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गांजे के काले कारोबार में दगाबाजी और नकली घाटे की भरपाई के लिए रची ‘फर्जी किडनैपिंग’ की साजिश

साइबर सेल की मदद से मोतीनगर पुलिस ने चारों को दबोचा; 3 पर केस दर्ज, मास्टरमाइंड भी नपेगा!

सागर। सागर के मोतीनगर थाना क्षेत्र के कथित अपहरण कांड में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह पूरा मामला किसी बाहरी किडनैपिंग का नहीं, बल्कि गांजा तस्करी में हुए फर्जी घाटे को कवर करने के लिए रची गई एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा निकला। दरअसल, एक शातिर युवक ने अपने ही साझीदारों के साथ मिलकर खुद के अपहरण का ड्रामा रचा और अपने पिता से 3 लाख रुपये की फिरौती मांगी। हालांकि, मुखबिर की सूचना और साइबर सेल की मुस्तैदी से पुलिस ने महज ढाई घंटे में चारों किरदारों को दबोच लिया। इस मामले में पुलिस ने देवरी थाने में पवन के भाई की रिपोर्ट पर उसके तीन साथियों के खिलाफ किडनैपिंग का केस दर्ज किया है। वहीं कानूनी जानकारों की मानें तो खुद के अपहरण की साजिश रचने वाले पवन जाटव पर भी आपराधिक षड्यंत्र (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी) के तहत शिकंजा कसना तय है।

ये हैं इस ‘क्राइम ड्रामा’ के 4 मुख्य किरदार

​पवन जाटव (निवासी: देवरी, सागर) – मुख्य साजिशकर्ता (कथित अपहृत) बलजीत सरदार (निवासी: कोलकाता) – पवन का सहयोगी एवं ​अरविंद दुबे (निवासी: गौरझामर) ​शुभम पटेल (निवासी: देवरी, सागर) दोनों साझीदार।

 उड़ीसा में खरीदा गांजा, कटनी में किया ‘खेल’

​घटनाक्रम के अनुसार, पवन जाटव और बलजीत सरदार कुछ दिन पहले चारों दोस्तों की पार्टनरशिप के 80 हजार रुपये लेकर गांजा खरीदने उड़ीसा गए थे। उड़ीसा से लौटते वक्त पवन और बलजीत के मन में खोट आ गया। उन्होंने बाकी दो साझीदारों (अरविंद और शुभम) को धोखा देते हुए कटनी में ही गुपचुप तरीके से गांजा बेच दिया और खरीदार से कहा कि यह रकम वे लोग बाद में ले लेंगे। ​इसके बाद पवन और बलजीत देवरी लौटे। उन्होंने अरविंद दुबे और शुभम पटेल को गुमराह करने के लिए एक मनगढ़ंत कहानी सुनाई। उन्होंने कहा ​”हम लोग ट्रेन की दूसरी बोगी में गांजा छिपाकर सागर ला रहे थे, लेकिन कटनी में पुलिस ने उसे जब्त कर लिया। हम दोनों जैसे-तैसे अपनी जान बचाकर वहाँ से भाग निकले।”  

घाटा पूरा करने के लिए पिता को ही बनाया निशाना

अपनी इस झूठी कहानी को सच साबित करने और गांजे के इस ‘फर्जी घाटे’ की रिकवरी के लिए पवन जाटव ने खुद एक नया पैंतरा चला। उसने अरविंद, शुभम और बलजीत से कहा कि इस नुकसान की भरपाई के लिए वे तीनों मिलकर खुद पवन के ही अपहरण की कहानी गढ़ें। इसके बाद योजना के तहत पवन के पिता को फोन कर 3 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। इधर इस पूरे घटनाक्रम की भनक गैंग के ही किसी सदस्य के जरिए पुलिस के मुखबिर को लग गई। मुखबिर ने तुरंत मोतीनगर पुलिस को सूचना दी कि गांजे की रकम कवर करने के लिए देवरी के एक युवक का उसी के तीन साथियों ने अपहरण कर लिया है। ​सूचना मिलते ही पुलिस की साइबर सेल तुरंत एक्टिव हुई। तकनीकी सर्विलांस के आधार पर घेराबंदी करते हुए पुलिस ने राजघाट रोड स्थित बाल एवं किशोर संप्रेक्षण गृह के पास पहाड़ी से इन चारों किरदारों (पवन, बलजीत, अरविंद और शुभम) को रंगे हाथों दबोच लिया।

मास्टरमाइंड बेटा भी बनेगा आरोपी!

​इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस ने देवरी पुलिस थाने में पवन के भाई की शिकायत पर बलजीत, अरविंद और शुभम के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि केस अभी तीन साथियों पर दर्ज हुआ है, लेकिन कानूनी जानकारों का कहना है कि पवन जाटव इस मामले में बच नहीं पाएगा। अपने ही पिता से वसूली के लिए खुद के अपहरण की साजिश रचने के कारण पुलिस पवन को भी आपराधिक षड्यंत्र रचने (धारा 120B या प्रासंगिक कानून) के तहत सह-आरोपी बना सकती है। 

 12/06/2026…9425172417

फोटो A I जनरेटेड है।

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