले की इस संवेदनशील व्यवस्था को स्थायी और मजबूत चेहरा देती है।

सागरवाणी…9425172417

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