साहित्य और संस्कृति

आस्था का कारवां: कोई कैंसर से लड़कर तो कोई पहली बार ट्रेन पर चढ़कर जाएगा जगन्नाथपुरी

राम सरोज समूह' की सेवा बनी सहारा

सागर। कहते हैं जब भगवान जगन्नाथ का बुलावा आता है, तो परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं। सागर में कुछ ऐसा ही नजारा सोमवार को होटल राम सरोज पैलेस में आयोजित ‘जगन्नाथ पर्व’ में देखने को मिला। अवसर था ‘राम सरोज समूह’ द्वारा संचालित ‘तीर्थ दर्शन संकल्प’ के 5 वें वर्ष में प्रवेश का, जिसके तहत जगन्नाथ पुरी जाने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए सम्मान और टिकट वितरण समारोह आयोजित किया गया। इस बार के जत्थे में शामिल यात्रियों की कहानियां और उनका संघर्ष यह बताने के लिए काफी है कि आस्था जब सेवा से मिलती है, तो लाचारी भी घुटने टेक देती है। इस यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं में कई ऐसे चेहरे शामिल हैं, जिनके लिए यह सफर किसी चमत्कार से कम नहीं है। दल में शामिल मुलाबाई के लिए यह जीवन का सबसे अनोखा क्षण है, क्योंकि वे अपने जीवन में पहली बार ट्रेन का सफर करने जा रही हैं। टिकट हाथ में आते ही उनकी आंखें छलक आईं। वहीं, गंभीर बीमारी से जूझ रहीं रत्ना यादव की कहानी हर किसी को भावुक कर देने वाली है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी और तंग आर्थिक हालातों से लड़ते हुए उनके मन में सोमनाथ और जगन्नाथ पुरी के दर्शन की गहरी इच्छा थी, जिसे समूह ने अपना दायित्व मानकर पूरा किया। इसके अलावा, अपाहिज होने के कारण अपनों और समाज से उपेक्षित हो चुके कैलाश को जब समूह ने इससे पहले मथुरा की यात्रा कराई थी, तो उनके जीवन में जीने की नई उमंग जाग उठी थी। इस बार भी जत्थे में कई ऐसे वृद्धजन शामिल हैं, जिन्हें उनके परिवारों ने वृद्धाश्रम में छोड़ दिया है। इन बुजुर्गों के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि सम्मान से जीने का एक नया जरिया बन गई है। पुत्र न होने के मलाल को भुलाकर जीवित रहते हुए अपना ‘पिंडदान’ करने वाले बद्री सोनी भी इस निस्वार्थ सेवा भाव के प्रत्यक्ष गवाह हैं, जिन्हें गयाजी भेजकर समूह ने उनके पूर्वजों के प्रति कर्तव्य को पूरा कराया था।

 

संतों का आशीष: ‘मानव सेवा ही साक्षात माधव सेवा है’

इस अवसर पर रामबाग मंदिर के वरिष्ठ संत पूज्य श्री घनश्याम दास जी महाराज, नर्मदा भक्त संत श्री पंडित केशव गोस्वामी जी एवं पंडित संदीप मिश्रा महाराज के सानिध्य में गणेश पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मुख्यअतिथि महंत श्री घनश्याम दास जी महाराज ने कहा कि राम सरोज समूह जिस निष्ठा के साथ वृद्धजनों और निर्धन भक्तों को तीर्थ दर्शन करा रहा है, वह समाज के लिए एक महान प्रेरणा है। शास्त्र कहते हैं कि जब सेवा का भाव आस्था के साथ जुड़ता है, तो वह साक्षात ईश्वर की आराधना बन जाता है।पंडित केशव महाराज ने भी समूह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मानव सेवा ही वास्तव में माधव सेवा है। यह केवल तीर्थ यात्रियों की यात्रा नहीं, बल्कि उस संकल्प की विजय है जिसने चार वर्षों में हजारों चेहरों पर संतोष बिखेरा है। कार्यक्रम में समाजसेवी बबीता केसरवानी, गीता-शैलेश केसरवानी एवं श्वेता-अखिलेश मोनी केसरवानी ने सभी यात्रियों पर पुष्प वर्षा कर और तिलक लगाकर उन्हें विदा किया। सेवा और समर्पण का पांचवां गौरवशाली वर्ष

राम सरोज समूह के सदस्यों ने बताया कि उनका उद्देश्य समाज के उस वंचित वर्ग को प्रभु के धाम तक पहुंचाना है, जो आर्थिक तंगी या शारीरिक अक्षमता के कारण उम्मीद छोड़ चुके थे। पिछले 4 वर्षों में यह कारवां बेहद व्यापक हो चुका है। समूह अब तक 5 बार अयोध्या धाम, 4 बार मथुरा-वृंदावन के साथ-साथ सोमनाथ, काशी-वाराणसी, प्रयागराज महाकुंभ तथा गयाजी जैसे पावन स्थलों पर तीर्थ यात्रियों के सफल जत्थे भेज चुका है। जिसमें करीब 13 हजार लोगों ने धर्म लाभ लिया। इस दफा की यात्रा में भी करीब 200 लोग शामिल हैं। इससे पहले आयोजकद्वय शैलेश केशरवानी ने कहा कि राम सरोज समूह के लिए यह सफर महज एक यात्रा नहीं, बल्कि समाज के उस वर्ग के प्रति हमारा समर्पण है, जो किन्हीं कारणों से प्रभु के धाम तक नहीं पहुँच पाते। जगन्नाथ पुरी की इस यात्रा में हमारे साथ चल रहे वृद्धजनों के चेहरे पर जो आनंद और संतोष के भाव दिख रहे हैं, वही हमारी असली कमाई है। वहीं अखिलेश मोनी केशरवानी ने कहा कि, आज जब हमारे तीर्थ यात्रियों का जत्था जगन्नाथ पुरी के लिए रवाना हो रहा है, तो मन में असीम शांति का अनुभव हो रहा है। लगातार पांचवें वर्ष में इस यात्रा का निर्विघ्न प्रवेश करना यह दर्शाता है कि नेक नीयत से किया गया कार्य हमेशा सफल होता है। हमारा प्रयास है कि हम अपने बुजुर्गों को वह सम्मान और आध्यात्मिक सुख प्रदान करें जिसके वे हकदार हैं। मंच संचालन एम.डी. त्रिपाठी ने किया और आभार भारती नवीन केसरवानी ने माना। अंत में आयोजित पारंपरिक ‘भुट्टा पार्टी’ ने इस पूरे धार्मिक आयोजन को आत्मीय और यादगार बना दिया। इस पावन विदाई वेला में मुकेश तिवारी, भूपेंद्र सिंह, संदीप सोनी सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी, मित्र- शुभ चिंतक उपस्थित रहे, जिन्होंने नम आंखों और जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ यात्रियों के जत्थे को रवाना किया।

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