थाने में हमले का डर…. कोर्ट पहुंचे तो 18 वकील जमानत का विरोध करने खड़े थे
पूर्व डीएसपी डॉ. रेखा जैन सहित तीनों आरोपियों को हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत - मुनिश्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी के चलते हुआ था अशोकनगर में केस दर्ज

सागर। जैन धर्म के पूज्य संत निर्यापक मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से अमर्यादित टिप्पणी प्रसारित करने के बहुचर्चित मामले में आरोपियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मुख्य आरोपी पूर्व डीएसपी व जैन ब्रह्मचारिणी डॉ. रेखा जैन, सह-आरोपी राहुल जैन और समीर जैन की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की एकल पीठ में बीते 7 जुलाई को इस संवेदनशील प्रकरण पर सुनवाई हुई थी। जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को कोर्ट ने अपना सुरक्षित फैसला सुनाते हुए तीनों को अग्रिम जमानत दे दी।
अदालत में वकीलों की दलीलें और बचाव पक्ष का तर्क
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान डॉ. रेखा जैन व अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ग्रीष्म जैन, संकल्प कोचर और संकल्प शर्मा ने पैरवी की। बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत को तकनीकी साक्ष्यों के साथ बताया कि जिस मैसेज के आधार पर अशोकनगर पुलिस ने कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज की है, वह मैसेज वास्तव में डॉ. रेखा जैन द्वारा नहीं भेजा गया था। सह-आरोपी राहुल जैन के संबंध में तर्क दिया गया कि वे केवल उस सोशल मीडिया ग्रुप के एडमिन हैं, न कि मैसेज के निर्माता। वहीं, समीर जैन को लेकर बताया गया कि उन्होंने मुनिश्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर की जा रही अन्य टीका-टिप्पणियों से आहत और नाराज होकर अपना पक्ष रखा था, उनका उद्देश्य किसी की भावनाएं आहत करना नहीं था।हालांकि हमारे पक्षकार निजी जीवन में किसी भी आम व्यक्ति से लेकर मुनि श्री की इस तरह वर्चुअल प्लेटफार्म पर निंदा करने के घोर विरोधी हैं।
अशोकनगर जैन समाज ने किया जमानत का विरोध
दूसरी तरफ, पूर्व डीएसपी डॉ. जैन और अन्य की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करने के लिए शिकायतकर्ता और अशोकनगर जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जी कासल स्वयं करीब डेढ़ दर्जन वकीलों की भारी-भरकम फौज के साथ कोर्ट में मुस्तैद रहे। उनका तर्क था कि इस टिप्पणी से पूरे जैन समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साइबर सेल की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट का संज्ञान लेने के बाद न्यायालय ने आरोपियों को राहत देना उचित समझा।
ललितपुर ‘पत्रकांड’ से जुड़े हैं मामले के तार : नैनधरा
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर वरिष्ठ समाजसेवी अनिल जैन नैनधरा ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि यह एफआईआर पूरी तरह से दबाव में दर्ज कराई गई है। नैनधरा के अनुसार, इस पूरे विवाद की मुख्य वजह ललितपुर से जुड़ा बहुचर्चित ‘पत्रकांड’ है। डॉ. रेखा जैन इस पत्रकांड के पीछे छिपे रसूखदार चेहरों को बेनकाब करने की कोशिश कर रही हैं, जिसके कारण दुर्भावना के तहत उन पर और उनके सहयोगियों पर यह झूठा केस लादा गया। इससे पहले भी उन समेत 19 लोगों पर जानलेवा हमले का एक मनगढ़ंत मामला दर्ज कराया जा चुका है। समाजसेवी नैनधरा ने स्पष्ट किया कि थाने स्तर पर यह मामला जमानतीय होने के बावजूद विरोधियों के डर और दहशत के कारण इन लोगों को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उन्होंने संकल्प दोहराया कि रेखा दीदी और समाज का न्यायप्रिय वर्ग पत्रकांड की जांच से पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी तकनीकी आधार पर केस खारिज करते हुए हमारे पक्ष को गृह विभाग से अभियोजन स्वीकृति लेकर सक्षम कोर्ट में दोबारा मामला पेश करने की स्वतंत्रता दी थी, जिसका वे पालन करेंगे।
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