विवि में आज: “क्लासिफिकेशन गुरु” प्रो. जेके मिश्रा के सेवानिवृत्ति समारोह में जमा होंगे देश भर के लाइब्रेरियन

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष सीनियर प्रो. जेके मिश्रा मंगलवार को सेवानिवृत्त (रिटायर) हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक विदाई वेला को यादगार बनाने के लिए आज देश भर से उनके शिष्यों का हुजूम सागर में जुट रहा है। देश के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों, प्रतिष्ठित रक्षा व अनुसंधान संस्थानों, आईआईटी और व्यवहार न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में कार्यरत उनके सैकड़ों पूर्व छात्र अपने प्रिय गुरु को विदाई देने विश्वविद्यालय के अभिमंच सभागार में एकत्र हो रहे हैं, जहां आज सुबह 11 बजे से यह भव्य गरिमामयी आयोजन शुरू होगा। लाइब्रेरियन शशिकांत खरे और दीपक पुरवार ने बताया कि प्रो. मिश्रा देश के पुस्तकालय जगत में सर्वश्रेष्ठ ‘क्लासिफिकेशन’ (वर्गीकरण) विशेषज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। पुस्तकालय विज्ञान में ‘क्लासिफिकेशन’ वह रीढ़ है जिसके जरिए ज्ञान के असीमित भंडार (किताबों, शोध-पत्रों और दस्तावेजों) को एक विशिष्ट वैज्ञानिक पद्धति (जैसे कोलन या ड्यूई डेसिमल क्लासिफिकेशन) के तहत विषयों और कोड के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है। इसका मुख्य महत्व यह है कि इसके बिना किसी विशाल लाइब्रेरी से अपनी मनपसंद किताब या जानकारी ढूंढना भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा दुष्कर कार्य हो जाएगा। क्लासिफिकेशन ही पाठकों और शोधकर्ताओं का समय बचाता है और पुस्तकालय प्रबंधन को सटीक व सुगम बनाता है।
प्रो. मिश्रा इसी विधा के जादूगर माने जाते हैं।
वह विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. हरीसिंह गौर के सच्चे साधक हैं। 80 के दशक में प्रो. मिश्रा दिल्ली में टाटा के प्रतिष्ठित अकादमिक संस्थान ‘टेरी’ (TERI) में बतौर रिसर्च एसोसिएट 10 हजार रुपये के बड़े वेतन पर कार्यरत थे। लेकिन जब उन्हें सागर विश्वविद्यालय में महज 3 हजार रुपये वेतन वाले लेक्चरर पद की जानकारी मिली, तो उन्होंने पैसे की परवाह न कर सागर आने का फैसला किया। इंटरव्यू में जब उनसे मोटी सैलरी छोड़कर यहां आने का कारण पूछा गया, तो उनका जवाब था— “मैं डॉ. हरीसिंह गौर को दिल्ली विवि के संस्थापक कुलपति के रूप में जानकर उनसे बेहद प्रभावित था। मैं चाहता था कि उन जैसे महान शिक्षाविद् द्वारा स्थापित इस विवि में मेरा भी कुछ योगदान हो।” सागर के पूर्व एसपी और मध्य प्रदेश पुलिस के रिटायर्ड स्पेशल एडीजी राजेंद्र मिश्रा के छोटे भाई प्रो. जेके मिश्रा एक बेहतरीन शिक्षक भी रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में पढ़े छात्र एमपीपीएससी, यूपीपीसीएस सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार परचम लहराते रहे हैं। आज उनके इसी योगदान को नमन करने के लिए देश भर से आए एल्युमिनाई (पूर्व छात्र) उन्हें विदाई पर सरप्राइज के तौर पर एक गाड़ी भी उपहार में भेंट कर रहे हैं। शिक्षा जगत में उनका यह अवदान हमेशा याद रखा जाएगा।
सागरवाणी…9425172417….30/06/2026



